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फर्जी आईडी, किराए की सिम और झूठे ऑफर: देवास में साइबर ठगी नेटवर्क का पर्दाफाश, 7 आरोपी पकड़े,दिल्ली से भी लिंक
Tue, 22 Sep 2026 11:31 PM IST
देवास ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देवास
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देवास
Published by: देवास ब्यूरो
Updated Tue, 22 Sep 2026 11:31 PM IST
सार
देवास में पुलिस ने ऐसे साइबर ठगी नेटवर्क का खुलासा किया है, जिसमें अलग-अलग लोगों के नाम पर जारी सिम का इस्तेमाल कर ठगी की जा रही थी। आरोपियों ने लोन, ऑनलाइन ट्रेडिंग और सस्ते मोबाइल-लैपटॉप का झांसा देकर छह मामलों में करीब 10 लाख रुपए ठग लिए।
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देवास में ठगी करने वाले गिरोह का पुलिस ने किया पर्दाफाश
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
सिम किसी के नाम पर, मोबाइल किसी और के हाथ में और ठगी का शिकार देश के अलग-अलग हिस्सों में बैठे लोग... देवास पुलिस ने ऐसे ही एक सायबर ठगी के नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए सात सदस्यों को गिरफ्तार किया है। आरोपी अपने और दूसरे लोगों के नाम से सिम कार्ड लेकर उन्हें गिरोह के सदस्यों तक पहुंचाते थे। इन सिम के जरिए कभी लोन दिलाने, कभी ऑनलाइन ट्रेडिंग में मुनाफे और कभी सस्ते मोबाइल-लैपटॉप बेचने का झांसा देकर लोगों से रकम ऐंठी जा रही थी। पुलिस ने छह मामलों में करीब 10 लाख रुपए की ठगी का खुलासा किया है।
गिरोह की परतें तब खुलीं, जब सायबर सेल भोपाल से देवास पुलिस को छह शिकायतों से जुड़े संदिग्ध मोबाइल नंबर और दस्तावेज मिले। तकनीकी जांच में नंबरों से जुड़े लोगों की जानकारी खंगाली गई तो एक के बाद एक गिरोह के सदस्य सामने आते गए। पूछताछ में पता चला कि गिरोह में सिम उपलब्ध कराने से लेकर फर्जी सोशल मीडिया आईडी बनाकर लोगों को ठगने तक हर एक सदस्य की अलग-अलग भूमिका थी।
पुलिस अधीक्षक कार्यालय में एसपी पुनीत गेहलोद ने प्रेस वार्ता के दौरान बताया कि सायबर सेल भोपाल से मिली छह शिकायतों और संदिग्ध मोबाइल नंबरों की जांच के दौरान गिरोह का नेटवर्क सामने आया। मोबाइल नंबरों से जुड़े उपभोक्ताओं की जानकारी और तकनीकी जांच के बाद पुलिस आरोपियों तक पहुंची। पूछताछ में सामने आया कि गिरोह में सिम उपलब्ध कराने से लेकर फर्जी सोशल मीडिया आईडी के जरिए लोगों को ठगने तक अलग-अलग कामों के लिए सदस्य नियुक्त थे।
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ये भी पढ़ें: नर्मदापुरम: इमरजेंसी सर्विस का घिनौना मजाक, मरीजों की जगह 108 एम्बुलेंस में भरे सब्जियों के बोरे, जांच के आदेश
पुलिस पूछताछ में आरोपी अजय परमार ने अपने नाम से छह सिम कार्ड का इस्तेमाल कर लोगों को लोन दिलाने के नाम पर ठगी करना बताया। वहीं नितिन बामनिया ने अपने नाम की दो सिम के अलावा अन्य लोगों की सिम अपने साथी विशाल को देने की बात कही। विशाल के जरिए ये सिम राजकुमार तक पहुंची। पुलिस के अनुसार राजकुमार और उसके गिरोह ने ऑनलाइन ट्रेडिंग के नाम पर लोगों को विश्वास में लेकर ठगी की। इसी तरह आरोपी अजय बागवान ने अपने नाम से 5-6 सिम कार्ड तथा अन्य लोगों की सिम अपने साथी अभिषेक कुमावत को देने की बात बताई। पुलिस के मुताबिक अभिषेक ने अंकित कुमावत के साथ मिलकर इंस्टाग्राम पर फर्जी आईडी बनाई और सस्ते दामों में मोबाइल व लैपटॉप बेचने का झांसा देकर लोगों से रकम ठगी।
दिल्ली में पहले ही जब्त हो चुकी हैं 398 सिमें
जांच में सामने आया कि इसी गिरोह से जुड़े लोगों के कब्जे से दिल्ली सायबर क्राइम पुलिस पहले अलग-अलग कंपनियों की 398 सिम कार्ड जब्त कर चुकी है। इस संबंध में वर्ष 2025 में दिल्ली के आईजीआई एयरपोर्ट थाने में प्रकरण दर्ज किया गया था। पुलिस अब आरोपियों को रिमांड पर लेकर गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों और पूर्व की वारदातों के संबंध में पूछताछ कर रही है। औद्योगिक क्षेत्र थाने में आरोपियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया गया है। आरोपियों के कब्जे से ठगी में प्रयुक्त मोबाइल फोन, सिम कार्ड और अन्य दस्तावेज जब्त किए गए हैं।
सात आरोपी गिरफ्तार
पुलिस ने मामले में सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें अजय पिता रामप्रसाद परमार, अजय पिता बन्नूलाल बागवान, नितिन पिता विष्णु प्रसाद बामनिया, अभिषेक पिता कमल कुमावत, विशाल पिता मेहरबान सिंह गौड़, राजकुमार उर्फ छोटू पिता नर्बत सिंह गौड़, अंकित पिता संतोष कुमावत शामिल हैं। कार्रवाई में थाना प्रभारी औद्योगिक क्षेत्र अमित सोलंकी, उप निरीक्षक गौरव नगावत, सउनि हितेंद्र चंद्रवंशी, प्रधान आरक्षक अजय बैस, जितेंद्र, घनश्याम बामनिया, संजय, आरक्षक रणवीर सिकरवार तथा सायबर सेल के प्रधान आरक्षक सचिन चौहान और शिवप्रताप सिंह सेंगर का योगदान प्रमुख रहा।
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गिरोह की परतें तब खुलीं, जब सायबर सेल भोपाल से देवास पुलिस को छह शिकायतों से जुड़े संदिग्ध मोबाइल नंबर और दस्तावेज मिले। तकनीकी जांच में नंबरों से जुड़े लोगों की जानकारी खंगाली गई तो एक के बाद एक गिरोह के सदस्य सामने आते गए। पूछताछ में पता चला कि गिरोह में सिम उपलब्ध कराने से लेकर फर्जी सोशल मीडिया आईडी बनाकर लोगों को ठगने तक हर एक सदस्य की अलग-अलग भूमिका थी।
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पुलिस अधीक्षक कार्यालय में एसपी पुनीत गेहलोद ने प्रेस वार्ता के दौरान बताया कि सायबर सेल भोपाल से मिली छह शिकायतों और संदिग्ध मोबाइल नंबरों की जांच के दौरान गिरोह का नेटवर्क सामने आया। मोबाइल नंबरों से जुड़े उपभोक्ताओं की जानकारी और तकनीकी जांच के बाद पुलिस आरोपियों तक पहुंची। पूछताछ में सामने आया कि गिरोह में सिम उपलब्ध कराने से लेकर फर्जी सोशल मीडिया आईडी के जरिए लोगों को ठगने तक अलग-अलग कामों के लिए सदस्य नियुक्त थे।
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पुलिस पूछताछ में आरोपी अजय परमार ने अपने नाम से छह सिम कार्ड का इस्तेमाल कर लोगों को लोन दिलाने के नाम पर ठगी करना बताया। वहीं नितिन बामनिया ने अपने नाम की दो सिम के अलावा अन्य लोगों की सिम अपने साथी विशाल को देने की बात कही। विशाल के जरिए ये सिम राजकुमार तक पहुंची। पुलिस के अनुसार राजकुमार और उसके गिरोह ने ऑनलाइन ट्रेडिंग के नाम पर लोगों को विश्वास में लेकर ठगी की। इसी तरह आरोपी अजय बागवान ने अपने नाम से 5-6 सिम कार्ड तथा अन्य लोगों की सिम अपने साथी अभिषेक कुमावत को देने की बात बताई। पुलिस के मुताबिक अभिषेक ने अंकित कुमावत के साथ मिलकर इंस्टाग्राम पर फर्जी आईडी बनाई और सस्ते दामों में मोबाइल व लैपटॉप बेचने का झांसा देकर लोगों से रकम ठगी।
दिल्ली में पहले ही जब्त हो चुकी हैं 398 सिमें
जांच में सामने आया कि इसी गिरोह से जुड़े लोगों के कब्जे से दिल्ली सायबर क्राइम पुलिस पहले अलग-अलग कंपनियों की 398 सिम कार्ड जब्त कर चुकी है। इस संबंध में वर्ष 2025 में दिल्ली के आईजीआई एयरपोर्ट थाने में प्रकरण दर्ज किया गया था। पुलिस अब आरोपियों को रिमांड पर लेकर गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों और पूर्व की वारदातों के संबंध में पूछताछ कर रही है। औद्योगिक क्षेत्र थाने में आरोपियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया गया है। आरोपियों के कब्जे से ठगी में प्रयुक्त मोबाइल फोन, सिम कार्ड और अन्य दस्तावेज जब्त किए गए हैं।
सात आरोपी गिरफ्तार
पुलिस ने मामले में सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें अजय पिता रामप्रसाद परमार, अजय पिता बन्नूलाल बागवान, नितिन पिता विष्णु प्रसाद बामनिया, अभिषेक पिता कमल कुमावत, विशाल पिता मेहरबान सिंह गौड़, राजकुमार उर्फ छोटू पिता नर्बत सिंह गौड़, अंकित पिता संतोष कुमावत शामिल हैं। कार्रवाई में थाना प्रभारी औद्योगिक क्षेत्र अमित सोलंकी, उप निरीक्षक गौरव नगावत, सउनि हितेंद्र चंद्रवंशी, प्रधान आरक्षक अजय बैस, जितेंद्र, घनश्याम बामनिया, संजय, आरक्षक रणवीर सिकरवार तथा सायबर सेल के प्रधान आरक्षक सचिन चौहान और शिवप्रताप सिंह सेंगर का योगदान प्रमुख रहा।
