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कार में सीट बेल्ट: सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी, कहा- कानून मौजूद, सख्ती से पालन कराना एजेंसियों की जिम्मेदारी

Wed, 09 Sep 2026 04:48 PM IST
Amar Sharma ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amar Sharma Updated Wed, 09 Sep 2026 04:48 PM IST
सार

चलती गाड़ियों में सीट बेल्ट पहनना अब सिर्फ एक औपचारिकता नहीं, बल्कि एक अनिवार्य सुरक्षा कानून है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि ट्रैफिक और कानून लागू करने वाली एजेंसियों की यह प्राथमिक जिम्मेदारी है कि वे सड़कों पर इसका शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित कराएं।

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SC on Seat Belt Rules: Mandatory Compliance Is Law Enforcement’s Duty, Says Supreme Court
SC on Seat Belt Rules - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि वाहन चलने के दौरान सीट बेल्ट पहनना अनिवार्य करने वाले पर्याप्त कानून मौजूद हैं। अब मुख्य सवाल इन कानूनों के पालन का है और यह सुनिश्चित करना कानून प्रवर्तन एजेंसियों की जिम्मेदारी है।

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यह टिप्पणी चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) (सीजेआई) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने उस याचिका पर सुनवाई के दौरान की, जिसमें वाहनों में सीट बेल्ट पहनना अनिवार्य रूप से लागू कराने के निर्देश देने की मांग की गई थी। 

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सुप्रीम कोर्ट ने सीट बेल्ट कानून को लेकर क्या कहा?

याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने पीठ को बताया कि सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली कई मौतों और गंभीर चोटों को रोका जा सकता है। अगर सीट बेल्ट पहनने से जुड़े कानून का प्रभावी ढंग से पालन किया जाए।

उन्होंने यह भी बताया कि कानून होने के बावजूद कई वाहनों में सीट बेल्ट प्रभावी रूप से इस्तेमाल नहीं हो पातीं। इसके पीछे फैंसी सीट कवर या वाहनों में किए गए अन्य बदलाव जैसी वजहें बताई गईं।

इस पर पीठ ने कहा कि सीट बेल्ट को लेकर कानून बिल्कुल स्पष्ट है और असली सवाल उसके कार्यान्वयन का है। 
 

वाहन में किन लोगों के लिए सीट बेल्ट पहनना जरूरी है?

पीठ ने केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 के नियम 138(3) का उल्लेख करते हुए कहा कि वाहन चलते समय चालक, आगे की सीट पर बैठे व्यक्ति और आगे की ओर मुंह करके बैठने वाली पिछली सीटों के यात्रियों के लिए सीट बेल्ट पहनना जरूरी है। 

अदालत ने कहा कि सड़क सुरक्षा और वाहन में सीट बेल्ट पहनने से जुड़े पर्याप्त कानून पहले से मौजूद हैं।

SC on Seat Belt Rules: Mandatory Compliance Is Law Enforcement’s Duty, Says Supreme Court
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला

क्या कमजोर कानून प्रवर्तन भी सड़क दुर्घटनाओं की समस्या है?

याचिकाकर्ता के वकील ने तर्क दिया कि लोगों की लापरवाही और कानून के कमजोर क्रियान्वयन के कारण देशभर में सड़क दुर्घटनाओं में गंभीर चोटें और मौतें होती हैं।

पीठ ने माना कि सीट बेल्ट समेत सड़क सुरक्षा उपायों को लेकर पर्याप्त कानूनी प्रावधान मौजूद हैं। इसलिए कानून का पालन न करना या नियम तोड़ने वालों के खिलाफ कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा उचित कार्रवाई न करना मूल रूप से कानून-व्यवस्था बनाए रखने और कानून लागू करने से जुड़ा विषय है।

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सीट बेल्ट नियमों का पालन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी किसकी है?

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि कानून का पालन सुनिश्चित करना कानून प्रवर्तन एजेंसियों का काम है।

पीठ ने यह भी सवाल उठाया कि देश के हर नागरिक और हर चालक से नियमों का पालन किस तरह सुनिश्चित कराया जा सकता है। अदालत ने याचिकाकर्ता से इस मुद्दे पर अपने सुझाव संबंधित सक्षम प्राधिकरण को भेजने को कहा। 

SC on Seat Belt Rules: Mandatory Compliance Is Law Enforcement’s Duty, Says Supreme Court
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI

सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर क्या फैसला दिया? 

सुप्रीम कोर्ट ने याचिका का निपटारा कर दिया। हालांकि, याचिकाकर्ता को यह स्वतंत्रता दी गई कि वह अपनी याचिका की एक प्रति संबंधित प्राधिकरण को भेज सकता है। और उसमें दिए गए सुझावों पर विचार करने का अनुरोध कर सकता है।

इस तरह अदालत ने सीट बेल्ट पहनने की कानूनी अनिवार्यता को लेकर किसी नए नियम का निर्देश देने के बजाय मौजूदा कानूनों के प्रभावी पालन और उनके क्रियान्वयन की जिम्मेदारी कानून प्रवर्तन एजेंसियों पर स्पष्ट की है।

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