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Ujjain News: हरि से होगा हर का मिलन, दिखेगा अनूठा नजारा...भगवान विष्णु को जगत का भार सौंपेंगे बाबा महाकाल
Wed, 13 Nov 2024 12:31 PM IST
उज्जैन ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
Published by: उज्जैन ब्यूरो
Updated Wed, 13 Nov 2024 12:31 PM IST
सार
Ujjain: उज्जैन में कार्तिक शुक्ल चतुर्दशी यानी बैकुंठ चतुर्दशी पर हरिहर मिलन होगा, जहां भगवान महाकाल की सवारी को धूमधाम से गोपाल मंदिर तक लाया जाएगा। यहां भगवान महाकाल, भगवान विष्णु को सृष्टि का भार सौंपेंगे।
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हरि से होगा हर का मिलन दिखेगा अनूठा नजारा
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मध्यप्रदेश के उज्जैन में कार्तिक शुक्ल चतुर्दशी यानी बैकुंठ चतुर्दशी पर हरिहर मिलन होगा, जहां भगवान महाकाल की सवारी को धूमधाम से गोपाल मंदिर तक लाया जाएगा। यहां भगवान महाकाल, भगवान विष्णु को सृष्टि का भार सौंपेंगे।
देर रात होने वाले हरि हर मिलन को देखने के लिए हजारों की संख्या में श्रद्धालु धार्मिक नगरी उज्जैन पहुंचेंगे। गोपाल मंदिर में होने वाले हरि हर मिलन के दौरान भगवान महाकाल और भगवान विष्णु को बिल्वपत्र की माला स्पर्श करवाई जाएगी। हरिहर मिलन के दौरान भगवान महाकाल की सवारी का श्रद्धालुओं द्वारा हर्षोल्लास के साथ स्वागत और अभिनंदन किया जाएगा। इस दौरान आतिशबाजी और पुष्प वर्षा कर भगवान महाकाल की सवारी का स्वागत किया जाएगा।
देर रात होता है हरिहर मिलन अबकी बार बैकुंठ चतुर्दशी 14 नवंबर गुरूवार को है, जहां गुरूवार की रात लगभग 11 बजे भगवान महाकाल की सवारी सभा मंडप से चांदी की पालकी में गोपाल मंदिर के लिए रवाना होगी, जहां मंदिर के मुख्य द्वार पर सवारी को गार्ड ऑफ ऑनर दिया जाएगा। इसके बाद भगवान महाकाल गोपाल मंदिर पहुंचेंगे, जहां लगभग 2 घंटे पूजन और अभिषेक के बाद रात लगभग 1 बजे भगवान महाकाल की सवारी पुन: मंदिर लौटेगी। बैकुंठ चतुर्दशी पर हरि हर मिलन की यह मान्यता बेहद ही प्राचीन है, जहां भगवान महाकाल की सवारी गोपाल मंदिर पहुंचती है, और यहां भगवान महाकाल सृष्टि का भार भगवान विष्णु को सौंपते हैं।
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कुछ ऐसी है मान्यता
धार्मिक नगरी उज्जैन में कार्तिक माह की चतुर्दशी यानि बैकुंठ चतुर्दशी का विशेष महत्व है। बैकुंठ चतुर्दशी पर बाबा महाकाल (हर) श्री विष्णु भगवान (हरि) को सारी सृष्टि का कार्यभार सौंपते हैं। बैकुंठ चतुर्दशी के मध्य रात्रि में नगर के प्राचीन श्री द्वारकाधीश गोपाल मंदिर में हरि-हर मिलन होता है। पौराणिक मान्यता है कि, जब श्री हरि विष्णु भगवान देव शयनी एकादशी पर चार माह के लिए शयन करने जाते है, तब सारी सृष्टि का कार्यभार हर बाबा महाकाल सौंप कर जाते हैं। देवउठनी एकादशी पर भगवान विष्णु के जागने के उपरांत बैकुंठ चतुर्दशी की मध्य रात्रि में बाबा महाकाल भगवान विष्णु को पुन: सारी सृष्टि का कार्यभार लौटकर हिमालय प्रस्थान करते हैं।
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देर रात होने वाले हरि हर मिलन को देखने के लिए हजारों की संख्या में श्रद्धालु धार्मिक नगरी उज्जैन पहुंचेंगे। गोपाल मंदिर में होने वाले हरि हर मिलन के दौरान भगवान महाकाल और भगवान विष्णु को बिल्वपत्र की माला स्पर्श करवाई जाएगी। हरिहर मिलन के दौरान भगवान महाकाल की सवारी का श्रद्धालुओं द्वारा हर्षोल्लास के साथ स्वागत और अभिनंदन किया जाएगा। इस दौरान आतिशबाजी और पुष्प वर्षा कर भगवान महाकाल की सवारी का स्वागत किया जाएगा।
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देर रात होता है हरिहर मिलन अबकी बार बैकुंठ चतुर्दशी 14 नवंबर गुरूवार को है, जहां गुरूवार की रात लगभग 11 बजे भगवान महाकाल की सवारी सभा मंडप से चांदी की पालकी में गोपाल मंदिर के लिए रवाना होगी, जहां मंदिर के मुख्य द्वार पर सवारी को गार्ड ऑफ ऑनर दिया जाएगा। इसके बाद भगवान महाकाल गोपाल मंदिर पहुंचेंगे, जहां लगभग 2 घंटे पूजन और अभिषेक के बाद रात लगभग 1 बजे भगवान महाकाल की सवारी पुन: मंदिर लौटेगी। बैकुंठ चतुर्दशी पर हरि हर मिलन की यह मान्यता बेहद ही प्राचीन है, जहां भगवान महाकाल की सवारी गोपाल मंदिर पहुंचती है, और यहां भगवान महाकाल सृष्टि का भार भगवान विष्णु को सौंपते हैं।
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कुछ ऐसी है मान्यता
धार्मिक नगरी उज्जैन में कार्तिक माह की चतुर्दशी यानि बैकुंठ चतुर्दशी का विशेष महत्व है। बैकुंठ चतुर्दशी पर बाबा महाकाल (हर) श्री विष्णु भगवान (हरि) को सारी सृष्टि का कार्यभार सौंपते हैं। बैकुंठ चतुर्दशी के मध्य रात्रि में नगर के प्राचीन श्री द्वारकाधीश गोपाल मंदिर में हरि-हर मिलन होता है। पौराणिक मान्यता है कि, जब श्री हरि विष्णु भगवान देव शयनी एकादशी पर चार माह के लिए शयन करने जाते है, तब सारी सृष्टि का कार्यभार हर बाबा महाकाल सौंप कर जाते हैं। देवउठनी एकादशी पर भगवान विष्णु के जागने के उपरांत बैकुंठ चतुर्दशी की मध्य रात्रि में बाबा महाकाल भगवान विष्णु को पुन: सारी सृष्टि का कार्यभार लौटकर हिमालय प्रस्थान करते हैं।
