फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Makhanlal Chaturvedi University Hindi Journalism Week Hindi readers and writers have increased internationally Priyanka Om

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हिंदी के पाठक एवं लेखक बढ़े हैं ः  प्रियंका ओम

Tue, 02 Jun 2020 11:52 PM IST
Rohit Ojha न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: Rohit Ojha Updated Tue, 02 Jun 2020 11:52 PM IST
सार

माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय के आयोजन ‘हिन्दी पत्रकारिता सप्ताह’ के अंतर्गत कहानीकार सुश्री प्रियंका ओम ने ‘सृजनात्मक लेखन’ विषय पर अपने विचार रखे, तीन जून को मुंबई से वरिष्ठ क्राइम रिपोर्टर श्री विवेक अग्रवाल ‘वैश्विक आतंकवाद और मीडिया’ विषय पर लाइव होंगे।

विज्ञापन
Makhanlal Chaturvedi University Hindi Journalism Week Hindi readers and writers have increased internationally Priyanka Om
प्रियंका ओम - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

युवा कहानीकार सुश्री प्रियंका ओम ने कहा कि हिंदी कोई नहीं पढ़ता, यही मानसिकता हिंदी के लेखन एवं अध्ययन में सबसे बड़ी बाधा है। यह मानसिकता छोडी होगी। आज हिंदी में पढ़ने का चलन खूब बढ़ गया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हिंदी के पाठक एवं लेखक बढ़े हैं। 

विज्ञापन


माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के ‘हिंदी पत्रकारिता सप्ताह’ के अंतर्गत उन्होंने विश्वविद्यालय के फेसबुक पेज पर तंजानियां से लाइव होकर अपना व्याख्यान दिया। कहानीकार सुश्री प्रियंका ओम ने कहा कि लेखन की भाषा-शैली में लगातार परिवर्तन होता है।
विज्ञापन


आज जिस भाषा-शैली में लिखा जा रहा है, निश्चित ही आने वाले समय में उसमें बदलाव आएगा। कई लोग यह प्रश्न उठाते हैं कि वर्तमान लेखन में अंग्रेजी शब्दों की भरमार है। उनका गैर-जरूरी उपयोग किया जा रहा है। हालांकि, अंग्रेजी के शब्दों का उपयोग पहले भी किया जाता रहा है। उन्होंने कहा कि हमें अपनी मातृभाषा को कमतर नहीं समझना चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन


हिंदी से मुंह मोड़ना एक तरह से अपने भाई-बहनों से मुंह मोड़ने जैसा है। दुनिया के सभी देश अपनी मातृभाषा में गर्व के साथ बात करते हैं। उन्होंने अपना उदाहरण देते हुए बताया कि जब वे तंजानियां पहुंची थी तो शुरुआत के कुछ महीने तो उन्होंने अंग्रेजी में संवाद करके काम चला लिया। लेकिन बाद में वहां के दुकानदार, वाहन चालक एवं अन्य लोग उनकी भाषा सीखने का आग्रह करने लगे। उनका कहना था कि उन्हें अंग्रेजी की अपेक्षा अपनी मातृभाषा में संवाद करना अच्छा लगता है। 

    
सुश्री ओम ने कहा कि जो युवा साहित्य के क्षेत्र में आना चाहते हैं, उन्हें लिखने के साथ-साथ बहुत पढ़ना चाहिए। अपने वरिष्ठ लेखकों का लिखा हुआ पढ़ना चाहिए, उससे उन्हें भाषा, शिल्प और कथ्य की समझ आएगी। बिना पढ़े लिखना सफलता नहीं दिला सकता। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed