बहादुरगढ़: एचएसआईआईडीसी औद्योगिक क्षेत्र की सभी इकाइयों की होगी पर्यावरणीय जांच, NGT ने गठित की संयुक्त समिति
एनजीटी ने मामले को पर्यावरणीय मानकों के अनुपालन से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा मानते हुए प्रतिवादियों को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं। आवेदक को प्रतिवादियों को नोटिस की तामील कराने और अगली सुनवाई से कम से कम एक सप्ताह पहले सेवा संबंधी शपथपत्र दाखिल करने को कहा गया है।
विस्तार
एचएसआईआईडीसी औद्योगिक क्षेत्र, बहादुरगढ़ में संचालित औद्योगिक इकाइयों पर पर्यावरणीय मानकों के उल्लंघन के आरोपों को राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने गंभीरता से लिया है। अधिकरण ने क्षेत्र में संचालित सभी औद्योगिक इकाइयों की पर्यावरणीय अनुपालन स्थिति की जांच के लिए चार सदस्यीय संयुक्त समिति गठित की है। समिति में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी), हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एचएसपीसीबी), पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के क्षेत्रीय कार्यालय, चंडीगढ़ और झज्जर के जिला उपायुक्त के प्रतिनिधि शामिल होंगे। जिला उपायुक्त, झज्जर को समिति का नोडल अधिकारी बनाया गया है।
मामले में दायर मूल आवेदन में आरोप लगाया गया है कि बहादुरगढ़ के एचएसआईआईडीसी औद्योगिक क्षेत्र में संचालित करीब 2500 औद्योगिक इकाइयों में कई इकाइयां पर्यावरणीय नियमों का पालन नहीं कर रही हैं। आवेदन में वायु प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण अधिनियम, 1981, जल प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण अधिनियम, 1974 तथा वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) की ओर से जारी निर्देशों के उल्लंघन का आरोप लगाया गया है।
आवेदक की ओर से बताया गया कि करीब 2500 इकाइयों में से आठ औद्योगिक इकाइयों के संबंध में दस्तावेज और साक्ष्य एकत्र किए गए हैं तथा उन्हें प्रतिनिधि आधार पर मामले में पक्षकार बनाया गया है। सुनवाई के दौरान आवेदक के अधिवक्ता ने आवेदन के साथ संलग्न विभिन्न तस्वीरों का हवाला देते हुए कुछ औद्योगिक इकाइयों से काला धुआं निकलने, खुले में औद्योगिक कचरा डालने और कचरा जलाने के आरोप लगाए।
आवेदन में यह भी आरोप लगाया गया कि कुछ औद्योगिक इकाइयां रात के समय संचालन करती हैं, जब नियमित निरीक्षण की संभावना कम रहती है। इसके अलावा खुले में औद्योगिक अपशिष्ट फेंकने और उसे जलाने से वायु प्रदूषण फैलने की बात कही गई है। एक जलाशय के प्रदूषित होने का दावा भी आवेदन में किया गया है।
पीएनजी और उत्सर्जन मानकों के पालन पर भी सवाल
आवेदक ने सीएक्यूएम के 4 फरवरी 2022 के निर्देश संख्या 53 का हवाला देते हुए कहा कि एनसीआर में औद्योगिक इकाइयों को पीएनजी अथवा अनुमत जैव ईंधन पर स्थानांतरित करने के निर्देशों का भी पालन नहीं किया जा रहा है। इसके अलावा 17 मार्च 2022 के निर्देश संख्या 62 के तहत जैव ईंधन आधारित बॉयलरों से होने वाले पीएम उत्सर्जन के लिए निर्धारित मानकों का पालन नहीं किए जाने का आरोप लगाया गया है।
आवेदन में इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित एक समाचार का भी हवाला दिया गया, जिसमें दिल्ली-एनसीआर की 91 प्रतिशत औद्योगिक इकाइयों के उत्सर्जन मानकों का अनुपालन नहीं करने की बात कही गई थी। आवेदक ने इन तमाम तथ्यों के आधार पर मामले को पर्यावरणीय नियमों के अनुपालन से जुड़ा महत्वपूर्ण मामला बताया।
सभी इकाइयों का निरीक्षण करेगी समिति
एनजीटी ने मामले को पर्यावरणीय मानकों के अनुपालन से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा मानते हुए प्रतिवादियों को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं। आवेदक को प्रतिवादियों को नोटिस की तामील कराने और अगली सुनवाई से कम से कम एक सप्ताह पहले सेवा संबंधी शपथपत्र दाखिल करने को कहा गया है।
अधिकरण ने एचएसआईआईडीसी औद्योगिक क्षेत्र, बहादुरगढ़ में संचालित सभी औद्योगिक इकाइयों की वास्तविक स्थिति का पता लगाने के लिए संयुक्त समिति को प्रत्येक इकाई का निरीक्षण करने के निर्देश दिए हैं। समिति यह जांच करेगी कि संबंधित इकाइयां पर्यावरणीय मानकों, पर्यावरणीय मंजूरी की शर्तों तथा स्थापना सहमति (सीटीई) और संचालन सहमति (सीटीओ) की शर्तों का पालन कर रही हैं या नहीं।
समिति को यह पूरी कवायद आठ सप्ताह के भीतर पूरी करनी होगी। इसके बाद समिति को अपनी रिपोर्ट अगली सुनवाई से कम से कम एक सप्ताह पहले एनजीटी के समक्ष प्रस्तुत करनी होगी। मामले की अगली सुनवाई 26 अक्टूबर 2026 को निर्धारित की गई है।
ये हैं मामले में प्रतिवादी
मूल आवेदन में एमएसवी यूनिकोटर्स प्राइवेट लिमिटेड, हरियाणा सरकार, हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, जिला उपायुक्त, झज्जर, वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम), हरियाणा राज्य औद्योगिक एवं आधारभूत संरचना विकास निगम लिमिटेड (एचएसआईआईडीसी), नगर परिषद, भारत संघ, एमएस कोलेंस इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड, एमएस कैंटाबिल रिटेल इंडिया लिमिटेड, एमएस लक्ष्मी पॉलीकोट्स, एमएस सेवब्रो प्लास्टिक्स, एमएस शिवालिक फोम्स एंड फैब्रिक्स प्राइवेट लिमिटेड, एमएस एक्लेम इंडस्ट्रीज तथा एमएस एमएनवी फैशन प्राइवेट लिमिटेड को प्रतिवादी बनाया गया है।