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मध्यप्रदेश : 19 साल पुराने मामले में पूर्व मंत्री हरेंद्रजीत सिंह को एक साल कठोर कारावास की सजा
Thu, 20 Jun 2019 10:11 PM IST
अमर शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: अमर शर्मा
Updated Thu, 20 Jun 2019 10:11 PM IST
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हरेंद्रजीत सिंह ऊर्फ बब्बू
- फोटो : Facebook
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भोपाल की एक अदालत ने 19 साल पुराने आपराधिक मामले में मध्यप्रदेश के पूर्व मंत्री एवं जबलपुर के पूर्व विधायक हरेंद्रजीत सिंह ऊर्फ बब्बू को शासकीय कार्य में बाधा पहुंचाने के लिए दोषी ठहराते हुए बृहस्पतिवार को एक साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई।
हालांकि, सजा सुनाने के तुरंत बाद उसे उसी अदालत से जमानत मिल गई है।
अपर सत्र न्यायाधीश सुरेश सिंह की अदालत ने हरेंद्रजीत सिंह को भारतीय दंड विधान (भादंवि) की धारा 353 के तहत शासकीय कार्य में बाधा पहुंचाने के लिए दोषी ठहराते हुए एक वर्ष की कठोर कारावास की सजा सुनाई है।
इसके अलावा, अदालत ने उसे 2,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया।
हालांकि, अदालत ने उसे भादंवि की धारा 294 (अश्लील कार्य) एवं 147 में सबूतों के अभाव में दोषमुक्त कर दिया है।
जमानत मिलने के बाद हरेंद्रजीत ने बताया कि वह इस फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय में जाएंगे।
गौरतलब है कि हरेंद्रजीत का वाहन पुलिस ने जब्त कर लिया था जिसके बाद वह अपने 15 साथियों के साथ जबलपुर के गोहलपुर पुलिस थाने में 28 जून 2000 की मध्यरात्रि को गए और जब पुलिस ने उसके वाहन को नहीं छोड़ा तो उसने आरक्षक आर एस पेंद्रे पर स्टूल उठाकर हमला करने का प्रयास किया था और गाली गलौच की थी। इस मामले में उन पर यह मामला दर्ज था। उस वक्त वह विधायक थे।
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हालांकि, सजा सुनाने के तुरंत बाद उसे उसी अदालत से जमानत मिल गई है।
अपर सत्र न्यायाधीश सुरेश सिंह की अदालत ने हरेंद्रजीत सिंह को भारतीय दंड विधान (भादंवि) की धारा 353 के तहत शासकीय कार्य में बाधा पहुंचाने के लिए दोषी ठहराते हुए एक वर्ष की कठोर कारावास की सजा सुनाई है।
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इसके अलावा, अदालत ने उसे 2,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया।
हालांकि, अदालत ने उसे भादंवि की धारा 294 (अश्लील कार्य) एवं 147 में सबूतों के अभाव में दोषमुक्त कर दिया है।
जमानत मिलने के बाद हरेंद्रजीत ने बताया कि वह इस फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय में जाएंगे।
गौरतलब है कि हरेंद्रजीत का वाहन पुलिस ने जब्त कर लिया था जिसके बाद वह अपने 15 साथियों के साथ जबलपुर के गोहलपुर पुलिस थाने में 28 जून 2000 की मध्यरात्रि को गए और जब पुलिस ने उसके वाहन को नहीं छोड़ा तो उसने आरक्षक आर एस पेंद्रे पर स्टूल उठाकर हमला करने का प्रयास किया था और गाली गलौच की थी। इस मामले में उन पर यह मामला दर्ज था। उस वक्त वह विधायक थे।
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