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Panna: पन्ना फील्ड डायरेक्टर ने सेना और न्यायपालिका की छवि धूमिल की, सीएम डॉ. मोहन से शिकायत, जानें मामला
Sat, 13 Jan 2024 08:48 PM IST
अर्पित याज्ञनिक
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पन्ना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पन्ना
Published by: अर्पित याज्ञनिक
Updated Sat, 13 Jan 2024 08:48 PM IST
सार
लोगों में न्यायपालिका और सेना के लिए बहुत सम्मान है। इसलिए निशुल्क सुविधा की अक्षेपा किसी विशेष प्रकरण में संभव हो सकता है न कि समूची न्यायपालिका और सेना पर उंगली उठे।
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टाइगर सफारी
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
वन विभाग के एक अधिकारी के सेना और न्यायपालिका के लोगों की छवि धूमिल करने के मामले में सीएम डॉ. मोहन यादव को शिकायत की है। इसमें उन्होंने मामले की जांच कर कार्रवाई की मांग की है।
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मध्य प्रदेश के पन्ना टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर बृजेंद्र झा के प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्य प्राणी) को लिखे पत्र पर वाइल्ड लाइफ एक्टिविस्ट अजय दुबे ने सीएम डॉ. मोहन यादव को शिकायत की है। यह पत्र पुराना है, लेकिन अभी सामने आया है। इस पत्र में फील्ड डायरेक्टर बृजेंद्र झा ने सुझाव दिया है कि वन्य प्राणी संरक्षण नियम 1974 की धारा 34 में पार्क सफारी के लिए न्यायपालिका, सेना, पुलिस और प्रशासन के लोगों के लिए निशुल्क सफारी का प्रावधान शामिल किया जाए।
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इसको लेकर उन्होंने तर्क दिया कि यह लोग नि:शुल्क पार्क सफारी की अपेक्षा रखते हैं। इस पर वाइल्ड लाइफ एक्टिविस्ट अजय दुबे ने आपत्ति जताते हुए सेना और न्यायपालिका का अपमान बताया है। उन्होंने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में कहा कि फील्ड डायरेक्टर बृजेंद्र झा का आरोप बेहद गंभीर है। उनके आरोप से सेना और न्यायपालिका की छवि धूमिल होती है। उन्होंने अपनी शिकायत में फील्ड डायरेक्टर के पत्र की जांच और आवश्यक कार्रवाई की मांग की है।
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उन्होंने लिखा कि भारत के लोकतांत्रिक ढांचे में जनता की नजरों में न्यायपालिका और सेना के लिए बहुत सम्मान है। इसलिए निशुल्क सुविधा का अक्षेपा किसी विशेष प्रकरण में संभव हो सकता है न कि समूची न्यायपालिका और सेना पर उंगली उठे। भारत की जनता के समक्ष सेना और न्यायपालिका के विषय में इस तरह के आधारहीन आरोप से उनका मनोबल गिरेगा। झा के पत्र से समूचा प्रशासन और पुलिस भी कठघरे में है। उन्होंने लिखा कि विधि अनुसार उचित होता कि फील्ड डायरेक्टर बृजेंद्र झा उपरोक्त गंभीर आरोपों के समर्थन में तथ्यात्मक प्रमाणों के साथ विवादास्पद निशुल्क पार्क सफारी की पैरवी करते।
बाघों की सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया
अजय दुबे ने पन्ना टाइगर रिजर्व में प्रबंधन की प्रशासनिक लापरवाही और कमजोर सुरक्षा व्यवस्था से बाघों की रक्षा की गंभीर चुनौतियों को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने लिखा कि रिजर्व के हिनौता गेट में कोर एरिया में विधि विरुद्ध स्थापित जंगल कॉटेज उनकी शिकायत के बाद हटाने के आदेश किए गए, जो 2014 से पदस्थ रहे फील्ड डायरेक्टर ने आदिवासियों के हितों को दरकिनार कर पूंजीपति निजी समूह को दिया था। उन्होंने इस मामले की जांच की मांग की।
झा के पत्र की जांच और आवश्यक कार्रवाई हो
उन्होंने 2008 में पन्ना टाइगर रिजर्व में शिकारियों की सक्रियता का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने लिखा कि नए बाघों के आगमन से पन्ना में पुन: बाघ स्थापित हुए हैं। उन्होंने कुछ दिन पूर्व एक घायल बाघ के शिकारियों के फंदे से बचने की घटना का जिक्र करते हुए गंभीरता से लेने की बात कही।
