ज्योतिष में शनि ग्रह का ज्योतीषीय गणनाओं में विशेष महत्व होता है। शनि सबसे मंद चाल चलने वाले ग्रह होते हैं, यह एक राशि में करीब ढाई वर्षों तक रहते हैं, फिर इसके बाद दूसरी राशि में गोचर करते हैं। शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या को काफी अशुभ माना जाता है। वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, न्याय और कर्मफलदाता शनि इस समय गुरु के स्वामित्व वाली राशि मीन में हैं। इसके साथ ही शनि इस समय रेवती नक्षत्र के पहले चरण में हैं जो 9 अक्तूबर को उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के चौथे चरण में वक्री अवस्था में गोचर करने वाले हैं। शनि इस अवस्था में 11 दिसंबर तक रहेंगे। फिर 08 फरवरी2027 को फिर से रेवत्री नक्षत्र में के पहले चरण में मार्गी अवस्था में गोचर करेंगे। आइए जानते हैं शनि के उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में जाने से मेष, वृषभ और मिथुन राशि पर कैसा प्रभाव पड़ेगा।
अक्तूबर में न्याय और कर्मफलदाता शनि बदलेंगे अपनी चाल, जानें मेष, वृषभ और मिथुन राशि पर कैसा होगा असर
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Wed, 30 Sep 2026 10:27 AM IST
सार
न्याय और कर्मफलदाता शनि 9 अक्तूबर 2026 को मीन राशि में वक्री अवस्था में उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। आइए जानते हैं इससे मेष, वृषभ और मिथुन राशि पर कैसा पड़ेगा प्रभाव।
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