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MP News: सहायक आबकारी आयुक्त को हाईकोर्ट से झटका, एकलपीठ के आदेश को खारिज करते हुए निलंबन को सही ठहराया
Wed, 25 May 2022 06:30 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Wed, 25 May 2022 06:30 PM IST
सार
युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि अनावेदक के खिलाफ विभागीय जांच लंबित है। वह एक उच्च अधिकारी है और जांच प्रभावित कर सकता है। युगलपीठ ने सरकार की अपील स्वीकार करते हुए एकलपीठ के आदेश को निरस्त कर दिया है।
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सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
सहायक आबकारी आयुक्त के निलंबन को हाईकोर्ट द्वारा को निरस्त किए जाने के खिलाफ सरकार ने अपील दायर की थी। हाईकोर्ट जस्टिस सुजय पॉल तथा जस्टिस डीडी बंसल की युगलपीठ ने एकलपीठ के आदेश को निरस्त कर दिया है। युगलपीठ ने कहा है कि सिर्फ विभाग को किसी प्रकार की क्षति नहीं होने के आधार पर निलंबन कार्रवाई को खारिज नहीं किया जा सकता है।
सरकार की तरफ से दायर की गई अपील में कहा गया कि जबलपुर में पदस्थ सहायक आबकारी आयुक्त सत्यनारायण दुबे को अनियमितताओं के कारण अगस्त 2021 में निलंबित करते हुए विभागीय जांच के आदेश जारी किए थे। इसके खिलाफ अनावेदक ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका की सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने अप्रैल 2022 में निलंबन के आदेश को निरस्त कर दिया था।
दायर अपील की सुनवाई के दौरान युगलपीठ ने पाया कि एकलपीठ ने सिर्फ इस आधार पर निलंबन आदेश निरस्त किया है कि आवेदन के कृत्य से विभाग को किसी प्रकार की क्षति नहीं हुई है। सिर्फ विभाग को नुकसान नहीं होने के आधार पर निलंबन आदेश निरस्त नहीं किया जा सकता। युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि अनावेदक के खिलाफ विभागीय जांच लंबित है। वह एक उच्च अधिकारी है और जांच प्रभावित कर सकता है। युगलपीठ ने सरकार की अपील स्वीकार करते हुए एकलपीठ के आदेश को निरस्त कर दिया है।
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सरकार की तरफ से दायर की गई अपील में कहा गया कि जबलपुर में पदस्थ सहायक आबकारी आयुक्त सत्यनारायण दुबे को अनियमितताओं के कारण अगस्त 2021 में निलंबित करते हुए विभागीय जांच के आदेश जारी किए थे। इसके खिलाफ अनावेदक ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका की सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने अप्रैल 2022 में निलंबन के आदेश को निरस्त कर दिया था।
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दायर अपील की सुनवाई के दौरान युगलपीठ ने पाया कि एकलपीठ ने सिर्फ इस आधार पर निलंबन आदेश निरस्त किया है कि आवेदन के कृत्य से विभाग को किसी प्रकार की क्षति नहीं हुई है। सिर्फ विभाग को नुकसान नहीं होने के आधार पर निलंबन आदेश निरस्त नहीं किया जा सकता। युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि अनावेदक के खिलाफ विभागीय जांच लंबित है। वह एक उच्च अधिकारी है और जांच प्रभावित कर सकता है। युगलपीठ ने सरकार की अपील स्वीकार करते हुए एकलपीठ के आदेश को निरस्त कर दिया है।
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