फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   indore high court traffic system road condition 311 app complaints

इंदौर: ट्रैफिक और जर्जर सड़कों पर हाईकोर्ट ने जताई कड़ी नाराजगी, कहा- शिकायतें तो दर्ज हो रही, समाधान कहां है?

Tue, 13 Oct 2026 07:12 PM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: दिनेश शर्मा Updated Tue, 13 Oct 2026 07:12 PM IST
सार

इंदौर हाईकोर्ट ने शहर की बदहाल सड़कों, बिगड़ती यातायात व्यवस्था और लंबित शिकायतों पर नगर निगम सहित संबंधित विभागों को फटकार लगाई। अदालत ने कहा कि 311 एप पर शिकायत दर्ज करना पर्याप्त नहीं, समाधान जरूरी है। सुनवाई में ट्रैफिक सिग्नल समन्वय, पुलिसकर्मियों की कमी और पार्किंग की समस्याएं भी उठीं।

विज्ञापन
indore high court traffic system road condition 311 app complaints
इंदौर के बिगड़ते ट्रैफिक पर हाईकोर्ट ने फटकार लगाई है। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ ने शहर की बिगड़ती यातायात व्यवस्था, जर्जर सड़कों और पुराने अदालती आदेशों के पालन में हो रही देरी पर नगर निगम समेत संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर गहरी नाराजगी जताई है। न्यायमूर्ति सुबोध अभ्यंकर और न्यायमूर्ति जय कुमार पिल्लई की पीठ ने सुनवाई के दौरान तीखी टिप्पणी करते हुए पूछा कि केवल 311 एप पर शिकायतें दर्ज करना ही काफी नहीं है, धरातल पर उनका समाधान कहां है?
विज्ञापन


राजलक्ष्मी फाउंडेशन की ओर से वर्ष 2019 से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने यातायात सुधार, विभागों के बीच तालमेल और अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के मुद्दों पर विचार-विमर्श किया। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अजय बागड़िया और शिरीन सिलावट ने अदालत के सामने यातायात प्रबंधन, पुलिसबल की कमी और अव्यवस्थित बुनियादी ढांचे का पूरा ब्योरा रखा।
विज्ञापन


ये भी पढ़ें- देवास जाने वाला मुख्य मार्ग बंद, 25 कर्मचारी दिन रात संभाल रहे ट्रैफिक, जाम से हजारों वाहन चालक परेशान
विज्ञापन
विज्ञापन


सिग्नलों में समन्वय का अभाव और खाली पद
अदालत को अवगत कराया गया कि इंदौर शहर में कुल 92 ट्रैफिक सिग्नल कार्यरत हैं। इनमें से 58 स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत और 34 नगर निगम के प्रशासनिक नियंत्रण में हैं। हालांकि केवल 28 सिग्नल ही इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (आईटीएमएस) से जुड़ पाए हैं। अलग-अलग निकायों के अधीन संचालित होने से सिग्नलों में आपसी तालमेल नहीं रहता, जिससे वाहन चालकों को बार-बार रुकना पड़ता है और चौराहों पर जाम लगता है।

881 पद, केवल 660 पुलिसकर्मी उपलब्ध
यातायात पुलिस में स्वीकृत 881 पदों के मुकाबले केवल 660 पुलिसकर्मी उपलब्ध हैं, यानी 221 पद खाली पड़े हैं। इस जनशक्ति की कमी से व्यस्त चौराहों पर यातायात नियंत्रित करना कठिन हो गया है। समस्या के समाधान के लिए शहर के करीब 40 प्रमुख प्रवेश मार्गों पर स्वचालित हाइड्रोलिक बैरियर लगाने का प्रस्ताव दिया गया। वर्तमान में इन प्रवेश द्वारों पर भारी वाहनों की आवाजाही रोकने के लिए तैनात 140 से 170 पुलिसकर्मियों को उस ड्यूटी से मुक्त कर शहर के भीतर प्रमुख चौराहों पर लगाया जा सकता है।

एप पर शिकायत के बजाय समाधान पर जोर
सड़कों पर गड्ढों और बदहाली का विषय उठने पर नगर निगम ने 311 एप पर शिकायत दर्ज कराने की बात कही। इस पर अदालत ने सख्त लहजे में कहा कि एप पर शिकायत दर्ज होना पर्याप्त नहीं है, वास्तविक कार्रवाई और समय पर मरम्मत होना जरूरी है। अदालत ने निगम से प्राप्त, निस्तारित और लंबित शिकायतों का पूरा ब्योरा प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।


विजय नगर चौराहे से देवास नाका तक निर्माणाधीन फ्लाईओभर के कारण सड़क का बड़ा हिस्सा खोदकर बैरिकेडिंग कर दिया गया है। निर्माण कार्य शुरुआती चरण में होने के बावजूद उचित वैकल्पिक मार्ग और सर्विस रोड न होने से कंकड़, पत्थर और उड़ती धूल के बीच दोपहिया वाहन चालकों के लिए दुर्घटना का जोखिम बढ़ गया है। इसके अतिरिक्त, इंदौर में केवल 26 चिह्नित पार्किंग स्थल हैं, जबकि नागपुर में 51, कानपुर में 42 और लखनऊ में 62 स्थल उपलब्ध हैं। सीमित स्थान से सड़कों पर अवैध पार्किंग बढ़ रही है।

एकल समन्वय अधिकारी और विस्तृत कार्ययोजना का प्रस्ताव
सुनवाई के दौरान विभागों के बीच बेहतर तालमेल और अदालती आदेशों के पालन के लिए अतिरिक्त महाधिवक्ता राहुल सेठी को एकल समन्वय एवं पर्यवेक्षण अधिकारी नियुक्त करने का सुझाव दिया गया। प्रस्ताव के अनुसार सभी विभाग उन्हें दैनिक प्रगति रिपोर्ट सौंपेंगे, जिसमें पूरे हुए कार्य, लंबित समस्याएं, बाधाएं और समाधान की समयसीमा दर्ज होगी। विभागों को आपसी समन्वय से विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर अदालत में पेश करने के लिए 21 दिन का समय देने का अनुरोध भी किया गया।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed