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MP: न महंगी कोचिंग, न बड़े शहर की सुविधाएं; 13 साल के किसान पुत्र ने मेहनत के दम पर राष्ट्रपति भवन तक बनाई जगह
Sat, 22 Aug 2026 08:52 AM IST
उज्जैन ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
Published by: उज्जैन ब्यूरो
Updated Sat, 22 Aug 2026 08:52 AM IST
सार
उज्जैन के कड़छली गांव के 13 वर्षीय जयसिंह राठौर का चयन राष्ट्रपति भवन में होने वाले रक्षाबंधन कार्यक्रम के लिए हुआ है। जयसिंह 28 अगस्त को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात करेगा। किसान परिवार से आने वाले जयसिंह ने मैथ्स और इंग्लिश ओलंपियाड में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है
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राष्ट्रपति से मुलाकात करेगा जय सिंह
- फोटो : Amar Ujala
विस्तार
उज्जैन में खेत की मेड़ पर बैठकर पढ़ने वाले लड़के के हाथ में अब राष्ट्रपति भवन का न्योता है। शहर से 17 किलोमीटर दूर गांव कड़छली...जहां बिजली आती-जाती है, कोचिंग दूर है, लेकिन सपने बहुत बड़े हैं। इसी गांव के किसान खुमान सिंह राठौर के 13 साल के बेटे जयसिंह ने वो कर दिखाया, जो बड़े-बड़े शहरों के बच्चे भी नहीं कर पाते। 28 अगस्त 2026 को जयसिंह राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिलेगा। राष्ट्रपति भवन में रक्षाबंधन कार्यक्रम के लिए पूरे देश से चुने गए होनहार विद्यार्थियों में जयसिंह का नाम भी है।
निरंतर प्रयास से मिली सफलता
जयसिंह की सफलता का यह सफर अचानक तय नहीं हुआ, बल्कि उसकी निरंतर लगन का परिणाम है। इससे पहले मैथ्स और इंग्लिश ओलंपियाड में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने पर उज्जैन कलेक्टर द्वारा उसे दो बार सम्मानित किया जा चुका है। वहीं, बीते 29 जुलाई को मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी जयसिंह की प्रतिभा को सराहते हुए उसे सम्मानित कर चुके हैं। कक्षा 8वीं में 80% अंक हासिल करने के बाद जय ने राष्ट्रीय साधन-सह-प्रवीण छात्रवृत्ति (NMMS) परीक्षा में पूरे जिले में टॉप किया, जिससे उसे चार साल में कुल 48,000 रुपये की छात्रवृत्ति भी मिलेगी।
प्रतिभा किसी सुख-सुविधा की मोहताज नहीं
जयसिंह की इस ऐतिहासिक उपलब्धि के पीछे उसके परिवार का अटूट समर्पण और उसकी दिन-रात की मेहनत है। एक साधारण किसान परिवार से आने वाले जयसिंह के पिता खुमान सिंह राठौर खेत में पसीना बहाकर परिवार का पालन-पोषण करते हैं, वहीं मां जया कंवर घर और खेत के कामों के साथ बेटे की पढ़ाई में ढाल बनकर खड़ी रहती हैं। सीमित संसाधनों और गांव के सामान्य माहौल के बावजूद परिवार ने कभी जय की शिक्षा में कमी नहीं आने दी। जयसिंह ने भी अपनी मानसिक क्षमता, सूझ-बूझ और तर्कशक्ति के बल पर कठिन से कठिन परीक्षाओं को पास कर यह साबित कर दिया कि प्रतिभा किसी सुख-सुविधा की मोहताज नहीं होती।
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ये भी पढ़ें- एमपी में मानसून का 'तांडव': सिवनी-बालाघाट में ऑरेंज अलर्ट, नदियों के उफान से 16 जिलों में बाढ़ का खतरा
शिक्षक के साथ 25 अगस्त को दिल्ली रवाना होगा
जयसिंह 25 अगस्त को अपने मार्गदर्शक शिक्षक शैलेन्द्र व्यास के साथ दिल्ली के लिए रवाना होगा। 28 अगस्त को राष्ट्रपति भवन में होने वाला यह कार्यक्रम न केवल जयसिंह के परिवार, बल्कि पूरे कड़छली गांव और उज्जैन जिले के लिए गर्व का क्षण है। गांव के अन्य बच्चे भी अब जयसिंह को अपनी प्रेरणा मानकर सपनों की नई उड़ान भरने के लिए उत्साहित हैं।
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निरंतर प्रयास से मिली सफलता
जयसिंह की सफलता का यह सफर अचानक तय नहीं हुआ, बल्कि उसकी निरंतर लगन का परिणाम है। इससे पहले मैथ्स और इंग्लिश ओलंपियाड में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने पर उज्जैन कलेक्टर द्वारा उसे दो बार सम्मानित किया जा चुका है। वहीं, बीते 29 जुलाई को मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी जयसिंह की प्रतिभा को सराहते हुए उसे सम्मानित कर चुके हैं। कक्षा 8वीं में 80% अंक हासिल करने के बाद जय ने राष्ट्रीय साधन-सह-प्रवीण छात्रवृत्ति (NMMS) परीक्षा में पूरे जिले में टॉप किया, जिससे उसे चार साल में कुल 48,000 रुपये की छात्रवृत्ति भी मिलेगी।
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प्रतिभा किसी सुख-सुविधा की मोहताज नहीं
जयसिंह की इस ऐतिहासिक उपलब्धि के पीछे उसके परिवार का अटूट समर्पण और उसकी दिन-रात की मेहनत है। एक साधारण किसान परिवार से आने वाले जयसिंह के पिता खुमान सिंह राठौर खेत में पसीना बहाकर परिवार का पालन-पोषण करते हैं, वहीं मां जया कंवर घर और खेत के कामों के साथ बेटे की पढ़ाई में ढाल बनकर खड़ी रहती हैं। सीमित संसाधनों और गांव के सामान्य माहौल के बावजूद परिवार ने कभी जय की शिक्षा में कमी नहीं आने दी। जयसिंह ने भी अपनी मानसिक क्षमता, सूझ-बूझ और तर्कशक्ति के बल पर कठिन से कठिन परीक्षाओं को पास कर यह साबित कर दिया कि प्रतिभा किसी सुख-सुविधा की मोहताज नहीं होती।
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शिक्षक के साथ 25 अगस्त को दिल्ली रवाना होगा
जयसिंह 25 अगस्त को अपने मार्गदर्शक शिक्षक शैलेन्द्र व्यास के साथ दिल्ली के लिए रवाना होगा। 28 अगस्त को राष्ट्रपति भवन में होने वाला यह कार्यक्रम न केवल जयसिंह के परिवार, बल्कि पूरे कड़छली गांव और उज्जैन जिले के लिए गर्व का क्षण है। गांव के अन्य बच्चे भी अब जयसिंह को अपनी प्रेरणा मानकर सपनों की नई उड़ान भरने के लिए उत्साहित हैं।
