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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   MP Govt Floor Test: senior congress leaders and lawyers advising to CM Kamal Nath

सरकार बचाने के लिए वैधानिक कदम उठाएंगे कमलनाथ, कांग्रेस के दिग्गज नेताओं ने संभाली कमान

Tue, 17 Mar 2020 04:24 PM IST
Harendra Chaudhary शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली
शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Tue, 17 Mar 2020 04:24 PM IST
सार

  • कांग्रेस नेता, पूर्व राज्यसभा सदस्य और वरिष्ठ वकील विवेक तन्खा कमलनाथ को दे रहे कानूनी सलाह
  • सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की कानूनी राय के आधार पर आगे बढ़ रही है भाजपा
  • विधानसभा की कार्यवाही 26 मार्च तक स्थगित होने के बाद भाजपा विधायकों को गुड़गांव भेजने का फैसला

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MP Govt Floor Test: senior congress leaders and lawyers advising to CM Kamal Nath
कमलनाथ-लालजी टंडन - फोटो : ANI (File)

विस्तार

वरिष्ठ कांग्रेसी नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा है कि रविवार को मध्यप्रदेश के राज्यपाल लालजी टंडन द्वारा मुख्यमंत्री कमलनाथ को बहुमत परीक्षण के लिए लिखी गई चिट्ठी असंवैधानिक थी। इसके उत्तर में सीएम कमलनाथ ने भी राज्यपाल को चिट्ठी लिखकर जवाब दिया है। इसी बीच मंगलवार को भाजपा के बहुमत परीक्षण कराने के निर्देश देने वाली याचिका पर उच्चतम न्यायालय ने बुधवार तक के लिए सुनवाई स्थगित कर दी है।

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कांग्रेस के दिग्गज नेताओं ने संभाली कमान

कांग्रेस नेता, पूर्व राज्यसभा सदस्य और वरिष्ठ वकील विवेक तन्खा खासतौर पर कमलनाथ को कानूनी सलाह दे रहे हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी भी पूरे प्रकरण में कमलनाथ के सबसे भरोसेमंद कानूनी सलाहकार के रूप में काम कर रहे हैं।

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भाजपा भी पीछे नहीं

दूसरी ओर केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, नरेंद्र सिंह तोमर, ज्योतिरादित्य सिंधिया, शिवराज सिंह चौहान, वीडी शर्मा, नरोत्तम मिश्रा और कैलाश विजयावर्गीय भी लगातार सक्रिय हैं। भाजपा सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की कानूनी राय के आधार पर आगे बढ़ रहे हैं।


राज्यपाल भी कानूनी सलाह मशविरा करके ही कदम उठा रहे हैं। भाजपा नेताओं ने राज्यपाल के सामने अपने 106 विधायको की परेड कराने के बाद उन्हें वापस हरियाणा लाने की योजना बनाई है।

कांग्रेस पार्टी फिलहाल अपने पत्ते नहीं खोल रही है। अभिषेक मनु सिंघवी का कहना है कि मध्यप्रदेश विधानसभा अध्यक्ष संविधन सम्मत कदम उठाएंगे। समझा जा रहा है कि कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को मंगलवार को उच्चतम न्यायालय में इस मामले पर सुनवाई का इंतजार है।

कैसे करें बहुमत परीक्षण?

कांग्रेस पार्टी का कहना है कि विपक्ष ने न तो विधानसभा में अविश्वास प्रस्ताव दिया है और न ही उसने अपने पास बहुमत होने की जानकारी दी है। फिर कैसे बहुमत साबित करने का फैसला लिया जा सकता है।

सिंघवी का कहना है कि राज्यपाल मुख्यमंत्री को विधानसभा में अपना विश्वास परीक्षण साबित करने के लिए समय और तारीख तय नहीं कर सकते। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्यपाल लालजी टंडन भाजपा के इशारे पर काम कर रहे हैं।



ऐसी चर्चा है कि 26 मार्च तक विधानसभा की कार्यवाही स्थगित होने के बाद भाजपा ने विधायकों को गुड़गांव भेजने का निर्णय लिया है।

क्या हैं विकल्प

विधानसभा अध्यक्ष के पास तीन विकल्प हैं। पहला, वो सरकार का शक्ति परीक्षण करा सकते हैं। दूसरा, वह विधायकों का इस्तीफा मंजूर कर सकते हैं। तीसरा, विधायकों को अयोग्य करार दे सकते हैं।

राज्यपाल लोकतंत्र की मर्यादा की रक्षा का सहारा लेकर अपने संवैधानिक अधिकार का उपयोग कर सकते हैं। वह राज्य सरकार और विधानसभा अध्यक्ष द्वारा जानबूझकर विश्वासमत परीक्षण टालने की कार्रवाई मानते हुए राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफारिश कर सकते हैं।

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