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Madhya Pradesh Election Result: साध्वी प्रज्ञा-दिग्विजय सिंह ने मुस्कुराकर किया रुझानों का 'स्वागत'
Thu, 23 May 2019 06:50 PM IST
योगेश साहू
इलेक्शन डेस्क, अमर उजाला
इलेक्शन डेस्क, अमर उजाला
Published by: योगेश साहू
Updated Thu, 23 May 2019 06:50 PM IST
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दिग्विजय सिंह और साध्वी प्रज्ञा ठाकुर
- फोटो : ANI
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देश की सबसे हॉट लोकसभा सीट भोपाल में मतगणना आखिरी चरण में है। यहां साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर करीब 3 लाख वोटों से आगे हैं, लेकिन नतीजों की आधिकारिक घोषणा से पहले कांग्रेस पार्टी के प्रत्याशी और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने हार स्वीकार कर ली। उन्होंने मीडिया से कहा कि भोपाल के मतदाता भाईयों-बहनों के जनादेश को स्वीकार करता हूं। हालांकि मतगणना से पहले उन्होंने एग्जिट पोल के नतीजों को बोगस बताया था। बता दें कि प्रदेश में सबसे ज्यादा 30 उम्मीदवार भोपाल सीट पर हैं।
ऐसे चला मतगणना का राउंड
भोपाल में मतगणना के पहले राउंड प्रज्ञा ठाकुर को 41595 और दिग्विजय सिंह को 22089 वोट मिले थे। इसके बाद प्रज्ञा करीब 25 हजार वोटों से आगे रहीं। खास बात ये थी कि डाक से मिले मतपत्रों की गणना में वे आगे निकलीं। इसके बाद जब ईवीएम के मतों की गिनती शुरू हुई तो वोटों का अंतर बढ़ता चला गया। शाम साढ़े चार बजे तक प्रज्ञा ने 3 लाख वोटों की बढ़त ले ली थी। इस दौरान एक तस्वीर मीडिया में सामने आई, जिसमें दिग्विजय सिंह और साध्वी प्रज्ञा एक-दूसरे से कुछ ही दूरी पर बैठे नतीजों का इंतजार करते दिखाई दे रहे थे। ये तस्वीर मतगणना स्थल की थी। तस्वीर में दोनों ही मुस्कुराते नजर आ रहे हैं।
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बता दें मतगणना से एक दिन पहले मौन धारण करने वाली प्रज्ञा दो राउंड में लीड लेने के बाद सीहोर के प्रसिद्ध गणेश मंदिर में दर्शन के लिए गईं। उन्होंने अपना मौन व्रत भी खत्म कर दिया। इसके साथ ही उन्होंने सबसे पहले जय श्री राम के नारे लगाए और विक्ट्री साइन भी दिखाया। वे 1 लाख से ज्यादा वोट से आगे चल रही हैं। इससे पहले दिग्विजय सिंह के भाई विधायक लक्ष्मण सिंह भोपाल में ही मतगणना केंद्र पर पहुंचे, उन्होंने कहा कि हमने उम्मीद नहीं छोड़ी है।
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ऐसे चला मतगणना का राउंड
भोपाल में मतगणना के पहले राउंड प्रज्ञा ठाकुर को 41595 और दिग्विजय सिंह को 22089 वोट मिले थे। इसके बाद प्रज्ञा करीब 25 हजार वोटों से आगे रहीं। खास बात ये थी कि डाक से मिले मतपत्रों की गणना में वे आगे निकलीं। इसके बाद जब ईवीएम के मतों की गिनती शुरू हुई तो वोटों का अंतर बढ़ता चला गया। शाम साढ़े चार बजे तक प्रज्ञा ने 3 लाख वोटों की बढ़त ले ली थी। इस दौरान एक तस्वीर मीडिया में सामने आई, जिसमें दिग्विजय सिंह और साध्वी प्रज्ञा एक-दूसरे से कुछ ही दूरी पर बैठे नतीजों का इंतजार करते दिखाई दे रहे थे। ये तस्वीर मतगणना स्थल की थी। तस्वीर में दोनों ही मुस्कुराते नजर आ रहे हैं।
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Bhopal: BJP's candidate Pragya Thakur and Congress candidate Digvijaya Singh at the counting center. #ElectionResults2019 #MadhyaPradesh pic.twitter.com/7sWGzxnkAR
— ANI (@ANI) May 23, 2019
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बता दें मतगणना से एक दिन पहले मौन धारण करने वाली प्रज्ञा दो राउंड में लीड लेने के बाद सीहोर के प्रसिद्ध गणेश मंदिर में दर्शन के लिए गईं। उन्होंने अपना मौन व्रत भी खत्म कर दिया। इसके साथ ही उन्होंने सबसे पहले जय श्री राम के नारे लगाए और विक्ट्री साइन भी दिखाया। वे 1 लाख से ज्यादा वोट से आगे चल रही हैं। इससे पहले दिग्विजय सिंह के भाई विधायक लक्ष्मण सिंह भोपाल में ही मतगणना केंद्र पर पहुंचे, उन्होंने कहा कि हमने उम्मीद नहीं छोड़ी है।
तीन दशक से भाजपा का कब्जा
भोपाल संसदीय क्षेत्र 1984 से ही भाजपा का गढ़ रहा है। पिछले आठ चुनाव से यहां भाजपा जीती है। 1984 से पहले यह सीट कांग्रेस का गढ़ हुआ करती थी। पूर्व मुख्य सचिव रहे स्व. सुशीलचंद वर्मा यहां से 4 बार सांसद रहे। बाकी तीन चुनावों में पूर्व मुख्यमंत्रियों में उमा भारती और कैलाश जोशी जीते। 2014 के चुनाव में आलोक संजर ने कांग्रेस के पीसी शर्मा को 3,70,696 वोटों से हराया था।
रिकॉर्ड वोटिंग भी हुई
भोपाल सीट पर 1957 से लेकर अब तक पहली बार 2019 में सबसे ज्यादा 65.69 प्रतिशत मतदान हुआ है। साल 2014 के आम चुनाव में यहां 57.79 फीसदी मतदान हुआ था। सिर्फ दो ऐसे मौके हैं, जब मतदान का प्रतिशत 60 से अधिक रहा है। पहली बार 1977 में इमरजेंसी के बाद 61.76% और दूसरी बार 1999 में 61.88 प्रतिशत मतदान हुआ। 1957 में भोपाल में पहला लोकसभा चुनाव हुआ था। इसमें कांग्रेस की मैमुना सुल्तान जीती थीं।
मतगणना के रुझान देखने के बाद भाजपा उम्मीदवार साध्वी प्रज्ञा ठाकुर ने मीडिया से बात करते हुए कि निश्चित ही मेरी जीत होगी। मेरी विजय में धर्म की विजय होगी, अधर्म का नाश होगा। मैं भोपाल की जनता का आभार देती हूं।
भोपाल संसदीय क्षेत्र 1984 से ही भाजपा का गढ़ रहा है। पिछले आठ चुनाव से यहां भाजपा जीती है। 1984 से पहले यह सीट कांग्रेस का गढ़ हुआ करती थी। पूर्व मुख्य सचिव रहे स्व. सुशीलचंद वर्मा यहां से 4 बार सांसद रहे। बाकी तीन चुनावों में पूर्व मुख्यमंत्रियों में उमा भारती और कैलाश जोशी जीते। 2014 के चुनाव में आलोक संजर ने कांग्रेस के पीसी शर्मा को 3,70,696 वोटों से हराया था।
रिकॉर्ड वोटिंग भी हुई
भोपाल सीट पर 1957 से लेकर अब तक पहली बार 2019 में सबसे ज्यादा 65.69 प्रतिशत मतदान हुआ है। साल 2014 के आम चुनाव में यहां 57.79 फीसदी मतदान हुआ था। सिर्फ दो ऐसे मौके हैं, जब मतदान का प्रतिशत 60 से अधिक रहा है। पहली बार 1977 में इमरजेंसी के बाद 61.76% और दूसरी बार 1999 में 61.88 प्रतिशत मतदान हुआ। 1957 में भोपाल में पहला लोकसभा चुनाव हुआ था। इसमें कांग्रेस की मैमुना सुल्तान जीती थीं।
मतगणना के रुझान देखने के बाद भाजपा उम्मीदवार साध्वी प्रज्ञा ठाकुर ने मीडिया से बात करते हुए कि निश्चित ही मेरी जीत होगी। मेरी विजय में धर्म की विजय होगी, अधर्म का नाश होगा। मैं भोपाल की जनता का आभार देती हूं।
