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गाना सुनने की सजा, दलित युवक को जिंदा जलाया

Wed, 28 Oct 2015 03:31 PM IST
Updated Wed, 28 Oct 2015 03:31 PM IST
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Tribal youth thrashed, burnt and hung for listening to loud music

इस साल 15 अगस्त को जब हम अपने देश की आजादी का जश्न मना रहे थे उसी दिन मध्य प्रदेश में एक युवक को जिंदा जला दिया गया। शायद, यह वही लड़का था जिसके पूर्वज आज तक आजादी का मतलब नहीं समझ पाए या यूं कह लें कि आजादी क्या होती है यह वो क्या जाने जो कभी आजाद हुआ ही नहीं। लेकिन 16 साल का मदिया उन दलितों में से नहीं था जो कभी आजाद ही नहीं होना चाहते। उसे पता था कि आजादी का मतलब क्या होता है? उसे पता था कि आजाद होना कैसा लगता है?

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शायद इस लिए वह वो कर रहा था जो एक आजाद भारतीय करता है। उसे अपने उस अधिकार के बारे में भी पता था जो उसे आजाद भारत के संविधान के अनुच्छेद 19 ने उसे दे रखा था। यहीं वजह था कि वह खुली हवा में आजाद पक्षी की तरह उड़ना चाहता था। और वो वहीं कर रहा था। मदिया अपने साइकिल पर बैठा हवा से बातें करता अपने मोबाइल पर गाना सुन रहा था। शायद वो गाना 'पंछी बनूं, उड़ता फिरूं मस्त गगन में, आज मैं आजाद हूं दुनिया के चमन में' था। होना भी चाहिए क्योंकि उस दिन 15 अगस्त जो था। लेकिन उसे क्या पता था कि उसकी आजादी उसकी नहीं है।
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उसे क्या पता था कि हमारा देश केवल कागजों में आजाद हुआ है, समाजिक स्तर पर तो हम आज भी वहीं है जहां हजारों साल पहले थे। तभी तो उसके साथ वो हुआ जो हजारों साल से दलितों के साथ होता आया है। कुछ उच्च जाति के लोगों ने पहले तो उसे गाने की आवाज धीमी करने का कहा और जब उसने इससे इनकार कर दिया तो फिर उसके साथ वो किया जिसे सुनकर शायद आपके रोंगटे खड़े हो जाएंगे।
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फिर क्या हुआ?

Tribal youth thrashed, burnt and hung for listening to loud music

हुआ कुछ यूं कि जब मदिया ने उन लोगों की बात मानने से इनकार कर दिया तो उन लोगों ने उससे जबरदस्ती अपनी बात मनवानी चाही लेकिन उसका भी उस पर कोई असर नहीं हुआ। होता भी कैसे आजादी का जूनून ही कुछ ऐसा होता है कि 'सिर कटा सकते हैं लेकिन सिर झुका सकते नहीं।'

फिर कुछ देर बाद कुछ और युवक वहां पहुंच गए जो गांव के सेवा दल से जुड़े हुए थे और उन्होंने भी आकर उसे धमकाने की कोशिश की लेकिन वो टस से मस नहीं हुआ। फिर उनके बीच विवाद धीरे-धीरे बढ़ता गया और इतना बढ़ा की उन लोगों ने मदिया की जमकर पिटाई कर दी। बात यहीं खत्म नहीं हुई उन लोगों ने मदिया को जिंदा ही जला दिया और उसकी लाश को रात के अंधेरे में ही उसके घर के सामने एक पेड़ पर टांग आए।

यह दर्दनाक कहानी मध्य प्रदेश के धार जिले की है जहां के अछोदा गांव का रहने वाला दलित आदिवासी युवक मदिया(16) उच्च जाति वालों के हाथों बर्बर तरीके से मारा गया। मदिया की दादी ने आधी रात को जब उसके जले हुए शव को देखा तो उसके होश उड़ गए। उसने चिल्ला-चिल्लाकर पूरे गांव वालों को इकट्ठा कर लिया। किसी को समझ नहीं आ रहा था कि आखिर ये कैसे हुआ?

कार्ट ने दिए जांच के आदेश

Tribal youth thrashed, burnt and hung for listening to loud music

हत्या के अगले दिन पुलिस उस शव को अपने कब्जे में लेकर चली गई लेकिन कोई एफआईआर दर्ज नहीं किया। जिसके बाद उसके परिवार वाले कई दिनों तक पुलिस के आगे पीछे दौड़ते रहे और मदिया के हत्यारों को सजा दिलवाने की मांग करते रहे। लेकिन जब बात नहीं बनी तो मृत युवक के भाई ने आदिवासियों के हित के लिए काम करने वाले जागृत दलित आदिवासी संगठन की मदद से कोर्ट में याचिका दाखिल की।

कोर्ट ने जब इस मामले की सुनवाई शुरू की तो उसे इस दर्दनाक हकीकत के बारे में पता चला जिसके बाद मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के इंदौर बेंच ने धार जिले के एसपी और एसएचओ को समन जारी किया है। इतना ही नहीं जस्टिस एसआर वाघमारे नेर पीड़ित परिवार को उचित सुरक्षा मुहैया कराने के आदेश दिए।

टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक इस निर्मम हत्या के बारे में याचिकाकर्ता के सलाहकार आनंद मोहन माथुर ने बताया कि आरोपी हरिराम पटिदार और शालीग्राम पटिदार ने पहले तो मदिया को आवाज कम करने के आदेश दिए और जब वह नहीं माना तो उनमें बहस भी हुई। इसके बाद गांव के सेवा दल से जुड़े हुए युवक आए और मदिया को मारने लगे और उसको आग के हवाले कर दिया। इतना ही नहीं इन लोगों ने मदिया की जली लाश को उसके घर के सामने पेड़ पर टांग दिया।

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