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Ujjain Mahakal: गुड़ी पड़वा पर नीम मिश्रित जल से हुआ बाबा महाकाल का स्नान, श्री गणेश स्वरूप में दिए दर्शन
Sun, 30 Mar 2025 07:44 AM IST
उज्जैन ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
Published by: उज्जैन ब्यूरो
Updated Sun, 30 Mar 2025 07:44 AM IST
सार
ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में चैत्र शुक्ल प्रतिपदा गुड़ी पड़वा भी धूमधाम से मनाई गई। बाबा महाकाल को नीम के जल से स्नान कराकर पंचांमत पूजन अभिषेक किया गया। पुजारी-पुरोहितों द्वारा भगवान को नीम-मिश्री के शरबत का भोग लगाया गया।
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गुडी पड़वा पर बाबा का गणेश स्वरूप।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
विश्व प्रसिद्ध बाबा महाकाल की नगरी में प्रतिदिन लाखों की संख्या में श्रद्धालुओं का आगमन होता है। अवंतिका नगरी में कण–कण में शिव का वास है। इसी कड़ी में महाकाल मंदिर में सभी पर्व को बड़े ही धूमधाम से मनाने की परंपरा वर्षों से चली आ रही है। ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में आज चैत्र शुक्ल प्रतिपदा गुड़ी पड़वा भी धूमधाम से मनाई गई। इस दौरान पुजारियों ने कोटितीर्थ कुंड पर सूर्य को अर्घ्य देकर नवसंवत्सर का स्वागत किया। इसके बाद बाबा महाकाल को नीम के जल से स्नान कराकर पंचांमत पूजन अभिषेक किया गया। पुजारी-पुरोहितों द्वारा भगवान को नीम-मिश्री के शरबत का भोग लगाया गया। इसके बाद श्रद्धालुओं को प्रसादी का वितरण किया जाएगा। महाकाल मंदिर में मंदिर के शिखर पर आज नया ब्रह्मध्वज भी लगाया गया।
ये भी पढ़ें- सीएम डाॅ मोहन यादव को विक्रम विश्वविद्यालय प्रदान करेगा डी लिट् उपाधि, 70 विद्यार्थियों को उपाधि
महाकाल मंदिर के पुजारी पं महेश शर्मा ने बताया कि ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर मे यह भी एक परंपरा है। जिसका प्रतिवर्ष पालन किया जाता है। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से हिन्दू नववर्ष का शुभारंभ होने पर चैत्र मास ऋतु परिवर्तन का होता है। इस माह में ग्रीष्म ऋतु की शुरुआत होती है। इसके प्रभाव से वात, कफ, पित्त की वृद्धि होती है। इससे अनेक रोग जन्म लेते हैं। वात, कफ, पित्त के निदान के लिए नीम के सेवन का महत्व है। आयुर्वेद में भी नीम मिश्री के सेवन को अमृत तुल्य बताया गया है। नीम के जल से स्नान करने से त्वचा के रोग समाप्त होते हैं। इसलिए ज्योतिर्लिंग की परंपरा में अखिल विश्व को समय का बोध, तिथि के महत्व तथा आयुर्वेद के माध्यम से निरोगी रहने का संदेश दिया जाता है। इसलिए इस दिन भगवान महाकाल को नीम युक्त जल से स्नान कराते हैं। साथ ही नीम का जल भक्तों को प्रसाद के रूप में वितरित भी किया जाता है।
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ये भी पढ़ें- महाकाल दर्शन करने पहुंचे अभिनेता गोविंदा, बोले- महाकाल का आशीर्वाद हमेशा बना रहा
विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में आज चैत्र शुक्ल पक्ष की एकम तिथि पर रविवार तड़के भस्म आरती के दौरान चार बजे मंदिर के पट खुलते ही पण्डे पुजारी ने गर्भगृह में स्थापित सभी भगवान की प्रतिमाओं का पूजन कर भगवान महाकाल का जलाभिषेक दूध, दही, घी, शक्कर फलों के रस से बने पंचामृत से कर पूजन अर्चन किया। इसके बाद प्रथम घंटाल बजाकर हरि ओम का जल अर्पित किया गया। कपूर आरती के बाद बाबा महाकाल को चांदी का मुकुट और रुद्राक्ष व पुष्पों की माला धारण करवाई गई। आज के शृंगार की विशेष बात यह रही कि आज एकम की भस्मआरती में बाबा महाकाल का श्री गणेश स्वरूप में शृंगार किया गया। जिसमें बाबा महाकाल को भांग और ड्रायफ्रूट से शृंगारित किया गया साथ ही हर हर गंगे की माला भी धारण करवाई गई। शृंगार के बाद बाबा महाकाल के ज्योतिर्लिंग को कपड़े से ढांककर भस्मी रमाई गई और भोग भी लगाया गया। भस्म आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे, जिन्होंने बाबा महाकाल के इस दिव्य स्वरूप के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
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महाकाल मंदिर के पुजारी पं महेश शर्मा ने बताया कि ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर मे यह भी एक परंपरा है। जिसका प्रतिवर्ष पालन किया जाता है। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से हिन्दू नववर्ष का शुभारंभ होने पर चैत्र मास ऋतु परिवर्तन का होता है। इस माह में ग्रीष्म ऋतु की शुरुआत होती है। इसके प्रभाव से वात, कफ, पित्त की वृद्धि होती है। इससे अनेक रोग जन्म लेते हैं। वात, कफ, पित्त के निदान के लिए नीम के सेवन का महत्व है। आयुर्वेद में भी नीम मिश्री के सेवन को अमृत तुल्य बताया गया है। नीम के जल से स्नान करने से त्वचा के रोग समाप्त होते हैं। इसलिए ज्योतिर्लिंग की परंपरा में अखिल विश्व को समय का बोध, तिथि के महत्व तथा आयुर्वेद के माध्यम से निरोगी रहने का संदेश दिया जाता है। इसलिए इस दिन भगवान महाकाल को नीम युक्त जल से स्नान कराते हैं। साथ ही नीम का जल भक्तों को प्रसाद के रूप में वितरित भी किया जाता है।
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विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में आज चैत्र शुक्ल पक्ष की एकम तिथि पर रविवार तड़के भस्म आरती के दौरान चार बजे मंदिर के पट खुलते ही पण्डे पुजारी ने गर्भगृह में स्थापित सभी भगवान की प्रतिमाओं का पूजन कर भगवान महाकाल का जलाभिषेक दूध, दही, घी, शक्कर फलों के रस से बने पंचामृत से कर पूजन अर्चन किया। इसके बाद प्रथम घंटाल बजाकर हरि ओम का जल अर्पित किया गया। कपूर आरती के बाद बाबा महाकाल को चांदी का मुकुट और रुद्राक्ष व पुष्पों की माला धारण करवाई गई। आज के शृंगार की विशेष बात यह रही कि आज एकम की भस्मआरती में बाबा महाकाल का श्री गणेश स्वरूप में शृंगार किया गया। जिसमें बाबा महाकाल को भांग और ड्रायफ्रूट से शृंगारित किया गया साथ ही हर हर गंगे की माला भी धारण करवाई गई। शृंगार के बाद बाबा महाकाल के ज्योतिर्लिंग को कपड़े से ढांककर भस्मी रमाई गई और भोग भी लगाया गया। भस्म आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे, जिन्होंने बाबा महाकाल के इस दिव्य स्वरूप के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
