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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Unique initiative for Vidyadan: Children's school became police station in Panna, sub-inspector became teacher

विद्यादान के लिए अनोखी पहल: पन्ना में थाना बना बच्चों का स्कूल, सब इंस्पेक्टर बने टीचर

Mon, 31 Jan 2022 03:37 PM IST
अंकिता विश्वकर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पन्ना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पन्ना Published by: अंकिता विश्वकर्मा Updated Mon, 31 Jan 2022 03:37 PM IST
सार

पन्ना जिले से 40 किमी दूर ब्रजपुर गांव में एक पुलिसकर्मी ने शिक्षा से वंचित बच्चों को शिक्षित करने के लिए विद्यादान नाम की अनोखी पहल की है। कभी सरकारी शिक्षक रहे सब इंस्पेक्टर बखत सिंह समय निकालकर खुद बच्चों को पढ़ाते हैं।

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Unique initiative for Vidyadan: Children's school became police station in Panna, sub-inspector became teacher
पन्ना में थाना बना बच्चों का स्कूल - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

कोई गरीब बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे इसके लिए पन्ना जिले में एक पुलिसकर्मी ने अनोखी पहल की है। पन्ना जिला मुख्यालय से करीब 40 किमी दूर ब्रजपुर गांव में एक पुलिसकर्मी ने थाना परिसर में एक अध्ययन केंद्र-सह-पुस्तकालय शुरू किया गया है, जिसका उद्देश्य वंचित बच्चों को मुफ्त शिक्षा प्रदान करना है।
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सरकारी शिक्षक से सब इंस्पेक्टर बने बखत सिंह हर सुबह ड्यूटी पर जाने से पहले एक शिक्षक की भूमिका निभाते हैं और कक्षा 4 से आगे के बच्चों और विभिन्न प्रतियोगी और सिविल सेवा परीक्षाओं में बैठने की इच्छा रखने वालों बच्चों को सुबह 7 से 10 बजे के क्लास लगाकर पढ़ाते हैं।
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ब्रजपुर गांव की आबादी करीब 6 हजार है। इंसपेक्टर बखत सिंह ने इस गांव में अशिक्षा और गरीबी को देखा तो गांव के बच्चों को शिक्षित करने की ठानी। इसी उद्देश्य के साथ उन्होंने 'विद्यादान' पहल शुरू की। पुलिस स्टेशन में उन्होंने पुस्तकालय स्थापित कराया और बच्चों को पढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने विशेष रूप से दलित, आदिवासी और अन्य ओबीसी  वर्ग के शिक्षा से वंचित ऐसे बच्चे जो पास में स्थित खदानों में मजदूर के रूप में काम करते हैं। उनको शिक्षित करने का बीड़ा उठाया। 
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जब बखत सिंह से ये पूछा गया कि बच्चों को थाना परिसर में प्रवेश करने में डर लगता है, तो उन्होंने जवाब दिया कि पुलिस का उद्देश्य अपराधियों में डर पैदा करना और अच्छे लोगों का स्वागत करना है। हम पुलिस की सकारात्मक छवि बनाना चाहते हैं। मेरा दृढ़ विश्वास है कि साक्षरता और अच्छी नैतिक शिक्षा समाज में अपराध पर अंकुश लगा सकती है।


उनसे पढ़ने वाले सिविल सेवा के 15 वर्षीय उम्मीदवार आदर्श दीक्षित ने कहा कि उन्हें शुरू में पुलिस स्टेशन में प्रवेश करने में डर लगता था, लेकिन सिंह से मिलने के बाद, वह उनके शिक्षण के तरीकों और व्यक्तित्व से प्रभावित हुए। अन्य छात्रों ने भी सिंह के शिक्षण कौशल की प्रशंसा की। उनसे पढ़ने वाले कई बच्चे बड़े होकर पुलिस में जाना चाहते हैं।
 
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