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मध्य प्रदेश: मावठे ने तोड़ी किसानों की उम्मीद, उज्जैन संभाग के जिलों में फसलों को हुआ नुकसान...कहीं मक्के तो कहीं नींबू के आकार के ओले गिरे

Sat, 08 Jan 2022 03:08 PM IST
चंद्रप्रकाश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन Published by: चंद्रप्रकाश शर्मा Updated Sat, 08 Jan 2022 03:08 PM IST
सार

मावठे ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। मप्र के उज्जैन संभाग के कुछ जिलों में मावठे के साथ हुई ओलावृष्टि ने फसलों में नुकसान पहुंचाया है। उज्जैन सहित रतलाम, मंदसौर जिले में ज्यादा नुकसान हुआ है। 

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Madhya Pradesh: Mawthe broke the hopes of the farmers, damage to crops in the districts of Ujjain division ...
उज्जैन जिले के गांव में इस तरह गिरे ओले - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

मावठे ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। मप्र के उज्जैन संभाग के कुछ जिलों में मावठे के साथ हुई ओलावृष्टि ने फसलों में नुकसान पहुंचाया है। उज्जैन सहित रतलाम, मंदसौर जिले में ज्यादा नुकसान हुआ है। फसल नुकसानी का जायजा लेने के लिए सर्वे किया जाएगा।
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बीते दो दिनों में मप्र में मावठा गिर रहा है। अचानक बदले मौसम ने ठंडक बढ़ा दी है, जिससे जनजीवन प्रभावित हुआ है। फसलों को भी नुकसान हुआ है। शुक्रवार रात को बारिश के साथ ओले भी गिरे। तेज हवाएं चलीं। इसके चलते कुछ फसलों को नुकसान हुआ है। उज्जैन संभाग के उज्जैन, रतलाम व मंदसौर जिले से फसल नुकसानी की खबरें आ रही हैं। किसानों के चेहरों पर चिंता की लकीरें उभर आई है तो अब नुकसानी के सर्वे व मुआवजे की मांग भी उठ रही है। शुक्रवार को मावठा तो गिरा ही लेकिन कहीं-कहीं मक्के के आकार के ओले गिरे। करीब आधे से एक घंटे तक मावठा गिरा। इस कारण लहसुन, प्याज व चने की फसल को नुकसान हुआ। तेज हवा के कारण गेहूं की फसल भी आड़ी हो गई। 
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उज्जैन के कई गांवों में हुआ नुकसान
उज्जैन की बात करें तो गुरुवार से ही मौसम में बदलाव होने लगा था। गुरुवार को दिन में मावठे के बाद ठंड में इजाफा हुआ। शुक्रवार सुबह कोहरा छाया रहा और शाम को मौसम बिगड़ा। ठंडी हवाएं चली। रात को बारिश शुरू हो गई। उज्जैन जिले के गंगेडी, ब्रजराजखेड़ी, गोंदिया, कड़छली, बाड़कुमेद, टकवासा, दुदरसी, लेकोड़ा, मालीखेड़ी, जगोटी, बेड़ावन, लसुड़िया में करीब आधे घंटे तक बारिश के साथ ओले भी गिरे। इससे चना, गेहूं, आलू, प्याज, लहसुन की फसल को नुकसान हुआ है। ग्रामीण इलाकों में गोंदिया, लिंबापिपलिया, लेकोड़ा, उन्हेल सहित कई जगहों पर बर्फ की चादर बिछ गई। बड़नगर, महिदपुर, तराना सहित अन्य तहसीलों में भी कहीं-कहीं ओलावृष्टि हुई है। ओलावृष्टि के बाद फसलों को देखने के लिए कई जगह देर रात को ही किसान खेतों में पहुंचे। जिन खेतों में चने की फसल लगभग पक चुकी थी, वहां ज्यादा नुकसान हुआ है। किसानों का कहना है कि लहसुन व प्याज अभी ज्यादा बड़े नहीं हुए हैं, ऐसे में ओलावृष्टि के कारण इनको ज्यादा नुकसान हुआ है। 
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रतलाम जिले के गांवों में ऐसी हो गई गेहूं की फसल - फोटो : सोशल मीडिया
खेत में जम गई बर्फ की परत
रतलाम में भी ओलावृष्टि के कारण फसलों में नुकसान हुआ है। जिले के बांगरोद, धौंसवास, कलोरी, सेमलिया और नेगड़दा सहित अन्य गांवों में गेहूं, चना ,मटर, लहसुन और मैथी की फसलों को ज्यादा नुकसान पहुंचा है। किसानों के अनुसार रात में करीब नींबू के आकार के ओले गिरे थे। सुबह जब किसान फसल का नुकसान देखने खेतों पर पहुंचे तो अधिकांश फसल चौपट हो गई। खेतों में बर्फ की परत जमी हुई थी। मटर, लहसुन और मैथी की फसल में ज्यादा नुकसान हुआ है। उद्यानिकी फसलों में भी ओलावृष्टि से नुकसानी की बात कही जा रही है। इसी तरह जावरा क्षेत्र के सरसी केरवासा और उपले गांव में भी ओलावृष्टि से नुकसान हुआ है। ओलावृष्टि से हुए नुकसान के आकलन के लिए शनिवार को जिला प्रशासन ने जिले के विभिन्न विकासखंडों में सर्वेक्षण का कार्य शुरू कर दिया है। रतलाम विकास खंड के मांगरोल, बांगरोद, आलोट के पाटन सहित अन्य गांव में प्रशासन का अमला फसलों का सर्वेक्षण कर रहा है। कलेक्टर ने इसके निर्देश दिए थे।  

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मंदसौर के खेतों में इस तरह जम गई बर्फ - फोटो : सोशल मीडिया
मंदसौर के इन गांवों में हुआ नुकसान
मंदसौर के गरोठ, शामगढ़, सुवासरा, सीतामई, पिपल्यामंडी, मल्हारगढ़, दलोदा, मनासा, नीमच, जावद, रामपुरा, नारायणगढ़, क्यामपुर, कुरावन, बसई आदि गांवों में ओलावृष्टि से नुकसान हुआ। अफीम, इसबगोल, सरसो, गेहूं, चना, लहसुन की फसलें चौपट हुई। फसलों के नुकसान के सर्वे के लिए कलेक्टर गौतमसिंह ने सर्वे के निर्देश दिए थे। शनिवार को राजस्व अमले ने खेतों पर पहुंचकर सर्वे कार्य किया। कुछ गांव के किसान तहसील कार्य भी पहुंचे और हाथ में फसलें लेकर अधिकारियों को दिखाई कि कितना नुकसान हुआ है। 
 
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