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खटुआ हत्याकांड: घटनास्थल पर हुआ सीन रिक्रिएट, फिर लिए जा रहे संबंधितों के बयान

Mon, 07 Feb 2022 07:31 PM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: दिनेश शर्मा Updated Mon, 07 Feb 2022 07:31 PM IST
सार

बहुचर्चित खटुआ हत्याकांड को तीन साल से अधिक का समय गुजर गया है। इसके बावजूद भी अंधी हत्या की गुत्थी पुलिस अभी तक नहीं सुलझा पाई है। सोमवार को फॉरेंसिक मेडिको लीगल एक्सपर्ट तथा फॉरेंसिक टीम ने घटना स्थल में पहुंचकर सीन रिक्रिएट किया।
 

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Khatua massacre: Scene recreated at the scene, then the statements of the concerned are being taken
Jabalpur High Court - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

तीन साल से अधिक का समय बीत जाने के बावजूद बहुचर्चित खटुआ हत्याकांड की गुत्थी पुलिस अभी तक नहीं सुलझा पाई है। सोमवार को फॉरेंसिक मेडिको लीगल एक्सपर्ट तथा फॉरेंसिक टीम ने घटना स्थल में पहुंचकर सीन रिक्रिएट किया।
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 गौरतलब है कि देश की पहली स्वेदशी आर्टलरी गन धनुष में चायनिज बैरिंग घोटाले की जांच में सीबीआई के निशाने पर रहें जूनियर वर्कस मैनेजर शारदा चरण खटुआ की संदिग्ध परिस्थिति में 5 फरवरी 2019 को जीसीएफ के पंप हाउस में समीप गड्ढे में लाश मिली थी। गन में उपयोग होने वाला वायर लैस रोलिंग बैरिंग के ठेका दिल्ली की सिध्दी सेल्स को दिया गया था। कंपनी द्वारा चायना मेड बैरिंग में मेड इन जर्मन की सील लगाकर सप्लाई की गई थी। दिल्ली सीबीआई इस मामले की जांच कर रही थी और पूछताछ के लिए 17 जनवरी 2019 को जीसीएफ में पदस्थ जीडब्ल्यूएम खटुआ को तलब किया था। उनके पति 17 जनवरी 2019 की सुबह घर से निकले थे, जो वापस नहीं लौटे। बीस दिन बाद की क्षत-विक्षित लाश शासकीय निवास से एक किलोमीटर दूर पंप हाउस के पास 5 फरवरी 2019 को मिली। फैक्टरी क्षेत्र में मैन गेट में लगे सीसीटीवी कैमरे में वह अंतिम बार दिखाई दिए थे। प्रकरण की जांच सीबीआई को सौंपे जाने की मांग करते हुए उनकी पत्नी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, जो लंबित है।
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हत्याकांड की जांच के लिए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक डॉ. याचिका में कहा गया था कि आठ माह से अधिक का समय गुजर जाने के बाद भी पुलिस आरोपियों को गिरफतार नहीं कर पाई है, इसलिए प्रकरण को जांच के लिए सीबीआई के सुपुर्द किया जाए। पूर्व में पुलिस विभाग की तरफ से न्यायालय को बताया गया था कि हत्याकांड की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया है। इसके अलावा भोपाल स्थित मेडिको लीगल इंस्टीट्यूट व सागर स्थित एफएसएल से जांच के लिए भेजे गए मृते के कपडों, घटना स्थल में मिला खून सहित अन्य नमूने की रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई है। एकलपीठ ने पुलिस अधीक्षक को निर्देषित किया था कि रिपोर्ट प्राप्त करने संस्थाओं के डायरेक्टर से व्यक्तिगत रूप से संपर्क करने के निर्देश दिए थे।
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पिछली तीन सुनवाई से हाईकोर्ट ने जांच पुलिस अधीक्षक डॉ. संजय अग्रवाल को सौंपी थी। एएसपी अग्रवाल ने बताया कि सोमवार को फॉरेंसिक मेडिको लीगल एक्सपर्ट डॉ. दिव्य किशेर सतपति तथा फॉरेंसिक टीम की उपस्थिति में घटनास्थल पर पहुंचकर सीन रिक्रिएट किया गया। इसके अलावा एक्सपर्ट द्वारा पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का अवलोकन किया गया और संबंधित डॉक्टरों से चर्चा की गई। सीबीआई द्वारा जेडब्ल्यूएम खटुआ के खिलाफ न्यायालय में चार्जशीट पेश की गई है। पुलिस ने सीबीआई से उक्त चार्जशीट मांगी है। इसके अलावा संबंधित व्यक्तियों के दुबारा वयान दर्ज किए जा रहे हैं। 
 
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