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Ujjain News: उज्जैन में अनोखा विवाह, गाय-बैल के हुए फेरे, प्रोसेशन निकालकर रिसेप्शन कराया, जानें क्या है मामला
Mon, 23 Sep 2024 06:39 PM IST
उज्जैन ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
Published by: उज्जैन ब्यूरो
Updated Mon, 23 Sep 2024 06:39 PM IST
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पूर्वजों को प्रेत योनि से मुक्ति के लिए हुआ अनोखा विवाह गाय बैल के हुए फेरे
धार्मिक नगरी उज्जैन में मान्यताओं के आधार पर कोई ना कोई आयोजन होता ही रहता है। रविवार रात विष्णुपूरा क्षेत्र में कुछ ऐसा ही आयोजन हुआ, जिसमें गाय बैल के फेरे हुए प्रोसेशन निकला और रिसेप्शन में शहरवासियों ने जमकर दावत भी खाई। गाय और बैल की इस शादी करवाने के बारे में जब जानकारी जुटाई गई तो पता चला कि श्राद्ध पक्ष में गाय बैल का विवाह करने से पूर्वज प्रेत योनि से मुक्त हो जाते हैं।
चारधाम मंदिर के शासकीय संस्कृत कॉलेज में प्रोफेसर भवानीशंकर शास्त्री द्वारा विष्णुपुरा क्षेत्र में इस प्रकार का आयोजन किया गया था। गाय बैल की शादी करने के इस आयोजन के बारे मैं उनका कहना था कि धार्मिक ग्रंथो में इस बात का उल्लेख है कि श्राद्ध पक्ष के दौरान गाय और बैल की शादी कराने से प्रेत योनि से मुक्त होकर 10 पीढ़ी आगे और 10 पीढ़ी पीछे तक को स्वर्ग मिलता है। इसी कारण विवाह का आयोजन कराया गया।
शादी की सभी रस्मों को निभाया
कहने को तो यह शादी गाय और बैल की थी, लेकिन शादी में आम शादियों की तरह ही सभी परंपराओं का निर्वहन किया गया। मेहंदी के साथ बैल और गाय को तेल चढ़ाया गया। इसके बाद ढोल और डीजे के साथ तेजा की बारात निकली। बाराती डीजे पर नाचते गाते गाय के माता-पिता बने शुक्ला परिवार के घर पहुंचे। बाकायदा बारातियों को स्वागत सत्कार किया गया। तेजाजी मंदिर में शाम को विवाह हुआ। हिंदू रीति के अनुसार सात फेरे, पग पूजन, कन्यादान हुआ। मंगलसूत्र पहनाने और मांग भरने की रस्में भी हुईं। बैल (तेजा) और गाय (पेमल रानी) के फेरे कराए गए। मंदिर में रिसेप्शन भी हुआ।
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चारधाम मंदिर के शासकीय संस्कृत कॉलेज में प्रोफेसर भवानीशंकर शास्त्री द्वारा विष्णुपुरा क्षेत्र में इस प्रकार का आयोजन किया गया था। गाय बैल की शादी करने के इस आयोजन के बारे मैं उनका कहना था कि धार्मिक ग्रंथो में इस बात का उल्लेख है कि श्राद्ध पक्ष के दौरान गाय और बैल की शादी कराने से प्रेत योनि से मुक्त होकर 10 पीढ़ी आगे और 10 पीढ़ी पीछे तक को स्वर्ग मिलता है। इसी कारण विवाह का आयोजन कराया गया।
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शादी की सभी रस्मों को निभाया
कहने को तो यह शादी गाय और बैल की थी, लेकिन शादी में आम शादियों की तरह ही सभी परंपराओं का निर्वहन किया गया। मेहंदी के साथ बैल और गाय को तेल चढ़ाया गया। इसके बाद ढोल और डीजे के साथ तेजा की बारात निकली। बाराती डीजे पर नाचते गाते गाय के माता-पिता बने शुक्ला परिवार के घर पहुंचे। बाकायदा बारातियों को स्वागत सत्कार किया गया। तेजाजी मंदिर में शाम को विवाह हुआ। हिंदू रीति के अनुसार सात फेरे, पग पूजन, कन्यादान हुआ। मंगलसूत्र पहनाने और मांग भरने की रस्में भी हुईं। बैल (तेजा) और गाय (पेमल रानी) के फेरे कराए गए। मंदिर में रिसेप्शन भी हुआ।
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पूर्वजों को प्रेत योनि से मुक्ति के लिए हुआ अनोखा विवाह गाय बैल के हुए फेरे
