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Madhya Pradesh: राधा है पाकिस्तान से लौटी गीता का असली नाम, मां ने सुनाई उसके गुम होने की कहानी
Tue, 28 Jun 2022 06:15 PM IST
आनंद पवार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: आनंद पवार
Updated Tue, 28 Jun 2022 06:15 PM IST
सार
2015 में पाकिस्तान से भारत आई मूक बधिर गीता को छह साल बाद अपना परिवार फिर से मिल गया है। गीता का असली नाम राधा है। उसका परिवार महाराष्ट्र के परभणी का रहने वाला है।
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गीता ने अपनी मां और बहन के साथ
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
2015 में पाकिस्तान से भारत आई मूक बधिर गीता को छह साल बाद अपना परिवार फिर से मिल गया है। गीता का असली नाम राधा है। उसका परिवार महाराष्ट्र के परभणी का रहने वाला है। गीता एक साल पहले अपने परिवार से मिली थी। अब गीता ने अपनी मां के साथ सार्वजनिक रूप से सामने आकर उसकी मदद करने वालों का धन्यवाद दिया है।
गीता महाराष्ट्र के परभणी की रहने वाली है। गीता की मां मीना पंडारे और बहन पूजा बंसाडे के साथ मंगलवार को भदभदा स्थित रेलवे पुलिस मुख्यालय पहुंचीं। यहां उन्होंने परिवार से मिलाने में मदद करने वाले व्यक्तियों और संस्थाओं का धन्यवाद दिया। गीता का परिवार मार्च 2021 में ही मिल गया था, लेकिन गीता की मां के पैर का ऑपरेशन हुआ था और वह सभी का धन्यवाद करने मां के साथ आना चाहती थी। इस वजह से अब सार्वजनिक रूप से सभी का धन्यवाद देने का कार्यक्रम आयोजित किया गया।
मां ने बताया ऐसे हुई थी गुम
मां मीना पंडारे ने बताया कि गीता को बचपन से ही घूमने का शौक था। वह बचपन में कई बार बस और ट्रेन में बैठकर चली जाती थी, लेकिन बाद में मिल जाती थी। 1999 में आठ साल की उम्र में गीता ट्रेन में बैठकर चली गई। गीता के परिवार से मिलने के बाद पता चला कि वह घर के पास स्थित रेलवे स्टेशन से सचखंड एक्सप्रेस ट्रेन में बैठकर अमृतसर चली गई थी। वहां से भारत और पाकिस्तान के बीच चलने वाली समझौता एक्सप्रेस में बैठ गई और पाकिस्तान चली गई।
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पाकिस्तान में मिला गीता नाम
8 साल की उम्र में गीता लौहार पहुंच गई, जहां पाकिस्तानी पुलिस ने गीता को ईदी संस्था को सौप दिया। उसके मुक-बधिर होने का पता चलने के बाद उसे कराची की संस्था में शिफ्ट किया गया। गीता का पहले नाम फातिमा रखा गया। उसके पूजा-पाठ को देखकर समझ में आया कि वह हिंदू धर्म से है, इसके बाद बाद उसका नाम गीता रखा गया। अब उसकी मां ने बताया कि गीता का असली नाम राधा है।
घर के पास रेलवे स्टेशन और अस्पताल
इंदौर की आनंद संस्था के ज्ञानेंद्र पुरोहित ने बताया कि गीता को 2015 में पाकिस्तान से भारत लाया गया। उससे साइन लैंग्वेज में बताया कि उसके घर के पास रेलवे स्टेशन और मैटरनिटी होम है। वहां गन्ने की खेती होती है। रेलवे स्टेशन पर ट्रेन में डीजल का इंजन लगता है। पुरोहित ने बताया कि इसके बाद जीआरपी से मदद मांगी गई, जिसके बाद जीआरपी ने पोस्टर छपवाए गए।
मां ने बताया पेट पर जलने का निशान
पुरोहित ने बताया कि हमने गीता के परिवार को महाराष्ट्र, तेलंगाना और आंध्रप्रदेश में ढूंढने के प्रयास तेज गए। इस बीच एक परिवार का हमारे पास फोन आया। हम गीता को लेकर उनके घर पहुंचे। जहां गीता की मां ने बताया कि उसके पेट पर जलने का निशान है। इसकी जांच में उनकी बात सही साबित हुई। वहीं गीता ने भी अपने परिवार को पहचान लिया।
बड़ी होकर साइन लैंग्वेज शिक्षक बनूंगी
गीता उर्फ राधा की मां मीना पंडारे अकेली रहती है। उनकी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। पिता की मौत हो चुकी है। बहन की शादी हो चुकी है। गीता ने रेलवे पुलिस, आनंद संस्था समेत उनकी मदद करने वाले सभी लोगों को धन्यवाद दिया। साथ ही गीता ने कहा कि वह बड़ी होकर साइन लैंग्वेज शिक्षक बनना चाहती है।
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गीता महाराष्ट्र के परभणी की रहने वाली है। गीता की मां मीना पंडारे और बहन पूजा बंसाडे के साथ मंगलवार को भदभदा स्थित रेलवे पुलिस मुख्यालय पहुंचीं। यहां उन्होंने परिवार से मिलाने में मदद करने वाले व्यक्तियों और संस्थाओं का धन्यवाद दिया। गीता का परिवार मार्च 2021 में ही मिल गया था, लेकिन गीता की मां के पैर का ऑपरेशन हुआ था और वह सभी का धन्यवाद करने मां के साथ आना चाहती थी। इस वजह से अब सार्वजनिक रूप से सभी का धन्यवाद देने का कार्यक्रम आयोजित किया गया।
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मां ने बताया ऐसे हुई थी गुम
मां मीना पंडारे ने बताया कि गीता को बचपन से ही घूमने का शौक था। वह बचपन में कई बार बस और ट्रेन में बैठकर चली जाती थी, लेकिन बाद में मिल जाती थी। 1999 में आठ साल की उम्र में गीता ट्रेन में बैठकर चली गई। गीता के परिवार से मिलने के बाद पता चला कि वह घर के पास स्थित रेलवे स्टेशन से सचखंड एक्सप्रेस ट्रेन में बैठकर अमृतसर चली गई थी। वहां से भारत और पाकिस्तान के बीच चलने वाली समझौता एक्सप्रेस में बैठ गई और पाकिस्तान चली गई।
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पाकिस्तान में मिला गीता नाम
8 साल की उम्र में गीता लौहार पहुंच गई, जहां पाकिस्तानी पुलिस ने गीता को ईदी संस्था को सौप दिया। उसके मुक-बधिर होने का पता चलने के बाद उसे कराची की संस्था में शिफ्ट किया गया। गीता का पहले नाम फातिमा रखा गया। उसके पूजा-पाठ को देखकर समझ में आया कि वह हिंदू धर्म से है, इसके बाद बाद उसका नाम गीता रखा गया। अब उसकी मां ने बताया कि गीता का असली नाम राधा है।
घर के पास रेलवे स्टेशन और अस्पताल
इंदौर की आनंद संस्था के ज्ञानेंद्र पुरोहित ने बताया कि गीता को 2015 में पाकिस्तान से भारत लाया गया। उससे साइन लैंग्वेज में बताया कि उसके घर के पास रेलवे स्टेशन और मैटरनिटी होम है। वहां गन्ने की खेती होती है। रेलवे स्टेशन पर ट्रेन में डीजल का इंजन लगता है। पुरोहित ने बताया कि इसके बाद जीआरपी से मदद मांगी गई, जिसके बाद जीआरपी ने पोस्टर छपवाए गए।
मां ने बताया पेट पर जलने का निशान
पुरोहित ने बताया कि हमने गीता के परिवार को महाराष्ट्र, तेलंगाना और आंध्रप्रदेश में ढूंढने के प्रयास तेज गए। इस बीच एक परिवार का हमारे पास फोन आया। हम गीता को लेकर उनके घर पहुंचे। जहां गीता की मां ने बताया कि उसके पेट पर जलने का निशान है। इसकी जांच में उनकी बात सही साबित हुई। वहीं गीता ने भी अपने परिवार को पहचान लिया।
बड़ी होकर साइन लैंग्वेज शिक्षक बनूंगी
गीता उर्फ राधा की मां मीना पंडारे अकेली रहती है। उनकी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। पिता की मौत हो चुकी है। बहन की शादी हो चुकी है। गीता ने रेलवे पुलिस, आनंद संस्था समेत उनकी मदद करने वाले सभी लोगों को धन्यवाद दिया। साथ ही गीता ने कहा कि वह बड़ी होकर साइन लैंग्वेज शिक्षक बनना चाहती है।
