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सीएम के कार्यक्रम में बिजली कटी: पूर्व मंत्री जीतू पटवारी बोले प्रदेश में गंभीर बिजली संकट, गांव में 10 घंटे तक बिजली नहीं
Thu, 21 Apr 2022 11:44 PM IST
आनंद पवार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: आनंद पवार
Updated Thu, 21 Apr 2022 11:44 PM IST
सार
मध्य प्रदेश में गर्मियों में बिजली की खपत बढ़ने के साथ ही अघोषित कटौती भी शुरू हो गई है। गुरुवार को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यक्रम में बिजली गुल होने पर पूर्व मंत्री जीतू पटवारी ने निशाना साधा है।
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कांग्रेस विधायक जीतू पटवारी (फाइल फोटो)
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
मध्य प्रदेश में गर्मियों में बिजली की खपत बढ़ने के साथ ही अघोषित कटौती भी शुरू हो गई है। गुरुवार को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यक्रम में बिजली गुल होने पर पूर्व मंत्री जीतू पटवारी ने निशाना साधा है।
पूर्व मंत्री और कांग्रेस विधायक जीतू पटवारी ने कहा कि मध्यप्रदेश में बिजली का संकट गहरा गया है। गांवों में 10 घंटे तक बिजली नहीं आ रही है और शहरी क्षेत्र में भी बिजली कटौती जारी है। एमपी पावर मैनेजमेंट कंपनी ने 22,000 मेगावाट बिजली का एग्रीमेंट किया है, लेकिन जितनी खपत है, उतनी बिजली भी नहीं मिल रही। शिवराज सरकार की अदूरदर्शिता से प्रदेश में अंधेरा व्याप्त है। वहीं मुख्यमंत्री के कार्यक्रमों में भी बिजली गुल हो रही है। बिजली संकट भयावह है, सरकार स्थिति को जल्द संभाले। प्रदेश को 12 हजार मेगावाट बिजली की जरूरत है, जबकि उपलब्धता मात्र 10 हजार मेगावाट है।
पटवारी ने कहा कि जहां कमलनाथ सरकार में 100 रू. में 100 यूनिट बिजली मिलती थी और बिजली का किसी तरह का संकट नहीं था। वहीं शिवराज सिंह चौहान सरकार ने प्रदेश को अंधेरे में धकेल दिया है। प्रदेश में अंधेर नगरी मामा राजा के हालात पैदा हो गए हैं।
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पटवारी ने कहा कि प्रदेश की जनता यह भी जानती है कि मध्यप्रदेश में भाजपा सरकार की लापरवाही से कोयले का संकट लंबे समय से बना हुआ है। यही कारण है कि आज प्रशासन अकादमी में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के संबोधन के दौरान और भाजपा अध्यक्ष वीडी शर्मा की पत्रकार वार्ता के पूर्व लंबे समय तक बिजली कटौती होना प्रदेश में बिजली संकट की स्थिति बयां करता है।
पटवारी ने दूसरे मुद्दों पर कहा कि मार्च में खाने-पीने की चीजों की थोक महंगाई दर 8.47 प्रतिशत से बढ़कर 8.71 प्रतिशत पर आ गई है। वहीं प्राइमरी आर्टिकल्स की थोक महंगाई दर भी फरवरी 13.39 प्रतिशत से बढ़कर 15.54 प्रतिशत पर आ गई है। उधर, ईंधन और बिजली की थोक महंगाई दर भी फरवरी के 31.50 प्रतिशत से बढ़कर 34.52 प्रतिशत पर आ गई है।
उन्होंने कहा कि खाने-पीने के सामान, ईंधन और बिजली के दाम में इजाफा होने से थोक महंगाई मार्च में लगातार 12वें महीने डबल डिजिट में बनी हुई है। थोक मूल्य सूचकांक आधारित (WPI) महंगाई दर मार्च में 14.55 प्रतिशत पर पहुंच गई। इससे पहले ये इस साल फरवरी में 13.11 प्रतिशत पर थी।
पटवारी ने कहा कि कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) आधारित रिटेल महंगाई दर मार्च में बढ़कर 6.95 प्रतिशत हो गई। इसी प्रकार खाने-पीने के सामान की महंगाई 5.85 प्रतिशत से बढ़कर 7.68 प्रतिशत हो गई है। पटवारी ने कहा कि प्रदेश सरकार दूरदर्शिता दिखाए और जनता को तत्काल बिजली संकट और महंगाई से राहत पहुंचाए।
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पूर्व मंत्री और कांग्रेस विधायक जीतू पटवारी ने कहा कि मध्यप्रदेश में बिजली का संकट गहरा गया है। गांवों में 10 घंटे तक बिजली नहीं आ रही है और शहरी क्षेत्र में भी बिजली कटौती जारी है। एमपी पावर मैनेजमेंट कंपनी ने 22,000 मेगावाट बिजली का एग्रीमेंट किया है, लेकिन जितनी खपत है, उतनी बिजली भी नहीं मिल रही। शिवराज सरकार की अदूरदर्शिता से प्रदेश में अंधेरा व्याप्त है। वहीं मुख्यमंत्री के कार्यक्रमों में भी बिजली गुल हो रही है। बिजली संकट भयावह है, सरकार स्थिति को जल्द संभाले। प्रदेश को 12 हजार मेगावाट बिजली की जरूरत है, जबकि उपलब्धता मात्र 10 हजार मेगावाट है।
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पटवारी ने कहा कि जहां कमलनाथ सरकार में 100 रू. में 100 यूनिट बिजली मिलती थी और बिजली का किसी तरह का संकट नहीं था। वहीं शिवराज सिंह चौहान सरकार ने प्रदेश को अंधेरे में धकेल दिया है। प्रदेश में अंधेर नगरी मामा राजा के हालात पैदा हो गए हैं।
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पटवारी ने कहा कि प्रदेश की जनता यह भी जानती है कि मध्यप्रदेश में भाजपा सरकार की लापरवाही से कोयले का संकट लंबे समय से बना हुआ है। यही कारण है कि आज प्रशासन अकादमी में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के संबोधन के दौरान और भाजपा अध्यक्ष वीडी शर्मा की पत्रकार वार्ता के पूर्व लंबे समय तक बिजली कटौती होना प्रदेश में बिजली संकट की स्थिति बयां करता है।
पटवारी ने दूसरे मुद्दों पर कहा कि मार्च में खाने-पीने की चीजों की थोक महंगाई दर 8.47 प्रतिशत से बढ़कर 8.71 प्रतिशत पर आ गई है। वहीं प्राइमरी आर्टिकल्स की थोक महंगाई दर भी फरवरी 13.39 प्रतिशत से बढ़कर 15.54 प्रतिशत पर आ गई है। उधर, ईंधन और बिजली की थोक महंगाई दर भी फरवरी के 31.50 प्रतिशत से बढ़कर 34.52 प्रतिशत पर आ गई है।
उन्होंने कहा कि खाने-पीने के सामान, ईंधन और बिजली के दाम में इजाफा होने से थोक महंगाई मार्च में लगातार 12वें महीने डबल डिजिट में बनी हुई है। थोक मूल्य सूचकांक आधारित (WPI) महंगाई दर मार्च में 14.55 प्रतिशत पर पहुंच गई। इससे पहले ये इस साल फरवरी में 13.11 प्रतिशत पर थी।
पटवारी ने कहा कि कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) आधारित रिटेल महंगाई दर मार्च में बढ़कर 6.95 प्रतिशत हो गई। इसी प्रकार खाने-पीने के सामान की महंगाई 5.85 प्रतिशत से बढ़कर 7.68 प्रतिशत हो गई है। पटवारी ने कहा कि प्रदेश सरकार दूरदर्शिता दिखाए और जनता को तत्काल बिजली संकट और महंगाई से राहत पहुंचाए।
