मृत्युलोक के दंडाधिकारी शनिदेव 7 जनवरी की शाम 5 बजकर 38 मिनट पर पश्चिम में अस्त हो रहे हैं। पुनः 09 फ़रवरी की मध्यरात्रि 12 बजकर 50 मिनट पर पूर्व में उदय होंगे। इनका अस्त होना कई तरह के उतार-चढ़ाव लाता है। मेदिनी ज्योतिष के लिए तो इसे अच्छा नहीं कहा जा सकता, क्योंकि जनमानस में अराजकता फैलने की आशंका रहती है। प्रशासनिक विभाग कमजोर पड़ने लगते हैं। जनता अपने आप से निर्णय लेने लगती है और कहीं ना कहीं कानून का उल्लंघन भी करती है। किसी ही ग्रह के अस्त होने का तात्पर्य है उसका तेजहीन हो जाना बुझ जाना अथवा अस्त हो जाना। इसलिए जब तक शनिदेव उदय नहीं होंगे बाजार भी बेलगाम रहेगा, जनता भी बेलगाम रहेगी। इनके अस्त होने का सभी राशियों पर कैसा प्रभाव पड़ेगा इसका ज्योतिषीय विश्लेषण करते हैं।
7 जनवरी को शनि के अस्त होने से इन राशि वालों पर पड़ेगा शुभ-अशुभ प्रभाव
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मेष राशि
राशि से दशम भाव में शनि के अस्त होने के परिणामस्वरूप कार्य व्यापार में थोड़ी शिथिलता आएगी। मेहनत अधिक करेंगे लाभ कब मिलेगा। जो कार्य एक हफ्ते में हो जाना चाहिए था उसे पूर्ण होने में दो हफ्ते लग सकते हैं। सरकारी विभाग में भी प्रतीक्षित पड़े कार्य कुछ और समय ले सकते हैं। पारिवारिक कलह एवं मानसिक अशांति में कमी आएगी मित्रों तथा संबंधियों से भी सहयोग प्राप्ति के योग बन रहे हैं।
वृषभ राशि
आपकी राशि के लिए सर्वाधिक योगकारक ग्रह शनिदेव के अस्त होने के प्रभाव स्वरूप कहीं न कहीं कार्य बाधाओं का सामना करना पड़ेगा किंतु यह तभी तक रहेगा जब तक ये अस्त रहेंगे। उदय होते ही पुनः सारे कार्य सुचारू रूप से गति पकड़ेंगे। विदेश यात्रा अथवा विदेशी नागरिकता के लिए किया गया आवेदन भी थोड़ा और समय ले सकता है। धर्म-कर्म के मामलों में रुचि बढ़ेगी और दान पुण्य भी करेंगे।
मिथुन राशि
राशि से अष्टम मृत्यु भाव में शनि देव का अस्त होना आपके लिए राहत भरी खबर है क्योंकि स्वास्थ्य पर पड़ रहे इनके दुष्प्रभाव में कमी आएगी। शारीरिक पीड़ा भी दूर होगी। यदि आप हॉस्पिटल में भर्ती हैं तो घर आने के योग। मान-सम्मान की वृद्धि होगी। कोर्ट कचहरी के मामले भी आसानी से सुलझ जाएंगे। विद्यार्थियों तथा प्रतियोगिता में बैठने वाले छात्रों को अच्छे अंक के लिए और प्रयत्न करने होंगे।
कर्क राशि
राशि से सप्तम भाव में शनि देव के अस्त होने के प्रभावस्वरूप कार्य व्यापार में और उन्नति होगी। झगड़े विवाद तथा पारिवारिक कलह में भी कमी आएगी। दांपत्य जीवन में भी आपसी स्नेह बढ़ेगा। शादी विवाह से संबंधित चल रही वार्ता सफल रहेगी। ससुराल पक्ष से भी रिश्ते मधुर होंगे। स्वास्थ्य भी अपेक्षाकृत बेहतर रहेगा और आपके द्वारा लिए गए निर्णय तथा किए गए कार्यों की सराहना होगी।