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Sehore: रेत खनन और परिवहन पर रोक से मचा हाहाकार, लोगों की रोजी रोटी पर गहराया संकट; कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन
Mon, 17 Feb 2025 08:26 PM IST
सीहोर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीहोर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीहोर
Published by: सीहोर ब्यूरो
Updated Mon, 17 Feb 2025 08:26 PM IST
सार
छोटे वाहनों को जब्त किया जा रहा है और ट्रक मालिकों पर लगातार दबाव बनाया जा रहा है। हालत यह है कि रॉयल्टी चुकाने के बावजूद ट्रक और डंपर जब्त किए जा रहे हैं, जिससे ट्रांसपोर्टर भारी आर्थिक संकट में घिर कर रह गए हैं।
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कलेक्ट्रेट में धरना देकर दिया ज्ञापन
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
जिले में रेत खनन और परिवहन पर प्रशासन की सख्ती से हाहाकार मच गया है। मजदूर, ट्रक मालिक, ड्राइवर, ठेकेदार और कारीगरों की रोजी-रोटी पर संकट खड़ा हो गया है। स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि सोमवार को सैकड़ों ट्रांसपोर्टरों, ड्रायवरों क्लीनरों और मजदूरों ने कलेक्ट्रेट में खनिज विभाग की मनमानी के खिलाफ धरना देकर मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के नाम का ज्ञापन डिप्टी कलेक्टर वंदना राजपूत को दिया है।
सेण्ड ट्रक आनर्स एसोशिएशन, सर्व चालक कल्याण संघ और मजदूरों के संगठनों ने संयुक्त रूप से बताया कि खनन विभाग, राजस्व विभाग और प्रशासन की कार्रवाई के चलते रेत खनन और परिवहन कार्य जिले में लगभग ठप हो गया है। मजदूरों को रेत खदानों में काम करने से रोका जा रहा है, छोटे वाहनों को जब्त किया जा रहा है और ट्रक मालिकों पर लगातार दबाव बनाया जा रहा है। हालत यह है कि रॉयल्टी चुकाने के बावजूद ट्रक और डंपर जब्त किए जा रहे हैं, जिससे ट्रांसपोर्टर भारी आर्थिक संकट में घिर कर रह गए हैं।
रेत से जुड़े 10 लाख लोगों पर संकट
जिसका असर प्रदेश के सभी जिलों में भी देखा जा रहा है। करीब 50 हजार ट्रक और 1 लाख छोटे वाहन रेत परिवहन के काम से जुड़े हैं। इससे लगभग 2 लाख ड्राइवर और उनके परिवारों सहित 10 लाख लोगों की रोजी-रोटी मिलती है। इसके अलावा, घर निर्माण से जुड़े कारीगर, मिस्त्री, ठेकेदार, मैकेनिक और अन्य छोटे कारोबारी भी इस रोक के कारण प्रभावित हो रहे है। रेत नहीं मिलने से ट्रांसपोर्टरों की बैंक किश्तें अटक गई हैं, जिससे कई ट्रकों को फाइनेंसरों ने जब्त कर लिया है।
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रॉयल्टी देने पर भी ट्रक जब्ती की कार्रवाई
डीजल, टायर, मेंटेनेंस खर्च बढ़ता जा रहा है जिस कारण ट्रकों के पहिए थमे हुए हैं। इधर रेत की किल्लत से सरकारी और निजी निर्माण कार्यो पर भी असर पड़ रहा है। बिल्डिंग मैटेरियल सप्लायर रेत संकट से जूझ रहे हैं, जिससे प्रदेश की अर्थव्यवस्था पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। सवाल उठता है कि रॉयल्टी देने के बावजूद ट्रकों को क्यों जब्त किया जा रहा है। गरीब मजदूरों और वाहन चालकों को काम से क्यों रोका जा रहा है। अगर सरकार ने जल्द इस मुद्दे पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो आने वाले दिनों में बेरोजगारी और आर्थिक संकट और गहरा सकता है।
मजदूरों को आरोप हमें कर रहे प्रताड़ित
इधर, नर्मदा नदी के आस-पास के निवासी मजदूर कई पीढ़ियों से नर्मदा में नियम अनुसार रेत निकालकर अपना जीवन यापन कर रहे हैं। उनका कहना है की खनिज विभाग के अधिकारियों का बदलाव हुआ है, जिसके बाद से खनिज विभाग द्वारा हमें प्रताडि़त किया जा रहा है और हमारे रोजगार को छीना जा रहा है। सरकार के सभी नियमों का पालन करते हुए बालू रेत निकालकर गाड़ियों में लोड करते हैं एवं उस लोडिंग से प्राप्त राशि से अपने परिवार का भरण पोषण करते है।
खनिज विभाग एवं उनकी टीम द्वारा बार-बार गांव में आकर हमें धमकाया जा रहा है और हमें प्रताड़ित किया जा रहा है, जिसके कारण हम लोडिंग का काम नहीं कर सकते है। खनिज विभाग की प्रताडऩा से परेशान होकर 2 हजार से ज्यादा परिवार बेरोजगारी की कगार पर पहुंच गए हैं।
ड्राइवर एवं हेल्पर हो गए है बेरोजगार
ड्राइवरों और हेल्परों ने कहा कि पिछले लगभग 15 वर्षों से रेत के ट्रक चलाकर जीवन यापन कर रहे थे, जिससे परिवार का भरण-पोषण एवं बच्चों की उत्तम शिक्षा हो रही थी, लेकिन खनिज विभाग में अधिकारियों का बदलाव होने के बाद प्रताड़ित किया जा रहा है और हमारे रोजगार को छीना जा रहा है। सभी नियमों का पालन करते हुए बालू रेत का वैध रूप से राजस्व देकर परिवहन कर रहे थे, लेकिन वर्तमान में पदस्थ खनिज विभाग एवं उनकी टीम द्वारा हमें प्रताड़ित कर हमारे वाहन की थाने में खड़ा कर दिया जाता है, जिसके कारण हम काम नहीं कर पा रहे है। जिस कारण एक हजार गाड़ी के लगभग 2 हजार से ज्यादा ड्राइवर एवं हेल्पर बेरोजगार हो गए है। परिणाम स्वरूप परिवार पर भरण-पोषण पर एक बड़ा संकट है।
तो फिर भोपाल में करेंगे प्रदर्शन
मुख्यमंत्री को दिए ज्ञापन में तत्काल रेत खनन और ट्रांसपोर्ट कार्य सुचारू रूप से शुरू कराए जाने, रॉयल्टी देने के बावजूद जब्त किए गए ट्रकों छोड़ने, माइनिंग और राजस्व विभाग की मनमानी पर रोक लगाने सहित अन्य मांगें की गई है। मांग पूरी नहीं होने पर ट्रांसपोर्टर, ड्राइवर एवं हेल्पर और मजदूरों के द्वारा परिजनों के साथ भोपाल में 24 से 25 फरवरी की शाम तक धरना प्रदर्शन किया जाएगा।
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सेण्ड ट्रक आनर्स एसोशिएशन, सर्व चालक कल्याण संघ और मजदूरों के संगठनों ने संयुक्त रूप से बताया कि खनन विभाग, राजस्व विभाग और प्रशासन की कार्रवाई के चलते रेत खनन और परिवहन कार्य जिले में लगभग ठप हो गया है। मजदूरों को रेत खदानों में काम करने से रोका जा रहा है, छोटे वाहनों को जब्त किया जा रहा है और ट्रक मालिकों पर लगातार दबाव बनाया जा रहा है। हालत यह है कि रॉयल्टी चुकाने के बावजूद ट्रक और डंपर जब्त किए जा रहे हैं, जिससे ट्रांसपोर्टर भारी आर्थिक संकट में घिर कर रह गए हैं।
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रेत से जुड़े 10 लाख लोगों पर संकट
जिसका असर प्रदेश के सभी जिलों में भी देखा जा रहा है। करीब 50 हजार ट्रक और 1 लाख छोटे वाहन रेत परिवहन के काम से जुड़े हैं। इससे लगभग 2 लाख ड्राइवर और उनके परिवारों सहित 10 लाख लोगों की रोजी-रोटी मिलती है। इसके अलावा, घर निर्माण से जुड़े कारीगर, मिस्त्री, ठेकेदार, मैकेनिक और अन्य छोटे कारोबारी भी इस रोक के कारण प्रभावित हो रहे है। रेत नहीं मिलने से ट्रांसपोर्टरों की बैंक किश्तें अटक गई हैं, जिससे कई ट्रकों को फाइनेंसरों ने जब्त कर लिया है।
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रॉयल्टी देने पर भी ट्रक जब्ती की कार्रवाई
डीजल, टायर, मेंटेनेंस खर्च बढ़ता जा रहा है जिस कारण ट्रकों के पहिए थमे हुए हैं। इधर रेत की किल्लत से सरकारी और निजी निर्माण कार्यो पर भी असर पड़ रहा है। बिल्डिंग मैटेरियल सप्लायर रेत संकट से जूझ रहे हैं, जिससे प्रदेश की अर्थव्यवस्था पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। सवाल उठता है कि रॉयल्टी देने के बावजूद ट्रकों को क्यों जब्त किया जा रहा है। गरीब मजदूरों और वाहन चालकों को काम से क्यों रोका जा रहा है। अगर सरकार ने जल्द इस मुद्दे पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो आने वाले दिनों में बेरोजगारी और आर्थिक संकट और गहरा सकता है।
मजदूरों को आरोप हमें कर रहे प्रताड़ित
इधर, नर्मदा नदी के आस-पास के निवासी मजदूर कई पीढ़ियों से नर्मदा में नियम अनुसार रेत निकालकर अपना जीवन यापन कर रहे हैं। उनका कहना है की खनिज विभाग के अधिकारियों का बदलाव हुआ है, जिसके बाद से खनिज विभाग द्वारा हमें प्रताडि़त किया जा रहा है और हमारे रोजगार को छीना जा रहा है। सरकार के सभी नियमों का पालन करते हुए बालू रेत निकालकर गाड़ियों में लोड करते हैं एवं उस लोडिंग से प्राप्त राशि से अपने परिवार का भरण पोषण करते है।
खनिज विभाग एवं उनकी टीम द्वारा बार-बार गांव में आकर हमें धमकाया जा रहा है और हमें प्रताड़ित किया जा रहा है, जिसके कारण हम लोडिंग का काम नहीं कर सकते है। खनिज विभाग की प्रताडऩा से परेशान होकर 2 हजार से ज्यादा परिवार बेरोजगारी की कगार पर पहुंच गए हैं।
ड्राइवर एवं हेल्पर हो गए है बेरोजगार
ड्राइवरों और हेल्परों ने कहा कि पिछले लगभग 15 वर्षों से रेत के ट्रक चलाकर जीवन यापन कर रहे थे, जिससे परिवार का भरण-पोषण एवं बच्चों की उत्तम शिक्षा हो रही थी, लेकिन खनिज विभाग में अधिकारियों का बदलाव होने के बाद प्रताड़ित किया जा रहा है और हमारे रोजगार को छीना जा रहा है। सभी नियमों का पालन करते हुए बालू रेत का वैध रूप से राजस्व देकर परिवहन कर रहे थे, लेकिन वर्तमान में पदस्थ खनिज विभाग एवं उनकी टीम द्वारा हमें प्रताड़ित कर हमारे वाहन की थाने में खड़ा कर दिया जाता है, जिसके कारण हम काम नहीं कर पा रहे है। जिस कारण एक हजार गाड़ी के लगभग 2 हजार से ज्यादा ड्राइवर एवं हेल्पर बेरोजगार हो गए है। परिणाम स्वरूप परिवार पर भरण-पोषण पर एक बड़ा संकट है।
तो फिर भोपाल में करेंगे प्रदर्शन
मुख्यमंत्री को दिए ज्ञापन में तत्काल रेत खनन और ट्रांसपोर्ट कार्य सुचारू रूप से शुरू कराए जाने, रॉयल्टी देने के बावजूद जब्त किए गए ट्रकों छोड़ने, माइनिंग और राजस्व विभाग की मनमानी पर रोक लगाने सहित अन्य मांगें की गई है। मांग पूरी नहीं होने पर ट्रांसपोर्टर, ड्राइवर एवं हेल्पर और मजदूरों के द्वारा परिजनों के साथ भोपाल में 24 से 25 फरवरी की शाम तक धरना प्रदर्शन किया जाएगा।
