फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

हाजीपुर: रामविलास पासवान की विरासत बचा पाएंगे पशुपति पारस या शिवचंद्र राम मारेंगे बाजी

Fri, 03 May 2019 08:44 AM IST
Nilesh Kumar चुनाव डेस्क, अमर उजाला
चुनाव डेस्क, अमर उजाला Published by: Nilesh Kumar Updated Fri, 03 May 2019 08:44 AM IST
विज्ञापन
Lok Sabha Chunav 2019: Political profile of Hajipur Bihar, ram vilas paswan, Shivchandra
केलों का क्षेत्र हाजीपुर में दिलचस्प है राजनीतिक लड़ाई - फोटो : अमर उजाला

चार चरणों के तहत देश की 70 फीसदी लोकसभा सीटों पर मतदान हो चुका है। पांचवें चरण में छह मई को बिहार की जिन पांच सीटों पर मतदान होना हैं, उनमें राजधानी पटना से सटा हाजीपुर संसदीय क्षेत्र भी अहम स्थान रखता है। यह सीट लोजपा अध्यक्ष रामविलास पासवान का गढ़ मानी जाती है। कारण कि पासवान यहां से कई बार जीत दर्ज कर चुके हैं, भले ही पार्टी बदलते रहे हों। यहीं से उन्हें ऐसी रिकॉर्डतोड़ जीत मिली, कि गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रेकॉर्ड में उनका नाम दर्ज हो गया। 



इस बार वह चुनावी मैदान में नहीं हैं और अपनी विरासत संभालने की जिम्मेदारी अपने छोटे भाई पशुपति कुमार पारस के कंधों पर डाल दी है। वहीं, दूसरी ओर राजद-कांग्रेस नेतृत्व वाले महागठबंधन की ओर से पूर्व मंत्री शिवचंद्र राम को चुनावी मैदान में उतारा गया है।

आगे जानते हैं हाजीपुर लोकसभा सीट का सियासी समीकरण


 

Lok Sabha Chunav 2019: Political profile of Hajipur Bihar, ram vilas paswan, Shivchandra
Hajipur - फोटो : Social Media
एक नजर आंकड़ों पर
बिहार के वैशाली जिले का यह लोकसभा क्षेत्र अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीट है। 1977 में यह सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित की गई। इसके पहले तक इस सीट पर कांग्रेस का दबदबा था। लोकसभा चुनाव 2014 के आंकड़ों के मुताबिक यहां पर करीब 16.49 लाख वोटर हैं। इनमें 8.95 लाख पुरुष, जबकि 7.54 लाख महिला मतदाता हैं। 

जातीय समीकरण 
इस क्षेत्र में यादव, राजपूत, भूमिहार, कुशवाहा, पासवान की संख्या काफी अधिक है। अति पिछड़ों की भी अच्छी संख्या है, जिनकी चुनाव में जीत के लिए महत्वपूर्ण भूमिका रहती है।
Lok Sabha Chunav 2019: Political profile of Hajipur Bihar, ram vilas paswan, Shivchandra
सांकेतिक तस्वीर
हाजीपुर लोकसभा सीट का इतिहास
1952 के पहले आम चुनाव से लेकर 1971 तक इस सीट पर कांग्रेस का कब्जा रहा था। कांग्रेस नेता राजेश्वरा पटेल यहां से चुनाव जीतने में कामयाब रहे थे। 1967 में कांग्रेस के ही वाल्मीकि चौधरी निर्वाचित हुए थे। 1971 में एक बार फिर रामशेखर प्रसाद सिंह कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीतकर लोकसभा पहुंचे। इसके बाद 1977 लोकसभा चुनाव में कांग्रेस यहां से हार गई। 
विज्ञापन
विज्ञापन
Lok Sabha Chunav 2019: Political profile of Hajipur Bihar, ram vilas paswan, Shivchandra
लोजपा अध्यक्ष रामविलास पासवान(File Photo)
1977 में पहली बार सांसद बने रामविलास पासवान
साल 1977 के आम चुनाव में जनता पार्टी के टिकट पर रामविलास पासवान चुनाव जीत कर पहली बार सांसद बने। 1977 से 2014 तक वह कई बार हाजीपुर से चुनाव जीते, लेकिन उन्हें दो बार यहां से हार मिली। पहली बार 1984 में उन्हें इंडियन नेशनल कांग्रेस के उम्मीदवार रामरतन राम से तो दूसरी बार 2009 में जदयू के उम्मीदवार और पूर्व मुख्यमंत्री स्व. रामसुंदर दास ने हराया। 

रामविलास पासवान यहां कई दलों से टिकट पर चुनाव लड़े। 1977 में जनता पार्टी के टिकट पर तो 1989 में जनता दल से निर्वाचित हुए। वहीं 1999 में पार्टी बदलकर जनता दल (यूनाइटेड) से निर्वाचित हुए। 2004 में रामविलास पासवान, लोक जन शक्ति पार्टी से चुने गए।
विज्ञापन
Lok Sabha Chunav 2019: Political profile of Hajipur Bihar, ram vilas paswan, Shivchandra
Narendra Modi, Ramvilas Paswan, Chirag(File Photo) - फोटो : PTI

2014 में पासवान ने दर्ज की रिकॉर्ड जीत
2009 में जनता दल (यूनाइटेड) के राम सुंदर दास ने यह सीट अपने नाम कर ली। लेकिन 2014 में मोदी लहर पर सवार होकर राम विलास पासवान, लोक जन शक्ति पार्टी से निर्वाचित हुए। यहां से राम विलास पासवान आठ बार सांसद रह चुके हैं। राम विलास पासवान ने यहां से रिकॉर्ड मतों से जीत हासिल की थी, जिसके बाद उनका मान गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रेकॉर्ड में दर्ज हो गया था।

अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed