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EV Charging: ईवी का चार्ज डाउन! कर्नाटक सरकार ने छोड़ी 2,500 चार्जिंग स्टेशन लगाने की योजना
Fri, 11 Jul 2025 08:11 PM IST
अमर शर्मा
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Fri, 11 Jul 2025 08:11 PM IST
सार
देश में जैसे-जैसे इलेक्ट्रिक गाड़ियों की लोकप्रियता बढ़ रही है, वैसे-वैसे सरकार और निजी कंपनियां चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने में जुटी हैं। लेकिन कर्नाटक सरकार की एक बड़ी योजना पटरी से उतर गई है।
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EV charging station
- फोटो : AI
देश में जैसे-जैसे इलेक्ट्रिक गाड़ियों की लोकप्रियता बढ़ रही है, वैसे-वैसे सरकार और निजी कंपनियां चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने में जुटी हैं। लेकिन कर्नाटक सरकार की एक बड़ी योजना पटरी से उतर गई है। सरकार ने पूरे राज्य में 2,500 इलेक्ट्रिक व्हीकल चार्जिंग स्टेशन लगाने का प्लान तैयार किया था। लेकिन बोली लगाने वालों की कमी के चलते इस योजना को फिलहाल रद्द कर दिया गया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, बंगलूरू जैसे ईवी-फ्रेंडली शहर में भी कोई दिलचस्पी नहीं दिखी।
Electric Vehicles Charging Station
- फोटो : Freepik
क्या थी ये ईवी चार्जिंग स्टेशन योजना?
कर्नाटक सरकार ने सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP मॉडल) के तहत पूरे राज्य में 2,500 ईवी चार्जिंग स्टेशन लगाने की योजना बनाई थी। लेकिन छह बार कोशिश करने के बाद भी कोई निजी कंपनी इस प्रोजेक्ट में हिस्सा लेने को तैयार नहीं हुई। इससे पहले 2023-24 में भी ऐसी ही एक योजना के तहत 9 जिलों में 585 चार्जिंग स्टेशन बनाने की कोशिश हुई थी। लेकिन अक्तूबर 2023 में काम सौंपे जाने के बावजूद वो प्रोजेक्ट भी आगे नहीं बढ़ पाया।
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कर्नाटक सरकार ने सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP मॉडल) के तहत पूरे राज्य में 2,500 ईवी चार्जिंग स्टेशन लगाने की योजना बनाई थी। लेकिन छह बार कोशिश करने के बाद भी कोई निजी कंपनी इस प्रोजेक्ट में हिस्सा लेने को तैयार नहीं हुई। इससे पहले 2023-24 में भी ऐसी ही एक योजना के तहत 9 जिलों में 585 चार्जिंग स्टेशन बनाने की कोशिश हुई थी। लेकिन अक्तूबर 2023 में काम सौंपे जाने के बावजूद वो प्रोजेक्ट भी आगे नहीं बढ़ पाया।
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EV Charging Stations
- फोटो : Freepik
अब प्लान B पर काम करेगी सरकार
सरकार ने अब 'प्लान बी' अपनाने का फैसला किया है। इसके तहत अब बंगलूरू इलेक्ट्रिसिटी सप्लाई कंपनी लिमिटेड (BESCOM) को यह जिम्मेदारी दी गई है कि वह शहर में 100 ईवी चार्जिंग स्टेशन लगाए। इसके लिए BESCOM ही फंडिंग भी करेगी, जिसकी लागत करीब 35 करोड़ रुपये बताई जा रही है। इस प्लान को 16 जून को सरकारी आदेश के जरिए आधिकारिक रूप से लागू किया गया।
यह भी पढ़ें - Used Cars: भारत में सेकंड हैंड कारों की मांग में जबरदस्त उछाल, नई कारों से दोगुनी तेजी से बढ़ रहा बाजार
सरकार ने अब 'प्लान बी' अपनाने का फैसला किया है। इसके तहत अब बंगलूरू इलेक्ट्रिसिटी सप्लाई कंपनी लिमिटेड (BESCOM) को यह जिम्मेदारी दी गई है कि वह शहर में 100 ईवी चार्जिंग स्टेशन लगाए। इसके लिए BESCOM ही फंडिंग भी करेगी, जिसकी लागत करीब 35 करोड़ रुपये बताई जा रही है। इस प्लान को 16 जून को सरकारी आदेश के जरिए आधिकारिक रूप से लागू किया गया।
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Electric car EV charging battery at charger station
- फोटो : Freepik
ईवी स्टेशन तो हैं, लेकिन कहां और कितने?
मार्च 2025 तक कर्नाटक में कुल 5,879 ईवी चार्जिंग स्टेशन थे, जिनमें से अकेले बंगलूरू में ही 4,000 से ज्यादा हैं। यानी राज्य का ज्यादातर चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर सिर्फ राजधानी में केंद्रित है। BESCOM के मैनेजिंग डायरेक्टर शिवशंकर ने बताया कि पहले जिन प्राइवेट कंपनियों को काम दिया गया था। उन्हें जरूरी जमीन उपलब्ध कराने में संबंधित विभागों ने ठीक से सहयोग नहीं किया। नतीजा यह हुआ कि चार्जिंग स्टेशन का काम आगे ही नहीं बढ़ पाया।
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मार्च 2025 तक कर्नाटक में कुल 5,879 ईवी चार्जिंग स्टेशन थे, जिनमें से अकेले बंगलूरू में ही 4,000 से ज्यादा हैं। यानी राज्य का ज्यादातर चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर सिर्फ राजधानी में केंद्रित है। BESCOM के मैनेजिंग डायरेक्टर शिवशंकर ने बताया कि पहले जिन प्राइवेट कंपनियों को काम दिया गया था। उन्हें जरूरी जमीन उपलब्ध कराने में संबंधित विभागों ने ठीक से सहयोग नहीं किया। नतीजा यह हुआ कि चार्जिंग स्टेशन का काम आगे ही नहीं बढ़ पाया।
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Electric Car
- फोटो : Freepik
बंगलूरू से बाहर ईवी का फैलाव भी एक चुनौती
एक और वजह यह रही कि बंगलूरू के बाहर इलेक्ट्रिक वाहनों की पहुंच अभी भी सीमित है। ऐसे में निजी कंपनियों को निवेश करने में जोखिम दिखा। हालांकि अब कई वाहन निर्माता कंपनियां (OEM) और निजी प्लेयर्स खुद अपना चार्जिंग नेटवर्क तेजी से बढ़ा रहे हैं। ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग ईवी खरीदने के लिए आकर्षित हों।
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एक और वजह यह रही कि बंगलूरू के बाहर इलेक्ट्रिक वाहनों की पहुंच अभी भी सीमित है। ऐसे में निजी कंपनियों को निवेश करने में जोखिम दिखा। हालांकि अब कई वाहन निर्माता कंपनियां (OEM) और निजी प्लेयर्स खुद अपना चार्जिंग नेटवर्क तेजी से बढ़ा रहे हैं। ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग ईवी खरीदने के लिए आकर्षित हों।
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