{"_id":"67caf5f10cac1be3de04d7cb","slug":"wife-suffering-from-cancer-servant-husband-demanded-bribe-treasury-clerk-in-sagar-arrested-while-taking-bribe-of-rs-1500-sagar-news-c-1-1-noi1338-2701400-2025-03-07","type":"story","status":"publish","title_hn":"Sagar: कैंसर से जूझ रही पत्नी, भृत्य पति से मांगी रिश्वत, सागर में ट्रेजरी का क्लर्क 1500 रिश्वत लेते गिरफ्तार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Sagar: कैंसर से जूझ रही पत्नी, भृत्य पति से मांगी रिश्वत, सागर में ट्रेजरी का क्लर्क 1500 रिश्वत लेते गिरफ्तार
Fri, 07 Mar 2025 08:07 PM IST
सागर ब्यूरो
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, सागर
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, सागर
Published by: सागर ब्यूरो
Updated Fri, 07 Mar 2025 08:07 PM IST
सार
टीम ने जाल बिछाया और क्लर्क को कार्यालय के पीछे वाले गेट के पास 1500 रुपये लेते रंगे हाथों दबोच लिया। ट्रैप दल में इंस्पेक्टर रंजीत सिंह और अभिषेक वर्मा ने रंगे हाथों पकड़ा है।
विज्ञापन
रिश्वत लेते गिरफ्तार
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
प्रदेश में रिश्वतखोरों के खिलाफ लगातार अभियान जारी है। सागर जिले में एक भृत्य से 1500 रुपये रिश्वत लेते हुए ट्रेजरी क्लर्क को रंगेहाथों गिरफ्तार किया गया। भृत्य की किशोरवय बेटी मानसिक निःशक्त है और पत्नी को कैंसर है, फिर भी बाबू का दिल नहीं पसीजा। इस पर कलेक्ट्रेट में पदस्थ चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी धनीराम बांगर ने जिला ट्रेजरी (कोषालय) में पदस्थ क्लर्क रामजी कोरी को शुक्रवार शाम को ट्रैप करा दिया।
विज्ञापन
क्लर्क कोरी ने बांगर से छठे वेतनमान के एरियर्स के एक लाख रुपये जारी करने की एवज में 2000 रुपये की रिश्वत मांगी थी। इसकी शिकायत भृत्य बांगर ने लोकायुक्त संगठन (विशेष पुलिस स्थापना) कार्यालय सागर से कर दी। टीम ने जाल बिछाया और क्लर्क कोरी को कार्यालय के पीछे वाले गेट के पास 1500 रुपये लेते रंगे हाथों दबोच लिया। ट्रैप दल में इंस्पेक्टर रंजीत सिंह, अभिषेक वर्मा ने रंगे हाथों पकड़ा है। बता दें, बांगर की राशि 5 वर्ष से अटकी थी।
विज्ञापन
कोरी ने दो बार बगैर कारण के बिल लौटा दिए थे। कर्ज लेकर वह पत्नी और बच्ची का इलाज करा रहा था और उस राशि से कुछ कर्ज चुकाने की उम्मीद बंधी थी। लेकिन ट्रेजरी का बाबू रामजी कोरी ये राशि खाते में ट्रांसफर करने में आनाकानी कर रहा था। बांगर ने बताया कि मैं कभी रिश्वत देने के पक्ष में नहीं रहा, इसके बावजूद में रामजी को 500 रुपये देने के लिए राजी हो गया। लेकिन रामजी नहीं माना। फिर सौदा 1500 में तय हुआ, लेकिन मैं पहले ही उसे ट्रैप कराने का मन बना चुका था। इसलिए मैंने उसकी शिकायत कर दी। भृत्य बांगर ने बताया कि उक्त राशि 5 वर्ष पहले हाईकोर्ट जबलपुर के आदेश पर छठे वेतन आयोग के एरियर्स के रूप में प्रदान करने का आदेश हुआ था।
विज्ञापन
