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Lok Sabha Poll: काम मुद्राओं वाली प्रतिमाओं के रहस्य समेटे सीट पर BJP की जीत पर नजर, दूसरे के कंधे पर कांग्रेस
Thu, 25 Apr 2024 08:17 AM IST
उदित दीक्षित
पुनीत शर्मा
पुनीत शर्मा
Published by: उदित दीक्षित
Updated Thu, 25 Apr 2024 08:17 AM IST
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मध्य प्रदेश की खजुराहो सीट पर चुनावी मुद्दे क्या।
- फोटो :
अमर उजाला
विस्तार
कभी चंदेलों के शासन वाले खजुराहो में ऐसे सुंदर मंदिर हैं, जो दुनियाभर के पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। इनमें काम मुद्राओं वाली प्रतिमाओं के रहस्य जानने को शोध होते रहते हैं, लेकिन इस इलाके के मतदाताओं के मन को जानना आसान नहीं है। खजुराहो लोकसभा सीट भाजपा और कांग्रेस के हिस्से में आती-जाती रही है। हालांकि, प्रभाव भाजपा का ज्यादा रहा है। भाजपा ने मौजूदा सांसद और प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा को मैदान में उतारा है। वहीं, विपक्षी गठबंधन को मीरा यादव का नामांकन रद्द होने से तगड़ा झटका लगा। मजबूरी में उसे ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक के उम्मीदवार रिटायर्ड आईएएस अफसर राजा भैया को समर्थन देना पड़ा है। वहीं, बसपा ने कमलेश पटेल को अपना प्रत्याशी बनाया है।लोगों का कहना है कि बसपा मजबूती के साथ चुनाव लड़ रही है। भाजपा यहां लगातार पांचवीं जीत के लिए जोर लगा रही है। पन्ना निवासी वरिष्ठ पत्रकार सुरेश पांडेय का कहना है कि मीरा का नामांकन खारिज होने के बाद भाजपा के लिए यह सीट बेहद आसान हो गई है। अगर, बसपा का वोट और उनके समाज का वोट नहीं बंटा तो मुकाबला रोचक हो सकता है। खजुराहो के विपिन कुमार कहते हैं कि यहां तो कोई चुनाव ही नहीं रहा, चुनाव तो दो पार्टियों के बीच ही होता है।
पानी बिन सब सून
खजुराहो की विधानसभा राजनगर के गांव चौबर के चौराहे पर युवा इस बात में उलझे दिखे कि चुनाव बचा कहां है। मोनू पटेल बोले, अगर गठबंधन का प्रत्याशी होता तो चुनाव दिखता। अब तो एक तरफा सा लग रहा है। इस पर भवानीदीन पटेल बोले-कोई भी जीते, होने वाला कुछ नहीं। दूर से पानी ढोकर लाने वाली महिलाओं की तरफ इशारा करते हुए कहते हैं, क्या यह विकास है। पानी तक तो दे नहीं पा रहे। आठ हैंडपंप गांव में हैं, सभी खराब पड़े हैं। कर्मवीर ने ओलावृष्टि से तबाह फसलों का जिक्र करते हुए कहा कि आठ बीघा चना चौपट हो गया। गेहूं में कुछ बचा नहीं। क्या ये लोग किसानों के जख्मों पर मरहम लगा सकते हैं। इस बीच, विपिन कुमार कहते हैं, गांव में देख लो कितने बेरोजगार हैं। अस्पताल भी पांच किमी दूर है। गांव चौबर से 12 किमी दूर राजनगर में चौराहे पर विवेक की चाय की दुकान पर लोगों की भीड़ थी। यहां खड़े कामता प्रसाद ने बताया कि किसे वोट देना है, परिवार के लोग मिलकर तय कर लेते हैं, लेकिन बताते किसी को नहीं। वोटर अब जागरूक है। सांसदी-विधायकी तो छोड़िए, अब तो प्रधानी के चुनाव में भी पता नहीं चलता कौन जीत रहा है।
खेती में नुकसान और बिजली मुद्दा
राजनगर के बाद पहुंचे सिंहपुर गांव। यहां जूनियर हाईस्कूल में बने मतदान केंद्र का निरीक्षण करने के लिए अफसर आए हुए थे। नौजवानों का भी जमघट था। अफसर ग्रामीणों से कह रहे थे कि वोट डालने जरूर जाना। इस पर गांव के पप्पू खान, भोला प्रसाद, कफीला खान और होता सिंह कहने लगे, किसान बहुत दुखी है। बरसात और ओलावृष्टि ने फसलों को तबाह कर दिया है। लेखपाल कुछ ही किसानों का नुकसान बता रहे हैं, जबकि गांव में हर काश्तकार की फसल चौपट हो गई है। पप्पू खान ने कहा, तहसील की टीम आई थी। जो उनकी दावत पानी कर दे रहा था, उसका नुकसान बता रहे थे, बाकी किसी के खेत पर गए तक नहीं। किसानों ने चर्चा के बीच बिजली का मुद्दा भी छेड़ दिया। कमल कुमार कहने लगे कि बिजली 20 घंटे देने की बात कही जाती है, लेकिन आती है पांच से छह घंटे। किसान फसलों की सिंचाई करें भी तो कैसे। पास खड़े बुजुर्ग सुशील कुमार कहने लगे कि मोदी लहर है। प्रत्याशी को तो कोई देख ही नहीं रहा।
बस नाम बड़ा, सुविधाएं कुछ नहीं
खजुराहो से तकरीबन 40 किमी दूर बसा पन्ना खूबसूरत शहर है। इसकी सबसे बड़ी पहचान हीरे की खदान हैं। प्रशासन हर साल 20 पट्टे देता है। यहां लोग पट्टे लेकर इस उम्मीद में खोदाई करते हैं कि उन्हें भी हीरा मिलेगा। तमाम लोगों की किस्मत पन्ना में निकलने वाले हीरे से चमक भी चुकी है, लेकिन दिक्कतें भी खूब हैं। पन्ना के कटरा बाजार में चाय की दुकान पर मौजूद खजूरी कुडार के छोटू कहते हैं कि इससे बड़ी बात क्या होगी कि पन्ना में आज तक ट्रेन नहीं है। यहां के लोगों को अगर ट्रेन पकड़नी होती है, तो खजुराहो या सतना जाते हैं। पन्ना शहर निवासी विमल कुमार, जाकिर, कैलाश बताते हैं कि पन्ना का नाम ही बड़ा है, सुविधाएं नहीं हैं। रोजगार नहीं मिलता। अच्छे अस्पताल नहीं हैं। यही वजह है कि लोग चुनाव में दिलचस्पी नहीं दिखाते।
