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मध्यप्रदेश: इंदौर में जन्मीं लता जी आवाज को मीठा करने के लिए खातीं थी मिर्च, जलेबी-गुलाब जामुन की थीं शौकीन...जिस घर में हुआ था जन्म वहां अब है कपड़ों का शोरूम
Sun, 06 Feb 2022 12:15 PM IST
चंद्रप्रकाश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: चंद्रप्रकाश शर्मा
Updated Sun, 06 Feb 2022 12:15 PM IST
सार
स्वर साम्राज्ञी लता मंगेशकर का इंदौर से गहरा नाता रहा है। यहां के सिख मोहल्ले के मकान नंबर 22 में उनका जन्म हुआ था। करीब छह साल वे इंदौर में रहीं। शुरुआती संगीत भी इंदौर में सीखा। भय्यू महाराज से भी आत्मीयता रही थी।
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इंदौर आगमन पर भय्यू महाराज ने किया था लताजी का स्वागत
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
आखिरकार सुरीली आवाज शांत हो गई। थम गया सुरमयी सफर और चिरनिद्रा में लीन हो गई स्वर कोकिला। दवाओं और दुआओं ने अपना काम किया लेकिन अंततः अपनी आवाज को हम सबके बीच छोड़कर चलीं गईं लता मंगेशकर। अब सिर्फ यादें शेष हैं। बचपन से लेकर अब तक के सफर की स्मृतियां जेहन में उभर रही हैं। सबकी जुबां पर वे किस्से हैं जो जुड़े हैं लता जी से।
दरअसल रविवार की सुबह दुखद खबर से शुरू हुई। स्वर कोकिला लता मंगेशकर का 92 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। वे पिछले कुछ समय से अस्वस्थ थीं और मुंबई के अस्पताल में उपचार चल रहा था। डॉक्टरों की दवा के साथ देशवासियों की दुआ उनके साथ थीं मगर सांसों ने साथ छोड़ दिया और 6 फरवरी की सुबह लता जी ने दुनिया से विदा ली। वैसे तो लता जी का निधन सिनेमा और संगीत की दुनिया के साथ देश के लिए गहरी क्षति है लेकिन मप्र का इंदौर शोक में डूबा है। इसी इंदौर में स्वर साम्राज्ञी का जन्म हुआ था और यहीं की गलियों से पली-बढ़ीं लता जी ने खुद को उस संगीत के उस शिखर तक पहुंचाया था जिसे छू पाना मुमिकन नहीं।
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दरअसल रविवार की सुबह दुखद खबर से शुरू हुई। स्वर कोकिला लता मंगेशकर का 92 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। वे पिछले कुछ समय से अस्वस्थ थीं और मुंबई के अस्पताल में उपचार चल रहा था। डॉक्टरों की दवा के साथ देशवासियों की दुआ उनके साथ थीं मगर सांसों ने साथ छोड़ दिया और 6 फरवरी की सुबह लता जी ने दुनिया से विदा ली। वैसे तो लता जी का निधन सिनेमा और संगीत की दुनिया के साथ देश के लिए गहरी क्षति है लेकिन मप्र का इंदौर शोक में डूबा है। इसी इंदौर में स्वर साम्राज्ञी का जन्म हुआ था और यहीं की गलियों से पली-बढ़ीं लता जी ने खुद को उस संगीत के उस शिखर तक पहुंचाया था जिसे छू पाना मुमिकन नहीं।
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जिस जगह हुआ था लता जी का जन्म वहां अब है कपड़ो का शोरूम
- फोटो : सोशल मीडिया
सिख मोहल्ले में हुआ था जन्म, छह साल तक रहीं इंदौर में
28 सितंबर 1929 को इंदौर के सिख मोहल्ले में मकान नंबर 22 में लता मंगेशकर का जन्म हुआ था। इंदौर जिला अदालत से लगी गली में उनकी नानी का घर था, यहीं से उनकी संगीत शिक्षा शुरू हुई थी। इसी से लगे चौराहे और इस गली का नाम लता मंगेशकर के नाम पर रखने की घोषणा भी की गई है। करीब छह साल वे यहां रहीं और इसके बाद वे सात साल की उम्र में महाराष्ट्र चली गईं। लता मंगेशकर के इंदौर से जाने के कुछ समय बाद उनके घर को एक मुस्लिम परिवार ने खरीदा था। यह घर अभी मेहता परिवार के पास है। हालांकि जब मेहता परिवार ने यह घर खरीदा था तब उन्हें पता ही नहीं था कि यहां लता जी का जन्म हुआ है। बाद में जब पता चला तो खुद को सौभाग्यशाली समझा। बाद में उन्होंने घर का कायाकल्प करवाया। दुकान के एक हिस्से में लताजी का म्यूरल बना है। लता जी के छोटे भाई हृदयनाथ मंगेशकर भी यहां आ चुके हैं। वे इस घर को सुरों के मंदिर की तरह पूजा करते हैं। इस तरह लता जी का इंदौर वाला घर चार बार बिका। वर्तमान में मेहता परिवार ने घर के बाहरी हिस्से में कपड़े का शोरूम खोल लिया है। स्नेहल मेहता बताते हैं को करीब ढाई साल पहले वे इस शोरूम से अलग हो चुके हैं और अब उनके भाई नितिन मेहता इसका संचालन करते हैं। नितिन मेहता ने बताया कि मैं इस मकान का चौथा मालिक हूं। इसके पहले तीन बार यह बिका है। जब खरीदा था तब पता ही नहीं था कि यहीं पर लता जी का जन्म हुआ था।
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लता जी के घर के पास स्थित चौपाटी जहां वे खाने-पीने जातीं थींं
- फोटो : सोशल मीडिया
गुलाब जामुन और दही बड़े का भी था शौक
इंदौर से जुड़ी लता जी की यादों में एक याद है उनका मिर्च प्रेम। दरअसल, बहुत कम लोगों को यह बात पता है कि लता जी को मिर्च बहुत पसंद थी। वे गायकी को सुरीला बनाने के लिए मिर्च खातीं थी। इसके पीछे यह किस्सा जुड़ा है कि किसी ने लता जी से कहा था कि मिर्च खाने से आवाज सुरीली होती है। बस, इसके बाद से लता जी ने मिर्च खाना शुरू कर दिया। तीखी कोल्हापुरी मिर्च उन्हें पसंद थी। आवाज की मिठास की धनी लता जी को जलेबी से खासा प्रेम था। इंदौर में जिस गली में उनका जन्म हुआ था वहीं पर चौपाटी है जहां वे अक्सर खाने-पानी जाती थीं। समय के साथ यह चौपाटी जरूर बदल गई लेकिन लता जी की यादें आज भी यहां है और जब भी उनका जिक्र छिड़ता है तो अतीत की स्मृतियां जेहन में उभर आती है। लता जी इंदौर सराफा की खाऊ गली के गुलाब जाबुन, रबड़ी और दही बडे़ भी शौक से खातीं थीं। चाट गली और सराफा में अक्सर जातीं थी।
2005 में इंदौर पहुंचीं थी लता मंगेशकर
- फोटो : सोशल मीडिया
भय्यू महाराज से थीं प्रभावित, 2005 में आई थीं उनके आश्रम
इंदौर के आध्यात्मिक संत रहे दिवंगत भय्यू महाराज से भी लता मंगेशकर की आत्मीयता थी। वे भय्यू महाराज द्वारा गरीबों के हितों में किए गए कामों व महाराष्ट्र में उनके आश्रमों में संचालित गतिविधियों को लेकर काफी प्रभावित थीं। त्योहारों, जन्म दिवस व खास मौकों पर भय्यू महाराज से उनकी कई बार फोन पर बातें भी हुई। 21 अगस्त 2005 की रात में लता जी आखिरी बार इंदौर आई थीं। भय्यू महाराज के बुलावे पर वे उनके आश्रम में ही रुकी थीं। अगले दिन 22 अगस्त को बड़ी संख्या में मीडियाकर्मियों का जमावड़ा आश्रम के बाहर सुबह से लग गया था। दोपहर में उन्होंने मीडिया से बात करने का समय दिया। आश्रम में पूजन के बाद वे बाहर ही आईं भीड़ देखकर परेशान हुईं। कुछ देर संबोधित करने के बाद वे चली गई। लता जी के साथ उनकी बहन उषा मंगेशर और अन्य परिजन भी साथ थे।
लता जी के निवास पर जन्मदिन की बधाई देने पहुंचीं ताई ने की थी उनसे बात
- फोटो : सोशल मीडिया
इसी तरह पूर्व लोकसभा स्पीकर और इंदौर की लोकप्रिय ताई सुमित्रा महाजन भी लता मंगेशकर की मुरीद हैं। 2019 में लोकसभा स्पीकर रहते हुए ताई ने लता मंगेशकर के जन्मदिन पर उनके मुंबई स्थित निवास पर जाकर बधाई दी थी। दोनों के बीच उस दौरान आधा घंटा बातचीत हुई थी। ताई ने लता जी से कहा था कि आपसे बात करते हुए ऐसा लग रहा है जैसे मैं कोई गाना सुन रही हूं। आपकी बोली में गाने जैसी मधुरता है। इसी दौरान हृदयनाथ मंगेशकर के साथ इंदौर की भी चर्चा हुई थी। लता जी ने खास तौर पर इंदौर के खान-पान और सराफा का जिक्र किया था। महाजन ने मुंबई में ही लता जी की बहन मीना खड़ीकर द्वारा लिखित पुस्तक ‘मोठी तिची सावली’ का विमोचन भी किया था।
