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ओंकारेश्वर में नर्मदा का विकराल रूप: घाटों पर 10 फीट बढ़ा जलस्तर, बरगी से छोड़ा जा रहा चार हजार क्यूसेक पानी
Fri, 04 Sep 2026 03:13 PM IST
खंडवा ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ओंकारेश्वर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ओंकारेश्वर
Published by: खंडवा ब्यूरो
Updated Fri, 04 Sep 2026 03:13 PM IST
सार
अमरकंटक, डिंडोरी, मंडला और जबलपुर के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में लगातार बारिश के चलते ओंकारेश्वर में नर्मदा नदी का जलस्तर करीब 10 फीट बढ़ गया है। बरगी बांध के 13 गेट खोले गए हैं और करीब 3990 क्यूमेक्स पानी छोड़ा जा रहा है।
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ओंकारेश्वर में नर्मदा नदी का जलस्तर बढ़ा
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
पूर्वी भाग में अमरकंटक, डिंडोरी, मंडला और जबलपुर के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में लगातार हो रही बारिश का असर अब मां नर्मदा के जलस्तर पर दिखाई देने लगा है। ओंकारेश्वर में नर्मदा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ा है। घाटों पर पानी सामान्य जलस्तर से करीब 10 फीट ऊपर पहुंच गया है। हालांकि फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है और प्रशासन तथा बांध प्रबंधन लगातार जलस्तर पर नजर बनाए हुए हैं। नर्मदा के बढ़ते जलस्तर के कारण घाटों पर श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों की आवाजाही को लेकर विशेष सतर्कता बरती जा रही है। एसडीईआरएफ के जवान घाटों पर तैनात रहकर लोगों को सावधानी बरतने और नदी के बढ़े हुए जलस्तर में नहीं जाने की सलाह दे रहे हैं।
इंदिरा सागर और ओंकारेश्वर बांध के सभी गेट बंद
वर्तमान स्थिति में ओंकारेश्वर बांध के सभी गेट बंद हैं। बांध की आठों टरबाइनों के माध्यम से लगभग 1896 क्यूमेक्स पानी छोड़ा जा रहा है। वहीं दूसरी ओर बरगी बांध से करीब 3990 क्यूमेक्स पानी छोड़ा जा रहा है।बरगी बांध के 13 गेट लगभग 1.96 मीटर तक खोले गए हैं। बरगी से छोड़ा गया पानी नर्मदा के प्रवाह के साथ आगे बढ़ते हुए इंदिरा सागर बांध में पहुंचेगा और वहां से नर्मदा के डाउनस्ट्रीम क्षेत्र में इसका प्रभाव दिखाई देगा।
इंदिरा सागर में फिलहाल पर्याप्त खाली क्षमता
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, इंदिरा सागर बांध में फिलहाल पर्याप्त खाली क्षमता उपलब्ध है। इंदिरा सागर देश के बड़े जलाशयों में शामिल है और इसका जलभराव क्षेत्र काफी विस्तृत है। यही कारण है कि ऊपरी क्षेत्रों से आने वाले पानी को तत्काल ओंकारेश्वर क्षेत्र में किसी बड़े खतरे के रूप में नहीं देखा जा रहा है। जानकारी के अनुसार, वर्तमान परिस्थितियों में इंदिरा सागर अथवा ओंकारेश्वर बांध के गेट खोलने की तत्काल कोई संभावना दिखाई नहीं दे रही है। हालांकि लगातार बारिश और जलग्रहण क्षेत्रों से आने वाले पानी को देखते हुए बांध प्रबंधन द्वारा स्थिति की लगातार निगरानी की जा रही है।
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श्रद्धालुओं से सावधानी बरतने की अपील
ओंकारेश्वर में नर्मदा का बढ़ता जलस्तर तीर्थयात्रियों के लिए आकर्षण का विषय जरूर है, लेकिन नदी का प्रवाह तेज होने के कारण सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण है। प्रशासन द्वारा श्रद्धालुओं से अपील की जा रही है कि वे बढ़े हुए जलस्तर को देखते हुए नदी के किनारे निर्धारित सुरक्षित क्षेत्रों में ही रहें तथा गहरे पानी में जाने का प्रयास न करें। विशेषकर बच्चों और बुजुर्गों को घाटों के आसपास ले जाते समय अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है।
ये भी पढ़ें- जन्माष्टमी: राधा-रुक्मिणी नहीं, यहां सुदामा संग विराजते हैं कृष्ण; 5000 साल पुरानी दोस्ती के गवाह गट्ठर वृक्ष
नर्मदा के जलस्तर पर हर पल नजर
बरगी से छोड़े गए पानी का प्रभाव आगामी समय में नर्मदा के विभिन्न हिस्सों में दिखाई देगा। हालांकि इंदिरा सागर जलाशय में उपलब्ध खाली क्षमता फिलहाल राहत देने वाली स्थिति है, फिर भी बारिश की स्थिति और जलप्रवाह में होने वाले बदलाव को देखते हुए प्रशासन एवं बांध प्रबंधन की निगाहें नर्मदा के जलस्तर पर टिकी हैं।
फिलहाल, ओंकारेश्वर में स्थिति सामान्य है, लेकिन नर्मदा अपने पूरे वेग में है। घाटों पर बढ़ा हुआ करीब 10 फीट जलस्तर श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को प्रकृति की शक्ति का एहसास करा रहा है। ऐसे में सावधानी ही सबसे बड़ी सुरक्षा है।
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इंदिरा सागर और ओंकारेश्वर बांध के सभी गेट बंद
वर्तमान स्थिति में ओंकारेश्वर बांध के सभी गेट बंद हैं। बांध की आठों टरबाइनों के माध्यम से लगभग 1896 क्यूमेक्स पानी छोड़ा जा रहा है। वहीं दूसरी ओर बरगी बांध से करीब 3990 क्यूमेक्स पानी छोड़ा जा रहा है।बरगी बांध के 13 गेट लगभग 1.96 मीटर तक खोले गए हैं। बरगी से छोड़ा गया पानी नर्मदा के प्रवाह के साथ आगे बढ़ते हुए इंदिरा सागर बांध में पहुंचेगा और वहां से नर्मदा के डाउनस्ट्रीम क्षेत्र में इसका प्रभाव दिखाई देगा।
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इंदिरा सागर में फिलहाल पर्याप्त खाली क्षमता
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, इंदिरा सागर बांध में फिलहाल पर्याप्त खाली क्षमता उपलब्ध है। इंदिरा सागर देश के बड़े जलाशयों में शामिल है और इसका जलभराव क्षेत्र काफी विस्तृत है। यही कारण है कि ऊपरी क्षेत्रों से आने वाले पानी को तत्काल ओंकारेश्वर क्षेत्र में किसी बड़े खतरे के रूप में नहीं देखा जा रहा है। जानकारी के अनुसार, वर्तमान परिस्थितियों में इंदिरा सागर अथवा ओंकारेश्वर बांध के गेट खोलने की तत्काल कोई संभावना दिखाई नहीं दे रही है। हालांकि लगातार बारिश और जलग्रहण क्षेत्रों से आने वाले पानी को देखते हुए बांध प्रबंधन द्वारा स्थिति की लगातार निगरानी की जा रही है।
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श्रद्धालुओं से सावधानी बरतने की अपील
ओंकारेश्वर में नर्मदा का बढ़ता जलस्तर तीर्थयात्रियों के लिए आकर्षण का विषय जरूर है, लेकिन नदी का प्रवाह तेज होने के कारण सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण है। प्रशासन द्वारा श्रद्धालुओं से अपील की जा रही है कि वे बढ़े हुए जलस्तर को देखते हुए नदी के किनारे निर्धारित सुरक्षित क्षेत्रों में ही रहें तथा गहरे पानी में जाने का प्रयास न करें। विशेषकर बच्चों और बुजुर्गों को घाटों के आसपास ले जाते समय अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है।
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नर्मदा के जलस्तर पर हर पल नजर
बरगी से छोड़े गए पानी का प्रभाव आगामी समय में नर्मदा के विभिन्न हिस्सों में दिखाई देगा। हालांकि इंदिरा सागर जलाशय में उपलब्ध खाली क्षमता फिलहाल राहत देने वाली स्थिति है, फिर भी बारिश की स्थिति और जलप्रवाह में होने वाले बदलाव को देखते हुए प्रशासन एवं बांध प्रबंधन की निगाहें नर्मदा के जलस्तर पर टिकी हैं।
फिलहाल, ओंकारेश्वर में स्थिति सामान्य है, लेकिन नर्मदा अपने पूरे वेग में है। घाटों पर बढ़ा हुआ करीब 10 फीट जलस्तर श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को प्रकृति की शक्ति का एहसास करा रहा है। ऐसे में सावधानी ही सबसे बड़ी सुरक्षा है।
