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Sehore: दो-दो कमरों में बिना सुविधा के मनमाना शुल्क वसूल रहे निजी कॉलेज, अभाविप ने दिया ज्ञापन; जांच की मांग

Sun, 11 May 2025 12:27 PM IST
सीहोर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीहोर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीहोर Published by: सीहोर ब्यूरो Updated Sun, 11 May 2025 12:27 PM IST
सार

निजी कॉलेजों को खोलने के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा कुछ नियम तय किए गए हैं। इनके अनुसार, निजी कॉलेज खोलने के लिए सबसे पहले आपको एक सोसाइटी या ट्रस्ट बनाना होगा जो अधिनियम 1958, 1959, 1992 या 2013 के अनुसार हो।

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Sehore news: Private colleges are charging arbitrary fees without providing facilities in two rooms
अभाविप ने पीजी कॉलेज प्राचार्य को ज्ञापन सौंपा

विस्तार

जिले के निजी कॉलेजों को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस के प्राचार्य को ज्ञापन सौंपकर जिले में बिना नियम-कायदों और सुविधाओं के खोले जा रहे कॉलेजों के खिलाफ ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में अभाविप कार्यकर्ताओं ने जिले भर में चल रहे निजी महाविद्यालयों की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कई गंभीर सवाल उठाए हैं।

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अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के जिला संयोजक बलवीर राजपूत के नेतृत्व में जिले के प्रतिनिधिमंडल द्वारा प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस, सीहोर के प्राचार्य रोहिताश्व शर्मा को ज्ञापन सौंपा गया। अभाविप कार्यकर्ताओं ने अपने ज्ञापन में सवाल उठाया है कि जब स्कूल की मान्यता के लिए 14 कड़े नियमों का पालन करना पड़ता है तो महाविद्यालय की अनुमति विश्वविद्यालय द्वारा कैसे दी जा रही है? बीते वर्षों में खोले गए निजी महाविद्यालयों की जांच क्यों नहीं की जाती? संगठन सदस्यों ने बताया कि जिला मुख्यालय पर ही कई निजी महाविद्यालय चार-चार कमरों में संचालित हो रहे हैं। इन कॉलेजों में न तो शैक्षणिक गुणवत्ता का ध्यान रखा जाता है और न ही नियमित रूप से कक्षाओं का संचालन हो रहा है। छात्रों से विश्वविद्यालय द्वारा निर्धारित नियमों के अनुसार फीस न लेकर मनमानी फीस वसूली जा रही है, जिसकी मॉनिटरिंग भी नहीं की जा रही है। इस अवसर पर प्रमुख रूप से ज्ञापन देने वालों में अनुराग पारे, आदि शर्मा, कशिश सिमोलिया, प्रमोद त्यागी, खुशाल मोटवानी, मयंक चंदेल आदि उपस्थित रहे।
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कई निजी कॉलेजों में न प्रयोगशालाएं, न पुस्तकालय
यहां यह भी उल्लेखनीय है कि जिलेभर में कई ऐसे निजी कॉलेज इस समय संचालित हो रहे हैं जहां न तो वैज्ञानिक प्रयोगों के लिए प्रयोगशालाएं हैं और न ही छात्रों को पुस्तकालयों की सुविधा मिल रही है। जिला मुख्यालय पर ही ऐसे कई कॉलेज हैं जहां प्रयोगशाला के नाम पर एक-एक टेबल पर कुछ प्रायोगिक यंत्र रख दिए गए हैं, तो वहीं पुस्तकालय के नाम पर एक अलमारी में कुछ किताबें रख दी गई हैं। गली-मोहल्लों के भवनों में संचालित इन कॉलेजों में विश्वविद्यालयों के तय नियमों का पालन भी नहीं किया जा रहा है। इन निजी कॉलेजों में निर्धारित शैक्षणिक योग्यता वाले शिक्षकों की बजाए अयोग्य व स्नातक स्तर के शिक्षक रखे जा रहे हैं, जिससे शैक्षणिक गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। कई कॉलेजों में तो कक्षाएं केवल कागजों पर ही संचालित होती हैं।

कॉलेज खोलने के लिए चाहिए कम से कम तीन एकड़ जमीन
निजी कॉलेजों को खोलने के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा कुछ नियम तय किए गए हैं। इनके अनुसार, निजी कॉलेज खोलने के लिए सबसे पहले आपको एक सोसाइटी या ट्रस्ट बनाना होगा जो अधिनियम 1958, 1959, 1992 या 2013 के अनुसार हो। सोसाइटी या ट्रस्ट में कम से कम दो सदस्य शिक्षा विज्ञान से होने चाहिए। सोसाइटी में कम से कम 21 सदस्य होने चाहिए, जिनमें 30 प्रतिशत महिला सदस्य होना आवश्यक है। सोसाइटी के सभी सदस्य एक ही समुदाय या जाति से नहीं होने चाहिए। इसके अलावा, आपको उच्च शिक्षा विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त करना होगा। कॉलेज के लिए कम से कम 5 बीघा या तीन एकड़ जमीन होनी चाहिए, जिसमें खेल मैदान और अन्य गतिविधियों के लिए भी जगह होनी चाहिए। यदि कॉलेज किसी सरकारी या निजी कॉलेज के 10 किलोमीटर के दायरे में बिना प्रतिस्पर्धा के खोला जा रहा है, तो आपको 3 लाख रुपये का एंडोमेंट शुल्क देना होगा। जिले के निजी कॉलेजों को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस के प्राचार्य को ज्ञापन सौंपकर जिले में बिना नियम-कायदों और सुविधाओं के खोले जा रहे कॉलेजों के खिलाफ ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में अभाविप कार्यकर्ताओं ने जिले भर में चल रहे निजी महाविद्यालयों की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कई गंभीर सवाल उठाए हैं।

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 14 कड़े नियमों का पालन करना पड़ता
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के जिला संयोजक बलवीर राजपूत के नेतृत्व में जिले के प्रतिनिधिमंडल द्वारा प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस, सीहोर के प्राचार्य रोहिताश्व शर्मा को ज्ञापन सौंपा गया। अभाविप कार्यकर्ताओं ने अपने ज्ञापन में सवाल उठाया है कि जब स्कूल की मान्यता के लिए 14 कड़े नियमों का पालन करना पड़ता है तो महाविद्यालय की अनुमति विश्वविद्यालय द्वारा कैसे दी जा रही है? बीते वर्षों में खोले गए निजी महाविद्यालयों की जांच क्यों नहीं की जाती? संगठन सदस्यों ने बताया कि जिला मुख्यालय पर ही कई निजी महाविद्यालय चार-चार कमरों में संचालित हो रहे हैं। इन कॉलेजों में न तो शैक्षणिक गुणवत्ता का ध्यान रखा जाता है और न ही नियमित रूप से कक्षाओं का संचालन हो रहा है। छात्रों से विश्वविद्यालय द्वारा निर्धारित नियमों के अनुसार फीस न लेकर मनमानी फीस वसूली जा रही है, जिसकी मॉनिटरिंग भी नहीं की जा रही है। इस अवसर पर प्रमुख रूप से ज्ञापन देने वालों में अनुराग पारे, आदि शर्मा, कशिश सिमोलिया, प्रमोद त्यागी, खुशाल मोटवानी, मयंक चंदेल आदि उपस्थित रहे।

कई निजी कॉलेजों में न प्रयोगशालाएं, न पुस्तकालय
यहां यह भी उल्लेखनीय है कि जिलेभर में कई ऐसे निजी कॉलेज इस समय संचालित हो रहे हैं जहां न तो वैज्ञानिक प्रयोगों के लिए प्रयोगशालाएं हैं और न ही छात्रों को पुस्तकालयों की सुविधा मिल रही है। जिला मुख्यालय पर ही ऐसे कई कॉलेज हैं जहां प्रयोगशाला के नाम पर एक-एक टेबल पर कुछ प्रायोगिक यंत्र रख दिए गए हैं, तो वहीं पुस्तकालय के नाम पर एक अलमारी में कुछ किताबें रख दी गई हैं। गली-मोहल्लों के भवनों में संचालित इन कॉलेजों में विश्वविद्यालयों के तय नियमों का पालन भी नहीं किया जा रहा है। इन निजी कॉलेजों में निर्धारित शैक्षणिक योग्यता वाले शिक्षकों की बजाए अयोग्य व स्नातक स्तर के शिक्षक रखे जा रहे हैं, जिससे शैक्षणिक गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। कई कॉलेजों में तो कक्षाएं केवल कागजों पर ही संचालित होती हैं।

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निजी कॉलेज खोलने के लिए चाहिए कम से कम तीन एकड़ जमीन
निजी कॉलेजों को खोलने के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा कुछ नियम तय किए गए हैं। इनके अनुसार, निजी कॉलेज खोलने के लिए सबसे पहले आपको एक सोसाइटी या ट्रस्ट बनाना होगा जो अधिनियम 1958, 1959, 1992 या 2013 के अनुसार हो। सोसाइटी या ट्रस्ट में कम से कम दो सदस्य शिक्षा विज्ञान से होने चाहिए। सोसाइटी में कम से कम 21 सदस्य होने चाहिए, जिनमें 30 प्रतिशत महिला सदस्य होना आवश्यक है। सोसाइटी के सभी सदस्य एक ही समुदाय या जाति से नहीं होने चाहिए। इसके अलावा, आपको उच्च शिक्षा विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त करना होगा। कॉलेज के लिए कम से कम 5 बीघा या तीन एकड़ जमीन होनी चाहिए, जिसमें खेल मैदान और अन्य गतिविधियों के लिए भी जगह होनी चाहिए। यदि कॉलेज किसी सरकारी या निजी कॉलेज के 10 किलोमीटर के दायरे में बिना प्रतिस्पर्धा के खोला जा रहा है, तो आपको 3 लाख रुपये का एंडोमेंट शुल्क देना होगा।

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