Shani Asta 2025: शनिदेव को न्याय और कर्म के देवता माने गए हैं। शनि सभी ग्रहों में सबसे मंद गति से चलने वाले ग्रह हैं, यह किसी एक राशि में करीब ढाई वर्षों तक रहते हैं फिर उसके बाद राशि परिवर्तन करते हैं। इस साल शनि अपनी मूल त्रिकोण राशि कुंभ की यात्रा को खत्म करते हुए गुरु की राशि मीन में प्रवेश कर जाएंगे। शनि 29 मार्च 2025 राशि परिवर्तन करेंगे, लेकिन उसके पहले न्याय और कर्मफलदाता शनि 23 फरवरी को अस्त हो जाएंगे। शनि के अस्त होने पर सभी 12 राशियों के जातकों पर प्रभाव देखने को मिलेगा। वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ग्रहों का अस्त होना एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें ग्रह जब भ्रमण करते हुए सूर्य के बेहद नजदीक आ जाते हैं तो ग्रह सूर्य की ऊर्जा के समाने अपनी शक्तियां खो देते हैं। आपको बता दें कि शनि 23 फरवरी को जब कुंभ राशि में रहते हुए अस्त होंगे तो करियर में परेशानियां को सामना करना पड़ सकता है।
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Shani Asta 2025: शनि राशि परिवर्तन करने से पहले होंगे अस्त, जानिए किन राशि वालों को रहना होगा सतर्क
Sun, 16 Feb 2025 01:57 PM IST
विनोद शुक्ला
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Sun, 16 Feb 2025 01:57 PM IST
सार
शनि 29 मार्च 2025 राशि परिवर्तन करेंगे, लेकिन उसके पहले न्याय और कर्मफलदाता शनि 23 फरवरी को अस्त हो जाएंगे। शनि के अस्त होने पर सभी 12 राशियों के जातकों पर प्रभाव देखने को मिलेगा।
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शनि अस्त
- फोटो : amar ujala
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मेष राशि
मेष राशि के जातकों के लिए शनि आपके ग्यारहवें भाव में अस्त होंगे। कुंडली का ग्यारहवां भाव आय और इच्छा पूर्ति का होता है ऐसे में आपको सफलता प्राप्त करने में कठिनाईयों का सामना करना पड़ सकता है। मेष राशि के जातकों के लिए शनि दसवें और ग्यारहवें भाव के स्वामी होते हैं। ऐसे में शनि के अस्त होने पर आपके जीवन में काफी महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिलेगा।
मेष राशि के जातकों के लिए शनि आपके ग्यारहवें भाव में अस्त होंगे। कुंडली का ग्यारहवां भाव आय और इच्छा पूर्ति का होता है ऐसे में आपको सफलता प्राप्त करने में कठिनाईयों का सामना करना पड़ सकता है। मेष राशि के जातकों के लिए शनि दसवें और ग्यारहवें भाव के स्वामी होते हैं। ऐसे में शनि के अस्त होने पर आपके जीवन में काफी महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिलेगा।
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- फोटो : amar ujala
तुला राशि
तुला राशि के जातकों के लिए शनि आपकी कुंडली के चौथे और पांचवें भाव के स्वामी हैं और शनि का अस्त होना आपके पंचम भाव को प्रभावित करेगा। ऐसे में शनि के अस्त होने पर करियर को लेकर चिंतांएं बढ़ सकती है। आपको कार्य क्षेत्र में अपनी बुद्धि और विवेक के बल पर काम करने की जररूत है। नौकरी पेशा जातकों को नौकरी में कुछ दिक्कतें आ सकती हैं। वहीं व्यापार में आपको औसत ही मुनाफा प्राप्त होगा। सेहत के नजरिए से आपको अपने स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से निजात के लिए धन खर्च हो सकते हैं। आपके खर्चों में बेताहाशा वृद्धि हो सकती है।
तुला राशि के जातकों के लिए शनि आपकी कुंडली के चौथे और पांचवें भाव के स्वामी हैं और शनि का अस्त होना आपके पंचम भाव को प्रभावित करेगा। ऐसे में शनि के अस्त होने पर करियर को लेकर चिंतांएं बढ़ सकती है। आपको कार्य क्षेत्र में अपनी बुद्धि और विवेक के बल पर काम करने की जररूत है। नौकरी पेशा जातकों को नौकरी में कुछ दिक्कतें आ सकती हैं। वहीं व्यापार में आपको औसत ही मुनाफा प्राप्त होगा। सेहत के नजरिए से आपको अपने स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से निजात के लिए धन खर्च हो सकते हैं। आपके खर्चों में बेताहाशा वृद्धि हो सकती है।
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- फोटो : amar ujala
मकर राशि
मकर राशि के जातकों के लिए कुंडली में शनि लग्न और दूसरे भाव के स्वामी हैं और शनि आपके दूसरे भाव में अस्त होंगे। ऐसे में आपको मिलने वाले लाभ में कमी आ सकती है। धन संबंधी परेशानियों से जूझना पड़ सकता है। कामकाज के सिलसिले में लंबी दूरी की यात्रा करनी पड़ सकती है। जो व्यापार करते हैं उनके लिए शनि का अस्त होना मिलाजुला परिणाम देगा। वहीं प्रेम जीवन में कुछ गलतफहिमां और प्रेम का अभाव हो सकता है।
मकर राशि के जातकों के लिए कुंडली में शनि लग्न और दूसरे भाव के स्वामी हैं और शनि आपके दूसरे भाव में अस्त होंगे। ऐसे में आपको मिलने वाले लाभ में कमी आ सकती है। धन संबंधी परेशानियों से जूझना पड़ सकता है। कामकाज के सिलसिले में लंबी दूरी की यात्रा करनी पड़ सकती है। जो व्यापार करते हैं उनके लिए शनि का अस्त होना मिलाजुला परिणाम देगा। वहीं प्रेम जीवन में कुछ गलतफहिमां और प्रेम का अभाव हो सकता है।
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वृश्चिक राशि
वृश्चिक राशि के जातकों के लिए शनि तीसरे और चौथे भाव के स्वामी होते हैं और इनका अस्त होना आपके चौथे भाव में होगा। वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कुंडली का चौथा भाव वाहन और मकान सुख से संबंधित होता है। ऐसे में सुख-सुविधाओं में कमी आ सकती है। शनि के अस्त होने पर आपके कामकाज में अचानक से परेशानियां बढ़ सकती है। नौकरीपेशा जातकों को नौकरी में दबाव के चलते नौकरी में बदलाव करने के बारे में मन में विचार आ सकता है।
वृश्चिक राशि के जातकों के लिए शनि तीसरे और चौथे भाव के स्वामी होते हैं और इनका अस्त होना आपके चौथे भाव में होगा। वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कुंडली का चौथा भाव वाहन और मकान सुख से संबंधित होता है। ऐसे में सुख-सुविधाओं में कमी आ सकती है। शनि के अस्त होने पर आपके कामकाज में अचानक से परेशानियां बढ़ सकती है। नौकरीपेशा जातकों को नौकरी में दबाव के चलते नौकरी में बदलाव करने के बारे में मन में विचार आ सकता है।