फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   vyapam scam: new truth find out

व्यापम: इस तरह होता था फर्जीवाड़ा, पढ़ेंगे तो रह जाएंगे दंग

Wed, 08 Jul 2015 09:07 AM IST
Updated Wed, 08 Jul 2015 09:07 AM IST
विज्ञापन
vyapam scam: new truth find out

मध्यप्रदेश के बदनाम व्यापमं घोटाले में किस तरह हजारों लोगों को फर्जीवाड़ा कर फायदा पहुंचाया गया उसका एक एक कर खुलासा हो रहा है। शुरूआत में मामले का खुलासा करने वाले आशीष चतुर्वेदी ने इस घोटाले की एक के बाद एक कडियों का जो खुलासा किया है उसे सुनकर हर किसी के होश उड़ जाएं।

विज्ञापन


आशीष ने बताया कि किस तरह व्यापमं के तहत परीक्षा देने वाले अभ्यर्थियों और दलालों ने पूरे सिस्टम को हाइजैकर कर लिया। आशीष के अनुसार पीएमटी की परीक्षा देने वाले एक छात्र ने उसे बताया कि जिस समय दिल्ली में उसकी पीएमटी की प्रवेश परीक्षा चल रही थी तब वह भोपाल के डीबी मॉल में बैठकर मूवी देख रहा था।
विज्ञापन


उसने यह भी बताया कि कि दलालों के कहने पर छात्र एक के बाद एक दो मूवी देखते थे। वहीं इस दौरान उनके नाम पर परीक्षा हॉल में कोई और परीक्षा दे रहा होता था। यह फर्जीवाडा पूरे देश में चलता था।
विज्ञापन
विज्ञापन

चार स्तर पर होता था फर्जीवाड़ा

vyapam scam: new truth find out

छात्रों को परीक्षा के समय मूवी दिखाने का दलालों का मकसद ये रहता था ताकि परीक्षा के समय उन्हें कोई देख न ले, न ही वो सीसीटीवी कैमरे की पकड़ में आ जाएं। कई बार झगड़ा होने पर भी छात्रें का नाम सामने आने का डर रहता था इसलिए सबको अलग अलग जगह पर मूवी देखने के लिए भेज दिया जाता था।

आशीष ने एक ऐसे ही छात्र बृजेन्द्र रघुवंशी के बारे में बताया कि साल 2010 में उसकी संदेहास्पद गति‌विधियों को देखते हुए उसने उससे दोस्ती की और धीरे धीरे वह पूरे राज्य में चल रहे इस रैकेट की तह तक पहुंचा।

आशीष के अनुसार व्यापमं में हेराफेरी चार तरह से की जाती थी। पहला तरीका तो ये था कि परीक्षा में किसी दूसरे को बैठाकर अभ्यर्थी को पास कराया जाता। दूसरा, किसी ऐसे व्यक्ति को जो पूर्व में उक्‍त परीक्षा पास कर चुका हो और पढ़ाई में होनहार हो उसे परीक्षा देने वाले छात्रों के बीच में बैठाया जाता जिससे वह सबको नकल कराकर पास करा देता।

हर पद के लिए तय थे अलग अलग रेट

vyapam scam: new truth find out

तीसरा तरीका ये था कि परीक्षा के बाद रीचेकिंग के नाम पर छात्र के नंबर बढ़ा दिए जाते जिससे वो पास हो जाता। चौथा और अंतिम तरीका ये था कि परीक्षा के दौरान ओएमआर सीट खाली छोड़ दी जाती जिसे बाद में सोल्वर से भरवा दिया जाता।

आशीष ने बताया कि इस महाघोटाले के खुलासे के बाद उसे लगातार धमकियां मिलती रही लेकिन वह अड़ा रहा। उसने घोटाले की परत दर परत उधेड़ने के लिए आरटीआई को हथियार बनाया। आशीष ने परीक्षा में पास करवाने के रेट का भी खुलासा किया।

आशीष के अनुसार पूर्व में सिर्फ मे‌डिकल और इंजीनियरिंग की परीक्षाएं कराने वाले व्यापमं ने साल 2007 से राज्य स्तरीय नौकरियों के लिए भी परीक्षा करानी शुरू कर दी। जिसमें फूड इंस्पेक्टर के लिए 20 से 22 लाख और पुलिस में सब इंस्पेक्टर जैसे पद के लिए 15 से 20 लाख रुपए वसूले जाते थे।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed