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Ratlam: 44 लाख के बैंक गबन में पूर्व शाखा प्रबंधक को चार साल की सजा, जेल भेजा गया; पूर्व बैंक मैनेजर दोषी करार
Tue, 30 Jun 2026 09:50 PM IST
रतलाम ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रतलाम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रतलाम
Published by: रतलाम ब्यूरो
Updated Tue, 30 Jun 2026 09:50 PM IST
सार
रतलाम की बड़ावदा स्थित सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया शाखा में 44.46 लाख रुपये के गबन मामले में पूर्व शाखा प्रबंधक नेविल कावराना को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम अदालत ने चार वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। छह सहआरोपी दोषमुक्त हुए।
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कोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
44 लाख रुपये से अधिक के गबन और धोखाधड़ी के बहुचर्चित मामले में रतलाम जिले की बड़ावदा स्थित सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के तत्कालीन शाखा प्रबंधक नेविल कावराना को अदालत ने दोषी करार देते हुए चार वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। यह फैसला मंगलवार को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के विशेष न्यायाधीश संजीव कटारे ने सुनाया। सजा सुनाए जाने के बाद दोषी को जेल भेज दिया गया।
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अभियोजन की प्रभारी उपसंचालक एवं सहायक निदेशक आशा शाक्यवार ने बताया कि वर्ष 2012 से 2014 के बीच बड़ावदा शाखा में 44 लाख 46 हजार 717 रुपये का गबन हुआ था। वर्ष 2014 में तत्कालीन शाखा प्रबंधक सुमित जैन ने आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) उज्जैन में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि पूर्व शाखा प्रबंधक नेविल कावराना ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए बैंक की राशि अपने, परिजनों तथा बिजनेस फैसिलिटेटर देवेंद्र सांड एवं उसके परिजनों के खातों में स्थानांतरित कर अवैध लाभ प्राप्त किया।
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जांच में सामने आया कि नेविल कावराना के तबादले के बाद नए शाखा प्रबंधक सुमित जैन ने रिकॉर्ड की जांच की, जिसमें वित्तीय अनियमितताओं का खुलासा हुआ। इसके बाद विस्तृत रिपोर्ट बैंक के वरिष्ठ अधिकारियों और ईओडब्ल्यू उज्जैन को भेजी गई। विवेचना में पाया गया कि बैंक के वित्तीय सॉफ्टवेयर और दस्तावेजों में हेरफेर कर सुनियोजित तरीके से गबन किया गया था।
जांच के अनुसार, आरोपी किसानों की जानकारी और सहमति के बिना उनके किसान क्रेडिट कार्ड एवं अन्य खातों से राशि डेबिट कर अपने तथा सहआरोपियों के खातों में ट्रांसफर करता था। खातों से निकाली गई राशि के नाम पर फसल बीमा कंपनियों और शासकीय मद के लिए डिमांड ड्राफ्ट बनाए जाते थे, लेकिन उन्हें संबंधित संस्थाओं को भेजने के बजाय सिस्टम में निरस्त कर राशि दोबारा अपने और सहयोगियों के खातों में स्थानांतरित कर दी जाती थी। आरोप है कि आरोपी ने बैंक के अन्य खातों से भी अवैध निकासी कर रकम अपने और परिजनों के खातों में जमा कराई।
नौ आरोपियों पर चला मामला, छह बरी
ईओडब्ल्यू ने विवेचना के बाद पूर्व शाखा प्रबंधक नेविल कावराना, उसकी पत्नी खुर्शीद कावराना, रिश्तेदार यास्मीन कावराना, गुलनार कावराना, शहजाद मेहता, जीमी खोखरी, बिजनेस फैसिलिटेटर देवेंद्र सांड, कांता सांड और प्रीति सांड सहित कुल नौ आरोपियों के खिलाफ चालान पेश किया था।
सुनवाई के बाद अदालत ने नेविल कावराना को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7 एवं 13(1) तथा भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी, 409 और 420 के तहत दोषी ठहराते हुए विभिन्न धाराओं में चार-चार वर्ष तथा तीन वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी। मामले के दो आरोपी देवेंद्र सांड और कांता सांड की सुनवाई के दौरान मृत्यु हो चुकी थी, जबकि शेष छह आरोपियों को साक्ष्यों के अभाव में दोषमुक्त कर दिया गया। शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक कृष्णकांत चौहान ने पैरवी की।
