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देश के लिए शहीद की शहादत का अपमान, परिवार आज इस हालत में है
ब्यूरो/अमर उजाला, जालंधर(पंजाब)
Updated Tue, 30 May 2017 09:36 AM IST
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शहीद का परिवार
- फोटो : अमर उजाला
शहीदों के परिवारों को पेंशन के अलावा आज तक कोई सहायता नहीं मिली है। कारगिल युद्ध में शहीद सैनिकों के पारिवारिक सदस्यों का कहना है कि हमने अपने बच्चों को बड़ी मुश्किलों से पाला व पढ़ाया लिखाया है। अब बच्चों को सरकारी वादे के अनुसार नौकरी नहीं दी जा रही, जो सरकार का शहीदों के परिवारों के साथ धोखा है। जम्मू कश्मीर के उडी सेक्टर में साल 1998 में शहीद हुए लेफ्टिनेंट जोगा सिंह के बेटे गुलशन सिंह और पत्नी जोगिन्द्र कौर ने आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि 1999 से पहले शहीद हुए सैनिकों के साथ वार टाइम व पीस टाइम के नाम पर भेदभाव किया जा रहा है। पंजाब सरकार ने जो योजना बनाई थी, उसमें अशोक चक्र विजेता का जिक्र तक नहीं किया गया था।
कारगिल युद्ध के दौरान सीमाओं पर देश की सुरक्षा करते हुए शहीद होने वाले सैनिकों के परिवारों को सेना व केंद्र सरकार की ओर से वित्तीय सहायता के अलावा कई तरह की अन्य सुविधाएं भी दी जा रही है। लेकिन साल 1999 से पहले शहीद हुए शौर्य चक्र व कीर्तीचक्र विजेताओं के परिवार आज भी सरकारी नौकरी के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं।
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कारगिल युद्ध के दौरान सीमाओं पर देश की सुरक्षा करते हुए शहीद होने वाले सैनिकों के परिवारों को सेना व केंद्र सरकार की ओर से वित्तीय सहायता के अलावा कई तरह की अन्य सुविधाएं भी दी जा रही है। लेकिन साल 1999 से पहले शहीद हुए शौर्य चक्र व कीर्तीचक्र विजेताओं के परिवार आज भी सरकारी नौकरी के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं।
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अशोक चक्र विजेताओं के लिए सरकार ने नहीं दी मदद
मदद की दरकार में शहीद जवानों का परिवार
- फोटो : file photo
उन्होंने कहा कि कारगिल युद्ध के पश्चात एक जनवरी 1999 को पंजाब सरकार ने सैनिकों के परिवारों के लिए ऑनर एंड ग्रेटिट्यूड योजना बनाई थी, लेकिन इसमें भी अशोक चक्र विजेताओं के लिए सरकार ने कोई राहत शामिल नहीं की। इस योजना के अधीन एक जनवरी 1999 से पहले और बाद में शहीद हुए सैनिकों के परिजनों को केवल सरकारी नौकरी ही दी जा रही है।
पठानकोट से नायब सूबेदार बलदेव राज की पत्नी कमला रानी व गुरदासपुर के नायक ध्यान सिंह की पत्नी पलविंद्र कौर ने कहा कि उनके बच्चों को सरकारी नौकरी दी जाए। नायब सूबेदार बलदेव राज 1994 में शहीद हुए थे। उनको कीर्तीचक्र व 1992 में शहीद हुए नायक ध्यान सिंह को शौर्यचक्र से नवाजा गया था। इन सभी ने सरकार से मांग की है कि उनको उनके बनते हक के अनुसार सरकारी नौकरी व बाकी सहुलियतें दी जाएं।
पठानकोट से नायब सूबेदार बलदेव राज की पत्नी कमला रानी व गुरदासपुर के नायक ध्यान सिंह की पत्नी पलविंद्र कौर ने कहा कि उनके बच्चों को सरकारी नौकरी दी जाए। नायब सूबेदार बलदेव राज 1994 में शहीद हुए थे। उनको कीर्तीचक्र व 1992 में शहीद हुए नायक ध्यान सिंह को शौर्यचक्र से नवाजा गया था। इन सभी ने सरकार से मांग की है कि उनको उनके बनते हक के अनुसार सरकारी नौकरी व बाकी सहुलियतें दी जाएं।