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मप्र हाईकोर्ट: चार किमी दूर स्कूल स्थानांतरण पर हाई कोर्ट सख्त, सरकार से मांगा जवाब

Tue, 13 Oct 2026 09:42 PM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ग्वालियर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ग्वालियर Published by: दिनेश शर्मा Updated Tue, 13 Oct 2026 09:42 PM IST
सार

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने स्कूल स्थानांतरण के कारण बच्चों को चार किलोमीटर दूर पढ़ने जाने के मामले में सरकार से दो दिन में अतिरिक्त जवाब मांगा है। अदालत ने स्थानांतरण नीति और संबंधित दस्तावेज पेश करने के निर्देश दिए। मामले की अगली सुनवाई 16 अक्टूबर को होगी।

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mp high court school transfer four km distance government response
मप्र हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने प्रदेश में स्कूल स्थानांतरण के बाद छोटे बच्चों को पढ़ाई के लिए करीब चार किलोमीटर दूर जाने पर मजबूर करने के मामले पर कड़ा रुख अपनाया है। न्यायमूर्ति जीएस अहलूवालिया और न्यायमूर्ति अनुराधा शुक्ला की पीठ ने राज्य सरकार से दो दिन के भीतर अतिरिक्त जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने सरकार को स्कूल स्थानांतरण से संबंधित सभी दस्तावेज और नीतियां पीठ के सामने प्रस्तुत करने का आदेश दिया है। इस मामले की अगली सुनवाई 16 अक्तूबर को होगी।
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स्थानांतरण से जुड़ा मांगा रिकॉर्ड
न्यायालय रसल जाटव की याचिका पर सुनवाई कर रहा है। सोमवार को सुनवाई के समय राज्य शासन की ओर से उपस्थित अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि पूर्व में अतिरिक्त जवाब देने के लिए चार सप्ताह की मोहलत मांगी गई थी। हालांकि, सरकार ने स्कूल शिफ्ट करने के फैसले के पीछे मौजूद नीति और उससे जुड़े समस्त दस्तावेज अदालत के समक्ष प्रस्तुत करने के लिए दो दिन का समय मांगा। पीठ ने सरकार के अनुरोध को स्वीकार करते हुए अतिरिक्त जवाब और स्थानांतरण से जुड़ा पूरा रिकॉर्ड पेश करने के आदेश दिए। अब आगामी सुनवाई में सरकार को यह साबित करना होगा कि निर्णय लेते समय बच्चों की शिक्षा और विद्यालय तक आसान पहुंच संबंधी कानूनी नियमों का पालन हुआ था या नहीं।
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शिक्षा का अधिकार अधिनियम का उल्लंघन
याचिकाकर्ता ने अदालत के सामने शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 के प्रावधानों को रेखांकित किया। इन प्रावधानों के अनुसार प्राथमिक कक्षाओं के विद्यार्थियों के लिए एक किलोमीटर और कक्षा छह से आठ तक के बच्चों के लिए तीन किलोमीटर की पैदल दूरी के भीतर विद्यालय उपलब्ध होना चाहिए। याचिका में आपत्ति जताई गई कि विद्यालय स्थानांतरण के कारण बच्चों को चार किलोमीटर दूर जाना पड़ रहा है, जो सीधे तौर पर नियमों के विपरीत है। अदालत ने सरकार से स्पष्टीकरण मांगा है कि स्थानांतरण का फैसला लेते समय इस कानून के इन नियमों पर विचार किया गया था या नहीं।

जर्जर भवनों पर भी मांगा था जवाब
हाई कोर्ट ने इससे पहले हुई सुनवाई में भी प्राथमिक विद्यालयों के जर्जर भवनों और उनकी मरम्मत न होने को लेकर राज्य सरकार को जवाब तलब किया था। अब विद्यालय स्थानांतरण से जुड़े सभी महत्वपूर्ण दस्तावेज अदालत में आने के बाद सरकार के निर्णय तथा उसके आधार की गहन न्यायिक जांच होगी। आगामी 16 अक्तूबर को होने वाली सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से दाखिल जवाब और प्रस्तुत दस्तावेज के आधार पर मामले की आगे की दिशा तय होगी।
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