Transfer News: राजगढ़ की चार नगर परिषदों में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, प्रभारी CMO हटाए गए
राजगढ़ की खिलचीपुर, जीरापुर, तलेन और बोड़ा नगर परिषदों में प्रशासनिक फेरबदल हुआ। आयुक्त कैलाश वानखेड़े ने 26 मई को प्रभारी CMO हटाकर मूल पद पर लौटने के निर्देश दिए।
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राजगढ़ जिले की चार नगर परिषदों में प्रशासनिक फेरबदल के बाद हलचल तेज हो गई है। आयुक्त नगरीय प्रशासन एवं विकास भोपाल कैलाश वानखेड़े ने 26 मई 2026 को आदेश जारी कर खिलचीपुर, जीरापुर, तलेन और बोड़ा नगर परिषद में प्रभारी के रूप में कार्यरत सभी मुख्य नगर पालिका अधिकारियों (CMO) को तत्काल प्रभाव से प्रभार से मुक्त कर दिया है। आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि सभी अधिकारी अपने मूल पद और मूल पदस्थापना स्थल पर लौटेंगे।
यह फैसला भोपाल संभाग के संयुक्त संचालक नगरीय प्रशासन एवं विकास द्वारा पहले जारी किए गए प्रभार आदेशों को निरस्त करने के बाद लिया गया है। नए आदेश के अनुसार CMO पद पर वही पदस्थापना मान्य होगी, जो आयुक्त नगरीय प्रशासन एवं विकास भोपाल स्तर से जारी की गई हो। संयुक्त संचालक स्तर से जारी सभी प्रभार आदेश अब प्रभावहीन माने जाएंगे।
चारों नगर परिषदों में अलग-अलग समय पर अधिकारियों को अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया था। खिलचीपुर में देव नारायण दांगी को 1 जनवरी 2026 को CMO का प्रभार मिला था। जीरापुर में हरिओम शर्मा 4 मार्च 2025 से अतिरिक्त प्रभारी CMO के रूप में कार्यरत थे। तलेन नगर परिषद में ब्रजेश कुमार आर्य को 19 दिसंबर 2025 को जिम्मेदारी दी गई थी, जबकि बोड़ा नगर परिषद में अभिषेक जैन 19 जून 2025 से अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे थे।
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आयुक्त स्तर से आदेश जारी होने के बाद अब चारों अधिकारियों को अपने मूल विभाग और पदस्थापना पर लौटना होगा। इससे चारों नगर परिषदों में नए CMO की नियुक्ति को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। कर्मचारियों से लेकर जनप्रतिनिधियों तक नए नामों को लेकर कयास लगाए जा रहे हैं।
आदेश के बाद नगर परिषदों में प्रशासनिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। कई विकास कार्य, फाइलों का निपटारा और बजट से जुड़े फैसले नए अधिकारी की नियुक्ति तक प्रभावित हो सकते हैं। स्थानीय स्तर पर नागरिक सुविधाएं प्रभावित न हों, इसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था किए जाने की संभावना है।
लंबे समय से प्रभारी अधिकारियों के भरोसे चल रही इन नगर परिषदों में कई बार नीतिगत फैसलों में देरी और जवाबदेही तय करने में कठिनाई सामने आती रही है। ऐसे में आयुक्त स्तर से सीधे नियंत्रण और पदस्थापना व्यवस्था लागू होने से प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।
