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डीजल टैक्सियों को बड़ी राहत, SC ने दिया परमिट खत्म होने तक चलाने का आदेश

Tue, 10 May 2016 04:44 PM IST
टीम डिजीटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजीटल/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Tue, 10 May 2016 04:44 PM IST
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Diesel taxis relief, SC permits to continued by the end of permit.
डीजल वाहनों को राहत

दिल्ली-एनसीआर में डीजल टैक्सियों को बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने डीजल टैक्सियों के परमिट खत्म होने तक चलते रहने के आदेश दिए हैं। ऐसे में फिलहाल डीजल टैक्सियां चलती रहेंगी।

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दरअसल डीजल टैक्सियों का परमिट 5 साल के लिए होता है। इसलिए जिन टैक्सियों का परमिट बाकी हैं, वे टैक्सियां चलती रहेंगी। हालांकि कोर्ट ने साफ किया है कि आगे नई डीजल टैक्सियों को परमिट नहीं मिलेगा।
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वहीं जानकारी के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट दिल्ली-एनसीआर में बीपीओ(कॉल सेंटर) कर्मियों को लाने-ले जाने वाली ऑल इंडिया परमिट वाली डीजल टैक्सियों को छूट दे सकती है। इसके अलावा शीर्ष अदालत ने यह भी संकेत दिए हैं कि 2000 सीसी से इंजन क्षमता वाले डीजल वाहनों के पंजीकरण पर लगी रोक के आदेश पर फिर से विचार किया जा सकता है।
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साथ ही शीर्ष अदालत ने दिल्ली सरकार, पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण अथॉरिटी(ईपीसीए) और टैक्सी ऑनर्स एसोसिएशन को डीजल टैक्सियों को चरणबद्ध तरीके से हटाने को लेकर पुख्ता रोडमैप तैयार करने के लिए कहा है।

चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि हमारा मानना है कि डीजल वाहन अधिक प्रदूषण करते हैं। हम सही भी हो सकते है या गलत भी हो सकते हैं। लिहाजा हम अपने पूर्व आदेश पर पुनर्विचार कर सकते हैं। शीर्ष अदालत ने इस ओर भी इशारा किया कि सभी डीजल वाहनों पर उसकी कीमत के हिसाब से पर्यावरण उपकर लगाया जा सकता है।

कॉल सेंटर के लिए भी छूट देने के लगाए जा रहे कयास

Diesel taxis relief, SC permits to continued by the end of permit.
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : Getty Images

अदालत ने यह टिप्पणी तब की जब सॉलिसिटर जनरल रंजीत कुमार ने कहा कि प्रदूषण के लिए सिर्फ डीजल ही जिम्मेदार नहीं है। सीएनजी और पेट्रोल आदि ईंधन भी पर्यावरण को प्रदूषित करती हैं। उन्होंने कहा कि पेट्रोल से कार्बन मोनोऑक्साइड उत्सर्जित होती हैं, सीएनजी से नाइट्रोजन ऑक्साइड जबकि डीजल से पीएम। ये सभी प्रदूषण फैलाती है।

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने मेक इन इंडिया पॉलिसी की शुरुआत की है और ऑटोमोबाइल सेक्टर को प्रदूषण का जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है। उन्होंने आईआईटी कानपुर की स्टडी का हवाला देते हुए कहा कि धूल आदि से भी पर्यावरण को बहुत नुकसान हो रहा है।

वहीं नेशनल एसोसिएशन ऑफ सॉफ्टवेयर एंड सर्विसेज कंपनी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि दिल्ली-एनसीआर में डीजल टैक्सियों पर रोक से बीपीओ(कॉल सेंटर ) को भारी परेशानी हो रही है। बीपीओ कर्मियों को ले-लेजाने में परेशानी हो रही है।

उन्होंने गुहार लगाई कि बीपीओ कर्मियों को इस रोक के दायरे से अलग रखा जाए। उन्होंने कहा कि इस पाबंदी से उनका व्यवसाय प्रभावित हो रहा है। उन्होंने कहा कि अस्थायी तौर पर इस पर लगी रोक हटाई जाए और हमें कुछ वक्त दिया जाए। नहीं तो यह पूरा बिजनेस देश से बाहर चला जाएगा। उन्होंने कहा कि बीपीओ इंडस्ट्री में कार्यरत करीब ढाई लाख आमतौर पर डीजल टैक्सियों से ही आते-जाते हैं।

मालूम हो कि गत शनिवार को सुप्रीम कोर्ट ने डीजल कैब को सीएनजी में परिवर्तित करने की डेडलाइन को बढ़ाने से इनकार कर दिया था। अदालत ने कहा कि हमने इसकेलिए पर्याप्त समय दिया था। साथ ही अदालत ने 2000 सीसी से अधिक इंजन क्षमता वाले डीजल वाहनों के पंजीकरण पर लगी रोक जारी रखी थी।

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