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उज्जैन में मनोज मुंतशिर का तीखा भाषण: खड़ाऊ की पूजा या भाई का कटा सिर, किसे चुनना है तय करें युवा
Sat, 19 Sep 2026 03:36 PM IST
उज्जैन ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
Published by: उज्जैन ब्यूरो
Updated Sat, 19 Sep 2026 03:36 PM IST
सार
युवा धर्म संसद में लेखक मनोज मुंतशिर ने भारतीय संस्कृति और परंपराओं से जुड़ने का आह्वान किया। उन्होंने राम-भरत और मुगलकालीन सत्ता संघर्ष के उदाहरणों के जरिए युवाओं के सामने दो अलग-अलग परंपराओं की तुलना रखी और धर्म को समझकर जीवन में उतारने की बात कही।
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युवा धर्म संसद में गरजे मनोज मुंतशिर
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
उज्जैन के गीता भवन में आयोजित युवा धर्म संसद में प्रसिद्ध लेखक और गीतकार मनोज मुंतशिर ने भारतीय परंपरा और मुगलकालीन परंपराओं के बीच अंतर को अपने संबोधन का प्रमुख विषय बनाया। उन्होंने युवाओं से कहा कि देश और समाज के सामने अलग-अलग विचार और परंपराएं हैं, ऐसे में उन्हें यह समझना होगा कि वे किस तरह की जीवन-दृष्टि को अपनाना चाहते हैं।
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मुंतशिर ने वंदे मातरम को लेकर भी कांग्रेस और पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू पर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने 15 अगस्त को वंदे मातरम का गायन रुकवा दिया था। मुंतशिर ने कहा कि 1896 में कांग्रेस के अधिवेशन में वंदे मातरम के गायन की शुरुआत हुई थी और बाद में इसके कुछ पदों को लेकर आपत्ति के कारण पूरे गीत के बजाय चयनित पदों का गायन किया जाने लगा। उन्होंने सवाल उठाया कि किसी को भी भारतीय संस्कृति को सीमित या सेंसर करने का अधिकार कैसे हो सकता है।
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उन्होंने महर्षि अरविंद के कथन का उल्लेख करते हुए कहा कि जब कोई राष्ट्र लगातार कई पीढ़ियों तक अपनी सभ्यता और संस्कृति से दूर रहता है तो उसके अस्तित्व पर संकट पैदा हो सकता है। उन्होंने युवाओं से भारतीय संस्कृति, परंपराओं और ग्रंथों से जुड़ने का आह्वान किया।
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राम और भरत से लेकर औरंगजेब तक का उदाहरण
मुंतशिर ने भारतीय परंपरा और मुगलकालीन इतिहास की तुलना करते हुए रामायण के प्रसंग का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि राजा दशरथ के चार पुत्रों में से राम को वनवास मिला तो लक्ष्मण उनके साथ गए, भरत ने अयोध्या में रहकर भी राजसिंहासन स्वीकार नहीं किया और राम की खड़ाऊं को सिंहासन पर रखकर राजकाज चलाया। इसके विपरीत उन्होंने मुगल शासक शाहजहां के पुत्रों के बीच सत्ता संघर्ष का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि औरंगजेब ने सत्ता के लिए अपने पिता शाहजहां को कैद किया और अपने भाइयों के साथ संघर्ष किया। मुंतशिर ने दारा शिकोह की हत्या और उसके सिर को शाहजहां के सामने पेश किए जाने के प्रसंग का भी उल्लेख किया।
इसी तुलना के आधार पर उन्होंने युवाओं से कहा कि उनके सामने दो अलग-अलग विचार और परंपराओं के उदाहरण हैं। उन्होंने प्रतीकात्मक रूप से कहा कि एक थाली में भगवान राम की खड़ाऊं है, जबकि दूसरी थाली में दारा शिकोह का सिर है और युवाओं को तय करना है कि वे किस विचार को अपने जीवन में स्थान देंगे।
मुंतशिर ने युवाओं से धर्म को केवल मानने के बजाय उसे समझने और जीवन में उतारने की अपील की। उन्होंने कहा कि भारत की परंपराओं, ग्रंथों और सांस्कृतिक मूल्यों से जुड़कर युवा अपने जीवन को नई दिशा दे सकते हैं। युवा धर्म संसद में देशभर से करीब 1,700 युवा छात्र-छात्राएं शामिल हुए हैं। कार्यक्रम में धर्म, संस्कृति, शिक्षा, परिवार और समकालीन विषयों पर विभिन्न सत्र आयोजित किए जा रहे हैं।
