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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Due to dilapidated school building, children are forced to study under a tree

Shahdol News: पेड़ के नीचे पढ़ने को मजबूर बच्चे, स्कूल भवन हो चुका है जर्जर; प्लास्टर के टुकड़े नीचे गिरे

Mon, 21 Oct 2024 04:55 PM IST
शहडोल ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शहडोल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शहडोल Published by: शहडोल ब्यूरो Updated Mon, 21 Oct 2024 04:55 PM IST
सार

Shahdol News: शहडोल में एक शासकीय स्कूल की हालत इतनी ज्यादा खराब है कि वहां बच्चे पेड़ के नीचे पढ़ने को मजबूर हो गए है। हद तो यह हो गई है कि स्कूल के प्लास्टर उखड़कर नीचे गिरने लगे हैं।

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Due to dilapidated school building, children are forced to study under a tree
पेड़ के नीचे पढ़ाई करते बच्चे - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

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आजादी के बाद भी यह हाल है कि जिले के एक शासकीय स्कूल के बच्चे पेड़ के नीछे बैठकर पढ़ने को मजबूर है। वर्षों पहले बना भवन वर्तमान समय पूर्ण रूप से जर्जर हो चुका है। स्थिति इतनी दयनीय हो गई है कि जर्जर भवन के अंदर बैठकर पढ़ाई करना खतरे से खाली नहीं है।

भवन की छत जर्जर होने से प्लास्टर के बड़े बड़े टुकड़े टूटकर नीचे गिर रहें हैं। दीवार का आलम यह है कि उनकी दरारों को देखकर ऐसा लग रहा है कि स्कूल का जर्जर भवन कभी भी धराशायी हो सकता है। जनपद पंचायत जयसिंह नगर के ग्राम पंचायत बराछ के अमराडंडी गांव में उक्त शासकीय प्राथमिक स्कूल की ऐसी स्थिति हो चुकी है।

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विद्यालय के नए भवन के निर्माण के लिए राशि स्वीकृत कराने पिछले चार वर्ष से विद्यालय प्रबंधन समेत ग्रामवासी नए स्कूल भवन के निर्माण की मांग कर रहें हैं, लेकिन इस ओर आज तक कोई ध्यान नहीं दिया गया। जबकि इसके लिए लगातार स्थानीय ग्राम पंचायत से लेकर जिला प्रशासन के आला अधिकारियों तक को अवगत कराया जा चुका है।
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जिले के जनपद पंचायत जयसिंहनगर अंतर्गत ग्राम पंचायत बराछ के अमराडंडी गांव में उक्त शासकीय प्राथमिक स्कूल में वर्तमान समय करीब 25 से 30 की संख्यां में विद्यार्थी अध्यनरत हैं, लेकिन इनके बैठने के लिए मौजूद करीब 20 वर्ष पुराना भवन अब पूरी तरह से जर्जर हो चुका है।

भवन की स्थिति इतनी अधिक दयनीय हो चुकी है कि जर्जर छत का प्लास्टर का टुकडा टूट टूटकर नीचे गिरता जा रहा है। दीवारों में दरारें आ चुकी है। भवन के अंदर बैठकर पढ़ना मौत को दावत देने से कम नहीं रह गया है। अभिभावक भी अपने बच्चो को ऐसे जर्जर भवन के अंदर बैठाने से गुरेज कर रहें हैं।


स्कूल भवन जर्जर होने के कारण पिछले छः माह से भी अधिक समय से छात्र छात्राएं एक झोपड़ी अथवा पेड़ की छांव में बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं। बारिश के समय में विद्यालय से कुछ दूर स्थित गांव के ही एक व्यक्ति की खाली पड़ी झोपड़ी में विद्यालय का संचालन किया जा रहा था, वहीं बारिश के बाद अब झोपड़ी के बगल में स्थित आम के पेड़ की छांव में स्कूल का संचालन किया जा रहा है।

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