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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Shardiya Navratri Umaria Mother Jwala came in Bhandari Singh dream know story of Jwaladham Uchehra Wali

Shardiya Navratri Umaria: भंडारी सिंह के स्वप्न में आई थी मां ज्वाला, जानिए ज्वालाधाम उचेहरा वाली की कहानी

Tue, 08 Oct 2024 07:41 PM IST
उमरिया ब्यूरो न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, उमरिया
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, उमरिया Published by: उमरिया ब्यूरो Updated Tue, 08 Oct 2024 07:41 PM IST
सार

भंडारी सिंह के सपने में मां ज्वाला आई थी। इस खबर के जरिए बताएंगे मां ज्वालाधाम उचेहरा वाली की कहानी और मान्यताएं।

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Shardiya Navratri Umaria Mother Jwala came in Bhandari Singh dream know story of Jwaladham Uchehra Wali
मां ज्वाला उचेहरा वाली - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उमरिया जिले के नौरोजाबाद रेलवे स्टेशन से चार किलोमीटर उत्तर में स्थित मां ज्वाला उचेहराधाम शक्ति पीठ विराजमान है। जो न केवल मध्यप्रदेश बल्कि पूरे भारत वर्ष में अपनी विशेषताओं और देवीय शक्ति के लिए प्रसिद्ध है। यह स्थान आदिकाल से घोड़ क्षत्र नदी के तट पर घनघोर और विकराल जंगल के बीच विलुप्त अवस्था में मौजूद था। इसी स्थान पर अब से दशक पूर्व मां ज्वाला धाम मंदिर का पुनर्निर्माण उचेहरा के निवासियों द्वारा किया गया।

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ऐसा कहा जाता है कि उचेहरा गांव के निवासी भंडारी सिंह मां ज्वाला का परम भक्त है। जो घोड़ क्षत्र नदी के तट पर घने और विकराल जंगल में नित-प्रतिदिन सुबह-शाम मां ज्वाला की पूजा करने जाया करता था। मां ज्वाला उनकी श्रद्धा तथा भक्ति से अति प्रसन्न हुई और एक दिन जब भंडारी सिंह सो रहे थे तो मां जवाला स्वप्न में आकर बोली, हे भंडारी उठो मैं तुम्हारी भक्ति से अति प्रसन्न हूं। मांगो तुम्हें क्या चाहिए। भंडारी सिंह ने सबसे पहले मां ज्वाला को हाथ जोड़ नमस्कार किया तथा बोला मां मुझे धन-दौलत और दुनिया की तमाम सुख शोहरत से कोई सरोकार नहीं है। मां आपका दर्शन पाके मेरा जीवन धन्य हो गया। मां आपने दर्शन देकर मेरी भक्ति को पूर्ण कर दिया। इसके अतिरिक्त मुझे कुछ नहीं चाहिए।
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मां ने कहा, जो भक्त सच्चे दिल से मां ज्वाला की भक्ति और सेवा करता है, उसकी हर मनोकामना पूरी कर मनोवांछित फल देती हूं। अतः तुम्हें भी ये वरदान पाने का अधिकार है। भंडारी सिंह ने कहा, मां मुझे सद्बुद्धि दें कि मैं यूं ही आपकी भक्ति और आपकी सेवा ताउम्र करूं और वर दे मां कि आप शक्ति रूप में हमारे बीच हमेशा मौजूद रहें। ताकि मेरी श्रद्धा और भक्ति में कभी कोई कमी न आ पाए। मां ज्वाला ने कहा, ऐसा ही होगा। हे भंडारी घोड़ क्षत्र नदी के तट पर जहां मैं आदिकाल में विराजमान थी, वहां पर मेरा पुनः प्रादुर्भाव होगा। तुम इस स्थान पर मां ज्वाला की एक मंदिर बनवाओ और मेरी भक्ति इसी तरह निःस्वार्थ भाव से करते रहो तथा मां ज्वाला शक्ति-पीठ धाम का प्रचार-प्रसार देश-दुनिया में फैलाओ। आगे का मार्ग मैं प्रशस्त करती रहूंगी।
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भंडारी सिंह ने कहा, मां आपके आज्ञा का पालन अवश्य होगा। मां ज्वाला ने कहा, इस स्थान पर जो भक्त सच्चे दिल से किसी भी प्रकार की मनोकामना करेगा उसकी मनोकामना अवश्य पूरी होगी। कोई भक्त इस स्थान से खाली हाथ नहीं लौटेगा। भंडारी सिंह ने मां ज्वाला को प्रणाम कर कहा आपकी लीला अपरम्पार है मां आपको सत-सत बार मेरा प्रणाम। मां ज्वाला तथास्तु कहकर अंतर्ध्यान हो गई।

तदुपरांत, भंडारी जी ने माता के वचनों को गांव वालों के समक्ष प्रस्तुत किया तथा उनसे सहमति जानना चाहा। उचेहरा गांव के लोगों ने मां की इच्छा को पूरी करने के लिए मंदिर निर्माण में हर संभव सहायता करने का आश्वासन दिया। महराज जी और गांव वालों ने मां के आज्ञा का पालन करते हुए घोड़ क्षत्र नदी के तट पर जाकर करौंदा वृक्ष के पास घने जंगल में आदिकाल से स्थित मां ज्वाला के स्थान तथा उनके आस-पास साफ-सफाई किया, जहां करौंदा वृक्ष के नीचे मां ज्वाला कि प्रतिमूर्ति स्थापित था। इसी स्थान पर मां ज्वाला के नाम से एक महायज्ञ का आयोजन किया गया, जिसमें देश के विभिन्न हिस्सों से पंडितों और पुरोहितों को बुलाया गया। इस महायज्ञ में लाखों की तादात में श्रद्धालु भक्त, साधु-संत आए।

इस महायज्ञ के बाद मां ज्वाला धाम शक्तिपीठ का चमत्कार देश दुनिया में बढ़ने लगा। तभी से इस स्थान पर सैंकड़ों श्रद्धालु प्रतिदिन मां ज्वाला के दर्शन को आते हैं। मां ज्वाला के मंदिर में प्रत्येक सोमवार को विशेष अरदास एवं भंडारे का आयोजन किया जाता है। इस अवसर पर हवन कुण्ड में आहूति दी जाती है। सामूहिक सत्यनारायण भगवान विष्णु जी की पूजा की जाती है। श्रद्धालु अपनी अरदास मां ज्वाला के समक्ष रखते हैं तथा जिनकी पूर्व की रखी गयी अरदास पूरी हो जाती है, वो भक्त विशेष गाजा-बाजा के साथ मां ज्वाला की परिक्रमा लगाते हैं। महीने में एक बार पूर्णिमा के पश्चात पड़ने वाले मंगलवार या शनिवार को मां ज्वाला की सवारी आती है, जिनमें श्रद्धालु संतान प्राप्ति, रोग से ग्रस्त रोगी, नौकरी, व्यापार, शादी-विवाह व आर्थिक समस्या से संबंधित अरदास करते हैं। माता के भक्त उचेहरा निवासी रामनाथ पंडा द्वारा मां ज्वाला की मासिक सवारी का नेतृत्व किया जाता है। मां ज्वाला की कृपा से सभी भक्तों को मनोवांछित फल प्राप्त होता है।

प्रत्येक वर्ष जनवरी की पहली तारीख को मां ज्वाला मंदिर की स्थापना का वार्षिक महोत्सव मनाया जाता है। इस दिन मां ज्वाला की विशेष पूजा की जाती है तथा मां ज्वाला की झांकी निकाली जाती है और भंडारे का आयोजन किया जाता है। श्रद्धालु गण प्रत्येक सोमवार को भंडारा करवाते हैं। भंडारे में तीन प्रकार का प्रसाद मां को भेंट की जाती है, जिनमें प्रथम राज भोग जिसमें खिचड़ी का प्रसाद, दूसरा मोहन भोग जिसमें दूध से बने खीर का प्रसाद तथा तीसरा देवी भोग जिसमें हलवा-पूरी का प्रसाद भक्तों के बीच में बांटा जाता है। रात में मां ज्वाला के लिए जागरण समारोह किया जाता है, जिसमें क्षेत्र के भिन्न-भिन्न धार्मिक कलाकरों द्वारा मां ज्वाला के लिए गायन नृत्य और सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है।

मां ज्वाला धाम में साल में दो बार नवरात्र पूजा का आयोजन किया जाता है। चौत नवरात्र तथा अश्विन नवरात्र में जौ-जयंती कलश स्थापित किया जाता है तथा नवरात्र के नौ दिन मां ज्वाला के नौ रूपों की पूजा पुरे श्रद्धा-भाव से की जाती है। मां ज्वाला धाम में हिंदू सनातन धर्म के सभी धार्मिक पूजा और उत्सव जैसे वैसाखी, सावन सोमवारी, कृष्ण जन्म, गणपति पूजा, दीपावली, मकर संक्रांति, सरस्वती पूजन और महाशिवरात्रि, होली आदि बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है। मां ज्वाला धाम में आयोजित सभी धार्मिक कार्यो को सुचारू रूप से मां ज्वाला सेवा समिति के अध्यक्ष और प्रमुख पुजारी महराज भंडारी सिंह जी के सानिध्य में सेवादारों द्वारा पूर्ण किया जाता है।

मां ज्वाला धाम शक्ति-पीठ की दर्शन
यात्रा के लिए उत्तर भारत के श्रद्धालु नई दिल्ली के निजामुद्दीन स्टेशन से रेल गाड़ी से नरौजाबाद स्टेशन उतर कर जीप व टैक्सी से मां ज्वाला धाम पहुंच सकते हैं। पूर्व भारत के लोग रेल यात्रा से कटनी पहुंच सकते हैं। वहां से नियत अंतराल पर नौरोजाबाद के लिए लोकल रेल की सेवा उपलब्ध है। पश्चिम और दक्षिण भारत से आने वाले भक्त भोपाल के रास्ते नौरोजाबाद पहुंच सकते हैं। नौरोजाबाद से आपको आसानी से उचेहरा में मां ज्वाला के दर्शन के लिए गैर सरकारी वाहन मिल जाएगा।

मंदिर परिसर पहुंचने पर मां ज्वाला धाम का विशाल मुख्य द्वार है। इस मुख्य द्वार के रास्ते आप मंदिर परिसर में पहुंचते हैं। जहां पॉर्किंग की उचित व्यवस्था है। सभी प्रकार के वाहन जैसे दोपहिया, चार पहिया आदि आप पॉर्किंग परिसर में पार्क कर सकते हैं। पॉर्किंग के साथ चप्पल-जूतों के लिए लॉकर सुविधा है। आप अपने चप्पल-जूते सहित अन्य समान को इस लॉकर रूम में सुरक्षित रख सकते हैं। वाहन पार्किंग के दाहिने साइड में कुछ दूर पर प्रसाधन सुविधा है, जहां पर आप स्नान ध्यान से पवित्र हो सकते हैं। पॉर्किंग परिसर में ढेर सारी दुकान है, जिनमें प्रसाद, चुनरी, महिलाओं के लिए शृंगार संबंधित दुकान तथा जलपान गृह है। मां ज्वाला की पूजा-अर्चना के लिए प्रसाद व पूजा की अन्य सामग्री यहां से आप खरीद सकते हैं।

पॉर्किंग परिसर से मां ज्वाला धाम के मुख्य मंदिर के लिए रास्ता है, जिस राह पर चलते हुए आप मंदिर के मुख्य द्वार पर पहुंचते हैं। जहां शनि देव और भैरव जी की मूर्ति स्थापित है। मुख्य द्वार पर शनि देव और भैरव देव की पूजा करने के पश्चात भक्त गण मंदिर के अंदर में प्रवेश करते हैं। मंदिर में मां ज्वाला की पिंडी रूप में स्थापित मूर्ति की पूजा भक्तगण निष्ठा भाव से करते हैं। मां ज्वाला की पूजा-अर्चना के लिए पंडित जी सेवारत हैं। मां ज्वाला के समीप हनुमान जी की विशाल मूर्ति विराजमान है। भक्तगण हनुमान जी की पूजा कर उनके आशीर्वाद का भागीदार बनते हैं। मंदिर में आदि काल से पीपल का एक वृक्ष है। श्रद्धालु पीपल वृक्ष की पूजा करते हैं।

पीपल वृक्ष के समीप से ही मंदिर से बाहर जाने का रास्ता है। मंदिर के बाहर नरियल तोड़ने का घर है। जहां मंदिर के सेवादार नारियल तोड़ने की सेवा में मौजूद रहते हैं। नारियल तोड़ने के बायीं ओर थोड़ी दूर पर राधा-कृष्ण जी का मंदिर अति मोहक है। भक्त जन राधा-कृष्ण जी की पूजा करने के पश्चात कैलाश धाम की ओर अग्रसर होते हैं। उचेहरा गांव के घोड़क्षत्र नदी के तट पर भगवान शिव जी विराजमान हैं। भक्तगण कैलाश धाम में भगवान शिव की पूजा करने के पश्चात भारत माता मंदिर की ओर अग्रसर होते हैं। पार्किंग परिसर के समीप भारत माता की मंदिर है।


भारत माता की पूजा आरती
यहां से भक्त गण मंदिर के गोशाला जा सकते हैं, जो मां ज्वाला धाम के विशाल मुख्य द्वार के पास है। इस गोशाला में तत्काल 58 गाय हैं। गोमाता की पूजा करने के पश्चात भक्तों का पूजा-अर्चना सम्पन्न होती है। मंदिर परिसर में ठहरने के लिए धर्मशाला की उचित व्यवस्था है। मंदिर परिसर पूरी तरह से सीसीटीवी की निगरानी में है। इसके अलावा सुरक्षा गार्ड को मंदिर के हर कोने में तैनात किया गया है। पानी, प्रसाधन खाने-पीने और ठहरने के लिए मां ज्वाला धाम मंदिर समिति द्वारा उचित व्यवस्था किया गया है, जिससे आपको किसी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े। 

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