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MP News: कल से शुरू हो जाएगा खरमास; नहीं होंगे शुभ कार्य, भूलकर भी तुलसी के पास न रखें ये चीजें

Fri, 15 Dec 2023 03:40 PM IST
अर्पित याज्ञनिक न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सिहोर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सिहोर Published by: अर्पित याज्ञनिक Updated Fri, 15 Dec 2023 03:40 PM IST
सार

16 दिसंबर से धनु संक्रांति (मलमास/खरमास) होने के कारण विवाह मुहूर्त निषेध रहेंगे। खरमास की अवधि बीत जाने के उपरांत दिनांक 25 जनवरी 2024 के बाद ही शुभ विवाह मुहूर्त बनेंगे।

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MP News: Kharmas will start from tomorrow, no auspicious work will happen
पंडित गणेश शर्मा। - फोटो : Amar Ujala Digital

विस्तार

हिन्दू धर्म में देवप्रबोधिनी (देवउठनी) एकादशी के साथ ही विवाह इत्यादि मांगलिक कार्यों का प्रारंभ हो जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार विवाह लग्न की शुद्धि में शुभ-मुहूर्त का विशेष महत्व होता है। शास्त्रानुसार देवशयनी एकादशी से देवप्रबोधिनी एकादशी तक चार माह विवाह का निषेध होता है, किंतु केवल इन चार महीनों में ही विवाह का निषेध नहीं होता अपितु गुरु-शुक्रास्त, खरमास, होलिकाष्टक एवं पौष मास की अवधि में भी विवाह वर्जित होता है।

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ज्योतिष पदम भूषण स्वर्ण पदक प्राप्त ज्योतिषाचार्य डॉ. पंडित गणेश शर्मा ने बताया कि इस वर्ष देवप्रबोधिनी एकादशी दिनांक 23 नवंबर 2023 को मनाई गई थी। देव उठनी एकादशी से विवाह होना प्रारंभ हो गए, किंतु 16 दिसंबर 2023 से धनु संक्रांति (मलमास/खरमास) होने के कारण पुन: विवाह मुहूर्त का निषेध रहेगा। दिनांक 16 दिसंबर 2023, दिन शनिवार से मलमास/खरमास का प्रारंभ हो जाएगा, जो 14 जनवरी 2024 तक रहेगा।
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इस अवधि के अतिरिक्त दिनांक 27 दिसंबर से 2023, दिन बुधवार से पौष मास का प्रारंभ होगा, जो दिनांक 25 जनवरी 2024 तक रहेगा। पौष मास में भी विवाह मुहूर्त का निषेध होता है। अत: देवप्रबोधिनी एकादशी से 16 दिसंबर 2023 तक ही विवाह मुहूर्त बनेंगे। इसके तत्पश्चात मलमास एवं खरमास की अवधि बीत जाने के उपरांत दिनांक 25 जनवरी 2024 के बाद ही शुभ विवाह मुहूर्त बनेंगे। ज्योतिष शास्त्रानुसार 16 दिसंबर 2023 से 25 जनवरी 2024 की अवधि में विवाह मुहूर्त वर्जित रहेंगे।
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तुलसी से दूर रखें ये चीजें
पंडित गणेश शर्मा के अनुसार खरमास में 16 दिसंबर 2023 शनिवार को सूर्य का धनु राशि में गोचर होगा। तभी से खरमास यानी मलमास प्रारंभ हो जाएगा। खरमास में किसी भी तरह का कोई मांगलिक कार्य जैसे विवाह, यज्ञोपवीत, गृह प्रवेश, मकान निर्माण, नया व्यापार या किसी भी तरह का कोई भी संस्कार नहीं करते हैं। इसी के साथ ही कई तरह के नियमों का पालन करते हैं, जिसमें तुलसी के नियम भी होते हैं।

विष्णु और माता लक्ष्मी की विशेष पूजा
खरमास में श्री हरि विष्णु और माता लक्ष्मी की विशेष पूजा होती है। तुलसी को माता लक्ष्मी का ही रूप माना जाता है। जब तक तुलसी की पूजा नहीं होती, तब तक श्री हरि विष्णु की पूजा पूरी नहीं मानी जा सकती है। मंगलवार, रविवार और एकादशी को छोड़कर कभी भी तुलसी को जल अर्पित कर सकते हैं, लेकिन खरमास के दौरान तुलसी पूजा में भूलकर भी ये गलती न करें।

सत्यनारायण की षोडश पूजा करें
धनु संक्रांति पर भगवान सत्यनारायण की पूजा की जाती है। इस दिन भगवान सत्यनारायण की षोडश पूजा करें। इसी के साथ ही तुलसी पूजा भी करते हैं। तुलसी माता को जल अर्पण करें और उनकी पूजा करें। मंगलवार, रविवार और एकादशी के दिन तुलसी के पौधे को भूलकर भी नहीं छूएं और न ही जल अर्पण करें। इससे माता लक्ष्मी रूष्ठ हो जाती हैं।


सिंदूर या कोई पूजन सामग्री न चढ़ाएं
खरमास के दिनों में भूलकर भी तुलसी के ऊपर सिंदूर या कोई पूजन सामग्री न चढ़ाएं। इसका नकारात्मक असर पड़ सकता है। इसी के साथ ही दूर्वा भी न चढ़ाएं इससे माता लक्ष्मी रूष्ठ होती हैं। खरमास में तुलसी को जल दान, दीपदान और धूपदान दे सकते हैं। बाकी अन्य किसी भी प्रकार की पूजा नहीं कर सकते हैं।

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