शनि ग्रह न्याय के देवता हैं। ये व्यक्ति को उनके कर्मों के अनुसार फल देते हैं। मान्यता के अनुसार शनि महाराज सूर्यदेव के पुत्र हैं लेकिन पिता और पुत्र में मतभेद के चलते शनि अपने पिता से नाराज रहते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शनि देव मकर और कुंभ राशि के स्वामी है। शनि की छाया को बहुत ही अशुभ माना गया है। आइए जानते हैं साल 2021 में किन राशियों पर रहेगी शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या, साथ ही जानिए इनके अशुभ प्रभावों से बचने के उपाय।
साल 2021 में इन तीन राशियों पर रहेगी शनि साढ़ेसाती, दो राशियों पर ढैय्या, जानें कैसे बचें
साल 2021 में शनिदेव अपनी स्वराशि मकर में ही विराजमान रहेंगे। लेकिन नए साल में शनि का नक्षत्र परिवर्तन होगा। 22 जनवरी को शनि देव श्रवण नक्षत्र में प्रवेश करेंगे, इससे पहले ये उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में रहेंगे। वहीं 23 मई 2021 को मकर राशि में ही वक्री होकर 11 अक्तूबर 2021 से पुनः मार्गी अवस्था में गोचर करेंगे।
वर्ष 2021 में तीन राशियों पर शनि की साढ़ेसाती रहेगी। इस साल धनु, मकर और कुंभ राशि के जातकों के ऊपर शनि की साढ़ेसाती रहेगी। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार चंद्र राशि से जब शनि 12वें भाव, पहले भाव व द्वितीय भाव से निकलते हैं। उस अवधि को शनि की साढ़ेसाती कहा जाता है। यह अवधि साढ़े सात वर्ष की होती है।
नए साल में मिथुन और तुला राशि में शनि ढैय्या का असर देखने को मिलेगा। ज्योतिष विज्ञान के अनुसार, जब गोचर में शनि किसी राशि से चतुर्थ व अष्टम भाव में होता है तो यह स्थिति ढैय्या कहलाती है।
- यदि आप पर शनि की साढ़ेसाती चल रही है, आप खुद को तमाम परेशानियों से घिरा पा रहे हैं तो शमी के वृक्ष की जड़ को काले कपड़े में पिरोकर शनिवार की शाम दाहिने हाथ में बांधे तथा ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनिश्चराय नम: मंत्र का तीन माला जप करें।
- शनि साढ़ेसाती से बचने के लिए शिव की उपासना एक सिद्ध उपाय है। नियमपूर्वक शिव सहस्त्रनाम या शिव के पंचाक्षरी मंत्र का पाठ करने से शनि के प्रकोप का भय जाता रहता है और सभी बाधाएं दूर होती हैं। इस उपाय से शनि द्वारा मिलने वाला नकारात्मक परिणाम समाप्त हो जाता है।
- भगवान शिव की तरह उनके अंशावतार बजरंग बली की साधना से भी शनि से जुड़ी दिक्कतें दूर हो जाती हैं। कुंडली में शनि से जुड़े दोषों को दूर करने के लिए प्रतिदिन सुंदरकांड का पाठ करें और हनुमान जी के मंदिर में जाकर अपनी क्षमता के अनुसार कुछ मीठा प्रसाद चढ़ाएं।
- शमी का वृक्ष घर में लगाएं और नियमित रूप से उसकी पूजा करें। इससे न सिर्फ आपके घर का वास्तुदोष दूर होगा बल्कि शनिदेव की कृपा भी बनी रहेगी। इसी तरह काले कपड़े में शमी वृक्ष की जड़ को बांधकर अपनी दांयी बाजू पर धारण करने पर शनिदेव आपका बुरा नहीं करेंगे बल्कि उन्नति में सहायक होंगे।
- शनिवार के दिन शनि महाराज को नीले रंग का अपराजिता फूल चढ़ाएं और काले रंग की बाती और तिल के तेल से दीप जलाएं। साथ ही शनिवार के दिन महाराज दशरथ का लिखा शनि स्तोत्र पढ़ें। शनिवार या अमावस्या के दिन सूर्यास्त के बाद पीपल के पेड़ के नीचे बैठकर शनिदेव का ध्यान करें। फिर एक दीपक में सरसों का तेल डालकर जलाएं।