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Umaria News: बांधवगढ़ किले को रामनवमी पर खोलने की मांग हुई तेज, जानें पूरा मामला
Tue, 01 Apr 2025 10:33 PM IST
उमरिया ब्यूरो
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, उमरिया
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, उमरिया
Published by: उमरिया ब्यूरो
Updated Tue, 01 Apr 2025 10:33 PM IST
सार
बांधवगढ़ किला और उसमें स्थित बांधवाधीश मंदिर विंध्य क्षेत्र के लोगों की आस्था का केंद्र है। सैकड़ों वर्षों से जन्माष्टमी के अवसर पर हजारों श्रद्धालु यहां आकर भगवान की पूजा-अर्चना करते आ रहे हैं।
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बांधवगढ़ किला
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान के अंदर स्थित ऐतिहासिक बांधवगढ़ किले को श्रीराम नवमी पर भी खोलने की मांग फिर से जोर पकड़ रही है। इस बार पूर्व रीवा रियासत के महाराज पुष्पराज सिंह ने इस मुद्दे को उठाते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत को पत्र लिखा है। उन्होंने पत्र में किले और बांधवाधीश मंदिर के धार्मिक एवं ऐतिहासिक महत्व का उल्लेख करते हुए रामनवमी के दिन श्रद्धालुओं को प्रवेश की अनुमति देने की मांग की है।
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बांधवगढ़ किला और उसमें स्थित बांधवाधीश मंदिर विंध्य क्षेत्र के लोगों की आस्था का केंद्र है। सैकड़ों वर्षों से जन्माष्टमी के अवसर पर हजारों श्रद्धालु यहां आकर भगवान की पूजा-अर्चना करते आ रहे हैं। जानकारों के अनुसार, पहले जन्माष्टमी पर तीन दिनों का मेला लगता था, जिसमें श्रद्धालु रात-दिन वहीं रहकर उत्सव मनाते थे। 80 के दशक तक रामनवमी के अवसर पर भी श्रद्धालुओं को प्रवेश की अनुमति थी, लेकिन टाइगर रिजर्व बनने के बाद नियम सख्त हो गए। पहले जन्माष्टमी का मेला एक दिन तक सीमित कर दिया गया और रामनवमी पर प्रवेश पूरी तरह रोक दिया गया।
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श्रद्धालु सालभर भगवान बांधवाधीश के दर्शन के लिए जन्माष्टमी का इंतजार करते हैं। इस दिन दूर-दूर से आए भक्त पैदल यात्रा कर कठिन मार्ग से होते हुए पहाड़ की चोटी पर स्थित मंदिर पहुंचते हैं और भगवान की पूजा करते हैं। मंदिर में भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण जी की आकर्षक मूर्तियां स्थापित हैं। मान्यता है कि यहां आने वाले भक्तों की हर मनोकामना पूरी होती है। इसके अलावा, किले में रियासत काल के कई भवन, कार्यालय, भगवान विष्णु के अवतारों की मूर्तियां, गुफाएं, तालाब और ऐतिहासिक संरचनाएं हैं, जो देखरेख के अभाव में खंडहर में बदल रही हैं।
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महाराज पुष्पराज सिंह ने पत्र में उल्लेख किया है कि उनके पूर्वज भगवान श्रीराम के अनन्य भक्त थे और 13वीं से 17वीं शताब्दी तक बांधवगढ़ के बाद रीवा को राजधानी बनाया गया था। उन्होंने बताया कि जनश्रुति के अनुसार, भगवान श्रीराम ने यह किला अपने भाई लक्ष्मण को दिया था। किले के अंदर स्थित प्राचीन राम मंदिर लाखों आदिवासियों और आम जनता की आस्था का केंद्र है। वर्तमान में यह वन विभाग के अधीन है और केवल जन्माष्टमी पर इसे श्रद्धालुओं के लिए खोला जाता है, जबकि रामनवमी पर भी मंदिर खुलना चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और संघ प्रमुख से अनुरोध किया है कि इस महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल को रामनवमी के अवसर पर खोलने की अनुमति दी जाए, ताकि श्रद्धालु अपनी आस्था के अनुरूप भगवान की पूजा कर सकें।
