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पुरुषों की रोकटोक से एक शख्स को हो गई इतनी नफरत, उसने बदल डाला 'भगवान का फैसला'
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कुशीनगर
Updated Fri, 01 Jun 2018 04:21 PM IST
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sex change
यह एक ऐसे शख्स की कहानी है जो पुरुष से महिला बन चुका है। नाम है- रुस्तम... लेकिन जल्द ही वह अपना नाम भी बदलेगा। रुस्तम ने ये फैसला क्यों किया, यह बेहद रोचक है। दरअसल पुरुषों की रोकटोक, हुक्म चलाने की आदत उसे कतई पसंद नहीं थी। इस वजह से रुस्तम के भीतर ही भीतर पुरुषों के प्रति एक लावा उफन रहा था और फिर एक दिन उसकी यह नफरत इतनी बढ़ गई कि यह ज्वालामुखी बनकर फटी।
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उत्तर प्रदेश के कुशीनगर का रहने वाला रुस्तम मर्दों से चिढ़ता है। उनके सांये तक से वह दूरी बनाकर रखना चाहता है। खुद एक पुरुष होते हुए उसे आदमियों से नफरत होने लगी। उसे इतना बुरा लगने लगा कि अपना लिंग परिवर्तन तक करा डाला। बहरहाल, उसके महिला बनने की बरसों की ख्वाहिश को केजीएमयू के प्लास्टिक सर्जरी विभाग के डॉक्टरों की टीम ने पूरी कर दी। रुस्तम की पुरुष से महिला तक के सफर की कहानी अजीब है। इस सवाल पर कि अचानक से ऐसा फैसला क्यों? तो वह बोल पड़ता है-‘कई सालों से रात में महिलाओं के कपड़े पहनता था। साज शृंगार करता...। यह सब अचानक नहीं हुआ।
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मुझे तो हमेशा से पुरुषों से चिढ़ है। हर समय आदेश देने वाले लहजे में बात करना...। अपनी चलाना...। हर अधिकार अपने पास रखना...। मुझे ये सब बुरा लगता। पर, महिलाओं से मुझे हमदर्दी है। महिलाओं के बीच अपनापन लगता है। हाईस्कूल तक पढ़ाई की। माता-पिता का इंतकाल हो चुका है। परिवार में बड़ी बहन है। जिंदगी चलाने के लिए मजदूरी करने लगा। इसी दौरान पता चला कि गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में ऐसा ऑपरेशन हो सकता है जिससे मेरी महिला बनने की मुराद पूरी हो सकती है। वहां गया तो केजीएमयू जाने की सलाह दी गई। अपने दोस्त को साथ लिया और यहां आ गया।
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rustam
दो साल की काउंसलिंग के बाद सर्जरी
रुस्तम की मुराद पूरी की केजीएमयू के प्लास्टिक सर्जरी विभाग के हेड प्रो. एके सिंह और उनकी टीम ने। प्रो. सिंह बताते हैं कि रुस्तम दो साल पहले संपर्क में आया। मनोचिकित्सा विभाग की टीम ने उसकी कई दफा काउंसलिंग की। पर, वह अपने फैसले पर अडिग रहा। इसके बाद ‘सेक्स री एसाइनमेंट सर्जरी’ यानी लिंग परिवर्तन की प्रक्रिया शुरू की गई। इस दौरान भी वह महिलाओं के कपड़े पहनता और उनकी तरह ही साज-शृंगार करता रहता। आठ माह तक हार्मोंस थेरेपी दी गई। इससे उसकी आवाज में बदलाव के साथ ही शारीरिक बदलाव आए।
रुस्तम की मुराद पूरी की केजीएमयू के प्लास्टिक सर्जरी विभाग के हेड प्रो. एके सिंह और उनकी टीम ने। प्रो. सिंह बताते हैं कि रुस्तम दो साल पहले संपर्क में आया। मनोचिकित्सा विभाग की टीम ने उसकी कई दफा काउंसलिंग की। पर, वह अपने फैसले पर अडिग रहा। इसके बाद ‘सेक्स री एसाइनमेंट सर्जरी’ यानी लिंग परिवर्तन की प्रक्रिया शुरू की गई। इस दौरान भी वह महिलाओं के कपड़े पहनता और उनकी तरह ही साज-शृंगार करता रहता। आठ माह तक हार्मोंस थेरेपी दी गई। इससे उसकी आवाज में बदलाव के साथ ही शारीरिक बदलाव आए।
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पर, मातृत्व सुख कभी हासिल नहीं कर सकेगा
प्रो. एके सिंह
प्रो. सिंह के मुताबिक 13 दिन पहले ही सर्जरी कर उसे महिला बना दिया गया। सप्ताहभर बाद छुट्टी भी दे दी जाएगी। हालांकि वह कभी मातृत्व का सुख नहीं हासिल कर पाएगा। क्योंकि ऐसी सर्जरी में हम महिला का रूप तो दे देते हैं लेकिन गर्भाशय नहीं बनाया जा सकता। डॉक्टरों के मुताबिक रुस्तम आगे की जिंदगी घर परिवार से अलग नए तरीके से शुरू करना चाहता है। वह बीते हुए कल को भुलाना चाहता है। उसके साथ अस्पताल में रिश्ते का भाई साथ रहता है। दवाओं का खर्च डिपार्टमेंट की ओर से उठाया जा रहा है।
कई केस आए...पर, पहली बार की गई सर्जरी
प्रो. एके सिंह के केजीएमयू के इतिहास में पहली बार ‘सेक्स री एसाइनमेंट सर्जरी’ हुई है। करीब 18 साल पहले एक लड़का आया था। वह करीब चार साल तक ऑपरेशन की जिद करता रहा। पर, काउंसलिंग के बाद उसने इरादा बदल दिया। इसकेबाद भी तीन-चार केस आए, लेकिन काउंसलिंग की प्रक्रिया पूरी नहीं कर सके। सर्जरी कराने की वजह साफ नहीं कर पाए। इस वजह से ऑपरेशन नहीं कि या गया।
कई केस आए...पर, पहली बार की गई सर्जरी
प्रो. एके सिंह के केजीएमयू के इतिहास में पहली बार ‘सेक्स री एसाइनमेंट सर्जरी’ हुई है। करीब 18 साल पहले एक लड़का आया था। वह करीब चार साल तक ऑपरेशन की जिद करता रहा। पर, काउंसलिंग के बाद उसने इरादा बदल दिया। इसकेबाद भी तीन-चार केस आए, लेकिन काउंसलिंग की प्रक्रिया पूरी नहीं कर सके। सर्जरी कराने की वजह साफ नहीं कर पाए। इस वजह से ऑपरेशन नहीं कि या गया।