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महिला दिवस विशेष: वाहन चलाना सीख अब कर रहीं नौकरी, आत्मनिर्भरता का दे रहीं संदेश

Mon, 07 Mar 2022 06:35 PM IST
चंद्रप्रकाश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: चंद्रप्रकाश शर्मा Updated Mon, 07 Mar 2022 06:35 PM IST
सार

इंदौर की महिलाओं ने ये साबित कर दिया है कि वे किसी काम में पीछे नहीं है। कुछ महिलाओं ने ड्रायवरी सीखी और अब वाहन चलाकर जीवन यापन कर रहीं हैं। कुछ  महिलाओं को वित्तीय सहायता के रूप में ऑटो रिक्शा भी उपलब्ध करवाए गए हैं। 

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Women's Day Special: Now doing job learning to drive, giving message of self-reliance
ऑटो रिक्शा के साथ खड़ीं महिलाएं - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

8 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस है। इस दिवस को खास बनातीं हैं वे महिलाएं जिन्होंने अपनी काबिलियत से समाज में अलग मुकाम पाया है और दूसरी महिलाओं के लिए प्रेरणा बनीं हैं। हर क्षेत्र में महिलाओं ने अपनी प्रतिभा साबित की है और बता दिया है कि ऐसा कोई काम नहीं जो महिलाएं न कर सके।
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इसी कड़ी में बात करते हैं इंदौर की जहां महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए अनेक नवाचार किए जा रहे हैं। महिलाओं को आर्थिक एवं रोजगारमूलक गतिविधियों से जोड़ने के लिए विशेष अभियान भी चलाया जा रहा है। जहां एक ओर महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़कर उन्हें वित्तीय मदद दी जा रही है, वहीं दूसरी ओर उन्हें ड्रायवरी का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। ड्रायवरी का प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद जहां महिलाएं ड्रायवरी की नौकरी कर रहीं हैं तो दूसरी ओर उन्हें वित्तीय मदद देकर ऑटो रिक्शा भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इस अभियान को जिले में बड़ी सफलता प्राप्त हुई है।
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160 महिलाओं को दिया प्रशिक्षण, नौकरी भी मिली
क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय की सहायक परिवहन अधिकारी अर्चना मिश्रा ने बताया कि इससे महिलाओं को बड़ी संख्या में रोजगार देने में मदद मिल रही है। महिलाओं को ड्रायवरी के प्रशिक्षण के बाद आमदनी का बेहतर जरिया प्राप्त हुआ है। उनके जीवन यापन तथा बच्चों के भविष्य को बेहतर बनाने की दिशा में भी बड़ी मदद मिल रही है। महिलाओं को ड्रायवरी का प्रशिक्षण देने के लिए शासकीय ड्रायवर प्रशिक्षण संस्थान का संचालन किया जा रहा है। प्रशिक्षण का सिलसिला पिछले वर्ष से प्रारंभ किया गया था। अब तक कुल 160 महिलाओं को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। प्रशिक्षण के चार सत्र हो चुके हैं। पहले सत्र में 50, दूसरे में 44, तीसरे में 36 तथा चौथे सत्र में 30 महिलाओं को लाइट मोटर व्हीकल चलाने का प्रशिक्षण दिया गया। इनमें से चयनित 11 महिलाओं को वित्तीय मदद देकर ऑटो रिक्शा उपलब्ध कराए गए। सात महिलाओं को विभिन्न कंपनियों में वाहन संचालन की नौकरी भी मिली। जिन महिलाओं को नौकरी प्राप्त हुई उनमें ममता पाल, भाग्यश्री बूचड़े, सपना चौहान, राधिका राणा, मनीषा पाल शामिल हैं। इनको पटेल मोटर्स में नौकरी मिली है। इसी तरह होण्डा लैण्डमार्क में दो महिलाओं पूजा शर्मा और आफरीन खान को नौकरी प्राप्त हुई है। 11 महिलाओं को वित्तीय मदद देकर ई-ऑटो रिक्शा उपलब्ध कराई गई है। इससे इन्हें आमदानी का नियमित जरिया मिला है। इन सबके जीवन में खुशहाली की नई दस्तक आई है। रोजगार प्राप्त सभी महिलाएं खुश हैं और उज्जवल भविष्य के प्रति आशान्वित भी हैं। 
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