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शहडोल में बच्चों की मौत का मामला: स्वास्थ्य मंत्री पहुंचे जिला अस्पताल, सीएमएचओ-सीएस को हटाया
Wed, 09 Dec 2020 04:18 PM IST
अनिल पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: अनिल पांडेय
Updated Wed, 09 Dec 2020 04:18 PM IST
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स्वास्थ्य मंत्री प्रभुराम चौधरी
- फोटो : सोशल मीडिया
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शहडोल में 18 मासूमों की जान जाने के बाद आखिर सरकार और प्रशासन की नींद खुल गई और बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं की सुध ली। स्वास्थ्य मंत्री प्रभुराम चौधरी ने मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. राजेश पाण्डे और सिविल सर्जन डॉ. व्ही एस बारिया को मौके से ही तत्काल हटाने का आदेश दिया।
स्वास्थ्य मंत्री ने पहले तो डॉक्टरों को क्लीन चिट दे दी थी, लेकिन समीक्षा की बैठक के बाद उन्होंने एक्शन लेते हुए सीएमएचओ और सीएस को हटाने के निर्देश दिए। बताया जा रहा है कि सागर से किसी डॉक्टर को सीएमएचओ बनाकर भेजा जा रहा है। वहीं, सीएस के लिए कई नामों की चर्चा चल रही है।
स्वास्थ्य मंत्री प्रभुराम चौधरी ने समीक्षा की बैठक से पहले मीडिया से बात की। उन्होंने कहा कि बच्चों की मौत बेहद दुखद है, लेकिन जिला अस्पताल के डॉक्टरों ने उनके अपचार में कोई कमी रहने नहीं दी थी। बच्चों की मौत अलग-अलग कारणों के चलते हुई है। इसका मुख्य कारण यह है कि अभिवावकों ने ही बच्चों को लाने में देरी कर दी।
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वहीं, एनएचएम के एमडी छवि भारद्वाज का बयान स्वास्थय मंत्री से बिल्कुल उलट है। उनका कहना है कि जमीनी स्तर पर अस्पताल में व्यवस्था ठीक नहीं है। नवजात शिशु को रिस्क पीरियड से निकालने के लिए बदलाव की जरूरत है। सभी एमओ को निर्देश दिए गए हैं वह इस अस्पताल के लिए मरीजों को रैफर न करें।
मंगलवार को भी एक ऐसी घटना घटी जो स्वास्थ्य मंत्री प्रभुराम चौधरी के उस बयान से बिल्कुल अलग थी, जिसमें वह अभिवावकों की गलती बता रहे थे। दरअसल, अमलाई के रहने वाले मनोज अपने बच्चे के साथ अस्पताल आए थे। वहां एक स्टाफ ने एमडी दौरे पर आई हैं, बाद में आना कहकर मनोज को वहां से भगा दिया। ऐसे में चार महीने के बच्चे को समय पर इलाज न मिला और उसकी मौत हो गई। इस घटना से अस्पताल में लापरवाही का मामला भी सामने आया है।
समीक्षा की बैठक में स्वास्थ्य मंत्री प्रभुराम चौधरी ने शहडोल के घटनाक्रम का पूरा जायजा लिया और इस पर चर्चा की। इसके बाद एसएचओ और सीएस को हटाने के आदेश दिए। बैठक में यह बात भी सामने निकलकर आई है कि 12 दिनों में 18 बच्चों की मौत हो चुकी है। स्वास्थ्य मंत्री के आज जायजा लेने पर इस बात का खुलासा हुआ, शहडोल जिला अस्पताल प्रबंधन ने 5 बच्चों की मौत का आंकड़ा भी छिपाने की कोशिश की है।
शहडोल के जिला अस्पताल में 26 नवंबर से लेकर अब तक 111 बच्चे भर्ती हो चुके हैं। जिनमें से अब तक 18 बच्चों की मौत हो चुकी है। इस अस्पताल में बीते 8 महीनों में 362 बच्चों की मौत हो चुकी है। जिला अस्पताल में औसतन रोज 1 बच्चे की मौत हो रही है। अस्पताल नर्सों के भरोसे जिले कम्यूनिटी हेल्थ सेंटर के भरोसे चल रहा है। अस्पताल कुल 7 सीएचए हैं और इनमें से एक विशेषज्ञ नहीं है।
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स्वास्थ्य मंत्री ने पहले तो डॉक्टरों को क्लीन चिट दे दी थी, लेकिन समीक्षा की बैठक के बाद उन्होंने एक्शन लेते हुए सीएमएचओ और सीएस को हटाने के निर्देश दिए। बताया जा रहा है कि सागर से किसी डॉक्टर को सीएमएचओ बनाकर भेजा जा रहा है। वहीं, सीएस के लिए कई नामों की चर्चा चल रही है।
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स्वास्थ्य मंत्री प्रभुराम चौधरी ने समीक्षा की बैठक से पहले मीडिया से बात की। उन्होंने कहा कि बच्चों की मौत बेहद दुखद है, लेकिन जिला अस्पताल के डॉक्टरों ने उनके अपचार में कोई कमी रहने नहीं दी थी। बच्चों की मौत अलग-अलग कारणों के चलते हुई है। इसका मुख्य कारण यह है कि अभिवावकों ने ही बच्चों को लाने में देरी कर दी।
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वहीं, एनएचएम के एमडी छवि भारद्वाज का बयान स्वास्थय मंत्री से बिल्कुल उलट है। उनका कहना है कि जमीनी स्तर पर अस्पताल में व्यवस्था ठीक नहीं है। नवजात शिशु को रिस्क पीरियड से निकालने के लिए बदलाव की जरूरत है। सभी एमओ को निर्देश दिए गए हैं वह इस अस्पताल के लिए मरीजों को रैफर न करें।
मंगलवार को भी एक ऐसी घटना घटी जो स्वास्थ्य मंत्री प्रभुराम चौधरी के उस बयान से बिल्कुल अलग थी, जिसमें वह अभिवावकों की गलती बता रहे थे। दरअसल, अमलाई के रहने वाले मनोज अपने बच्चे के साथ अस्पताल आए थे। वहां एक स्टाफ ने एमडी दौरे पर आई हैं, बाद में आना कहकर मनोज को वहां से भगा दिया। ऐसे में चार महीने के बच्चे को समय पर इलाज न मिला और उसकी मौत हो गई। इस घटना से अस्पताल में लापरवाही का मामला भी सामने आया है।
समीक्षा की बैठक में स्वास्थ्य मंत्री प्रभुराम चौधरी ने शहडोल के घटनाक्रम का पूरा जायजा लिया और इस पर चर्चा की। इसके बाद एसएचओ और सीएस को हटाने के आदेश दिए। बैठक में यह बात भी सामने निकलकर आई है कि 12 दिनों में 18 बच्चों की मौत हो चुकी है। स्वास्थ्य मंत्री के आज जायजा लेने पर इस बात का खुलासा हुआ, शहडोल जिला अस्पताल प्रबंधन ने 5 बच्चों की मौत का आंकड़ा भी छिपाने की कोशिश की है।
शहडोल मुख्यचिकित्सा अधिकारी(सी॰एम॰एच॰ओ॰) डॉक्टर राजेश पांडे और सिविल सर्जन डॉक्टर व्ही एस बारिया पर कार्यवाही करते हुए हटाने के निर्देश दिए गए है ॥#drprabhuramchoudhary pic.twitter.com/LqITx1Uaah
— Dr. Prabhuram Choudhary (@DrPRChoudhary) December 8, 2020
शहडोल के जिला अस्पताल में 26 नवंबर से लेकर अब तक 111 बच्चे भर्ती हो चुके हैं। जिनमें से अब तक 18 बच्चों की मौत हो चुकी है। इस अस्पताल में बीते 8 महीनों में 362 बच्चों की मौत हो चुकी है। जिला अस्पताल में औसतन रोज 1 बच्चे की मौत हो रही है। अस्पताल नर्सों के भरोसे जिले कम्यूनिटी हेल्थ सेंटर के भरोसे चल रहा है। अस्पताल कुल 7 सीएचए हैं और इनमें से एक विशेषज्ञ नहीं है।
