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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Confusion created again on Amavasya, astrologers said - Amavasya is on Sunday

Ujjain News: अमावस्या को लेकर इस बार फिर असमंजस, ज्योतिषाचार्य बोले- रविवार को मनाएं; प्रशासन संकट में क्यों?

Fri, 29 Nov 2024 03:42 PM IST
उज्जैन ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन Published by: उज्जैन ब्यूरो Updated Fri, 29 Nov 2024 03:42 PM IST
सार

शनिचरी अमावस्या पर त्रिवेणी स्थित शनि मंदिर पर देर रात्रि से ही हजारों की संख्या में श्रद्धालु स्नान मैदान पुण्य करने पहुंचते हैं अमावस्या के शनिवार या रविवार को होने के भ्रम के कारण प्रशासन खुद इस संकट में है कि वह आखिर तैयारी करें या नहीं।

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Confusion created again on Amavasya, astrologers said - Amavasya is on Sunday
अमावस्या को लेकर असमंजस। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

तिथियां में भेद के कारण तीज त्योहार को मनाने में भ्रम की स्थितियां अब पैदा होने लगी है। 31 अक्टूबर को दीपावली पर्व को लेकर ज्योतिषाचार्यों के एक मत ना होने के कारण प्रदेश भर में दो दिनों तक दीपावली पर्व मनाया गया था। लेकिन, अब अमावस्या को लेकर एक फिर नया बखेड़ा खड़ा हो गया है। अगहन कृष्ण पक्ष की अमावस्या को कुछ लोग शनिवार यानी कि शनिचरी अमावस्या बता रहे हैं तो कुछ ज्योतिषाचार्य गणना के आधार पर अमावस्या शनिवार नहीं बल्कि रविवार को होने की बात कह रहे हैं। अमावस्या तिथि आखिर शनिवार है या रविवार को इसको लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है।

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ज्योतिषाचार्य ने क्या बोले?
ज्योतिषाचार्य अमर गुरु डब्बावाला ने बताया कि पंचांग की गणना एवं धर्मशास्त्रीय मान्यता के आधार पर देखें तो मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर शनिवार का योग आ रहा है, चूंकि चतुर्दशी तिथि शनिवार को प्रातः 11 बजे तक रहेगी। इस दृष्टि से यह चतुर्दशी ही कहलाएगी इस दिन शनिश्चरी अमावस्या नहीं है। कुछ लोगों के माध्यम से यह भ्रांति उत्पन्न की गई है कि यह शनिश्चरी अमावस्या है, जबकि पंचांग की गणना, तिथि का गणित एवं पर्व काल की स्थिति आदि के आधार पर यदि हम गणना करते हैं तो 30 नवंबर को शनिवार के दिन चतुर्दशी तिथि रहेगी। रविवार को 1 दिसंबर के दिन स्नान दान की अमावस्या होगी। इस दिन तीर्थ पर जाकर के स्नान दान किया जा सकता है।

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नवग्रह शनि मंदिर के पुजारी पंडित शैलेंद्र त्रिवेदी ने बताया कि उदय काल की तिथि के अनुसार ही पर्व मनाना चाहिए। धर्मशास्त्र की गणना के अनुसार देखें तो सूर्य के उदय के समय जो तिथि विद्यमान होती है पर्व काल के नियम के अनुसार वह तिथि तीन मुहूर्त के साक्षी अनुक्रम में होनी चाहिए। क्योंकि, 30 नवंबर को चतुर्दशी तिथि प्रातः 11:00 बजे तक रहेगी, इस दृष्टिकोण से यह दिन अमावस्या का नहीं कहलाएगा। क्योंकि, पर्व काल में सूर्य के उदय का अनुक्रम व चंद्र के अस्त का क्रम और तिथियों की साक्षी का क्रम यह देखा जाता है, इस दृष्टिकोण से भ्रम से बचें।
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तिथि के कारण प्रशासन भी संकट में
बताया जाता है कि शनिचरी अमावस्या पर त्रिवेणी स्थित शनि मंदिर पर देर रात्रि से ही हजारों की संख्या में श्रद्धालु स्नान मैदान पुण्य करने पहुंचते हैं अमावस्या के शनिवार या रविवार को होने के भ्रम के कारण प्रशासन खुद इस संकट में है कि वह आखिर तैयारी करें या नहीं। अगर, वे ज्योतिषाचार्य की बातों को मानकर स्नान की कोई तैयारी नहीं करते हैं। यदि बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं तो फिर अव्यवस्थाओं के बीच में श्रद्धालुओं को कैसे संभाल पाएंगे।

 

 

अमावस्या पर फिर बनी भ्रम की स्थिति, ज्योतिषाचार्यों ने कहा - अमावस्या शनिवार नही बल्कि रविवार क

 

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