मध्यप्रदेश: शारीरिक रूप से दिव्यांग तैराक सत्येंद्र ने इंग्लिश चैनल पार कर रचा इतिहास
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
खुद को दुनिया के सामने सक्षम दिखाने के लिए ग्वालियर एक तैराक ने रविवार को इतिहास रचा दिया। 29 साल के सत्येंद्र सिंह ने शारीरिक रूप से अक्षम होने के बावजूद इंग्लिश चैनल को पार कर लिया है। वह एक तैराकी रिले टीम का हिस्सा थे।
ऐसा पहली बार हुआ है जब भारत के चार पैरा तैराकों ने किसी इंग्लिश चैनल को पार किया है। सत्येंद्र को इंग्लिश चैनल पार करने में 12 घंटे और 26 मिनट का समय लगा।
सबसे हैरानी की बात तो ये है कि सत्येंद्र चल नहीं सकते हैं। वह इंदौर में सरकारी नौकरी करते हैं। इस बड़ी उपलब्धि के लिए सत्येंद्र के साथ अन्य तीन तैराक भी थे। इन चारों ने जून में ही इस उपलब्धी के लिए तैयारी शुरू कर दी थी।
शारीरिक रूप से अक्षम होने के बाद भी यहां तक पहुंचना सत्येंद्र के लिए बहुत बड़ी बात है। इसके लिए उन्होंने बीते वर्ष मई से ही तैयारी शुरू कर दी थी। उस वक्त उन्होंने 36 किलोमीटर के अरब सागर को पार किया था। जिसमें उन्हें 5 घंटे और 43 मिनट का वक्त लगा था।
अरब सागर में 36 किलोमीटर तक की तैराकी भी कर चुके हैं सत्येंद्र
सबसे दिलचस्प बात तो ये है कि सत्येंद्र ऐसे पहले भारतीय हैं जिन्होंने 75 फीसदी दिव्यांगता के बावजूद भी अरब सागर में 36 किलोमीटर तक तैराकी की। सत्येंद्र जानते थे कि वह अपने निचले अंगों का प्रयोग नहीं कर सकते हैं बावजूद इसके वह इंग्लिश चैनल में 36 किलोमीटर डोवर स्ट्रेट तैराकी के लिए तैयार हो गए।
इससे पहले कोलकाता (पश्चिम बंगाल) के एम रहमान बायदा दुनिया के ऐसे पहले तैराक थे जिन्होंने घुटनों के नीचे के हिस्सों की अपंगता के होते हुए भी जुब्राल्टा की खाड़ी को पार किया था।
25 सितंबर, 2001 को रहमान ने खतरनाक लहरों से लड़ते हुए इस विजय अभियान को पार किया। इसके लिए उन्हें 4 घंटे 20 मिनट का वक्त लगा। इसके अलावा वह एशिया के ऐसे पहले विकलांग तैराक थे जिन्होंने 1997 में इंग्लिश चैनल पार किया था।
