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Maihar: मप्र के 55वें जिले मैहर की दिलचस्प है कहानी, ऐसे पड़ा था इसका नाम…2023 में सतना से हुआ था अलग
Thu, 02 Jan 2025 01:02 PM IST
शबाहत हुसैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मैहर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मैहर
Published by: शबाहत हुसैन
Updated Thu, 02 Jan 2025 01:02 PM IST
सार
MP News: साल 2023 में मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव से ठीक पहले पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने तीन नए जिले बनाए थे। रीवा से अलग कर मऊगंज बनाया, छिंदवाड़ा से अलग कर पांढुर्णा और सतना से अलग कर मैहर जिला बनाया गया। मैहर प्रदेश का 55वां जिला है। आइये इसी मैहर शहर के कुछ अद्भुत किस्से जानते हैं।
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मैहर जिला
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मैहर मध्यप्रदेश का 55वां जिला है। 5 सितंबर 2023 को सतना से अलग होकर यह नए जिले के रूप में अस्तित्व में आया था। मैहर मां शारदा की नगरी के साथ-साथ सीमेंट की औद्योगिक नगरी के रूप में जाना जाता है। यह नेशनल हाईवे 30 के माध्यम से रीवा संभाग से 65 किमी और कटनी जिले से लगभग 55 किलोमीटर की दूरी पर है।
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ज्यादातर लोग यह जानने के इच्छुक होते हैं कि मैहर का नाम मैहर कैसे पड़ा है। बता दें कि मैहर में माता सती का हार त्रिकूट पर्वत पर गिरने से इस स्थान का नाम मैहर (माई का हार) पड़ा। बाद में वह स्थान मां शारदा के मंदिर के रूप में स्थापित हो गया। इस मंदिर को शक्तिपीठ कहा जाता है। 52 शक्तिपीठ में से 1 यह मां शारदा का मंदिर है, त्रिकूट पर्वत का पूरा क्षेत्र मैहर के नाम से प्रसिद्ध हो गया। मैहर शहर का धीरे-धीरे विस्तार हुआ, अब यह जिले के रूप में जाना जाता हैं।
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इस दिव्य मंदिर में है हजारों सीढ़ियां
त्रिकुट पर्वत पर विराजी मां शारदा के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं को 1063 सीढ़ियां चढ़ कर पहुंचना होता हैं। उसके बाद ही मां शारदा के दिव्य दर्शन होते हैं। मैहर जिले में स्थित मां शारदा का यह मंदिर भारत देश का एकलौता मंदिर है। यह कभी महिष्मति साम्राज्य का हिस्सा था। बाद में यहां प्रतिहार, पाल, गोंड, चंदेल, कुशवाहा,बघेल आदि राजाओं ने भी मां के आशीर्वाद से शासन किया।
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900 साल से जिंदा है आल्हा ऊदल
चंदेल राजाओं के महान सेनापति आल्हा ऊदल माताजी के परम भक्त थे। माताजी आल्हा से साक्षात बात करती थी। आल्हा के पूजा से प्रसन्न होकर मां ने अमरता का वरदान दिया था, तब से आज तक मान्यता है कि शाम की आरती होने के बाद जब मंदिर के कपाट बंद करके सभी पुजारी नीचे आ जाते हैं। तब यहां मंदिर के अंदर से घंटी और पूजा करने की आवाज आती है। लोगों का मानना है कि मां के भक्त आल्हा 900 सालों से अभी भी पूजा करने आते हैं। अक्सर सुबह की आरती वे ही करते हैं। मान्यता है कि आल्हा ऊदल वर्तमान में भी यहां मौजूद हैं।
क्या है नवगठित जिले का इतिहास
मैहर ब्रिटिश राज के दौरान भारत में एक रियासत थी, जो प्रेजेंट में मध्य भारत में स्थित है। राज्य का क्षेत्रफल 1050 वर्ग किलोमीटर (407 वर्ग मील) था। 1901 में इसकी जनसंख्या 63,702 थी। तमसा नदी द्वारा सिंचित, राज्य में मुख्य रूप से बलुआ पत्थर को कवर करने वाली जलोढ़ मिट्टी है। जमीन दक्षिण के पहाड़ी जिलों को छोड़कर उपजाऊ है। एक बड़ा क्षेत्र जंगल के नीचे था। जिसकी उपज से एक छोटा निर्यात व्यापार होता था।
संभाग का 6वां जिला बना मैहर
मैहर जिला रीवा संभाग के अंतर्गत आता है। यह रीवा संभाग का छठा जिला है। इसकी सीमाएं रीवा, कटनी, शहडोल, सीधी, सतना, उमरिया और पन्ना जिलों से लगती हैं। इसका कुल भौगोलिक क्षेत्रफल 2722.79 वर्ग किमी है। साथ ही तमसा नदी (टोंस) जिले की एक प्रमुख नदी है।
मैहर जिले में पर्यटक स्थल
मैहर जिले में कई पर्यटक स्थल है। ये घूमने के आनंद के साथ साथ प्राकृतिक वातावरण और धार्मिक भक्ति का अनुभव कराते हैं। इनमें शारदा देवी मंदिर,आल्हा का अखाड़ा, आल्हा देव मंदिर, आर्ट इचोल, केजेएस मंदिर, गोल मठ मंदिर मैहर, पन्नी खोह झरना, नीलकंठ मंदिर,मुकुंदपुर व्हाइट टाइगर सफारी-चिड़ियाघर और आश्रम मैहर आदि शामिल हैं।
