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Khandwa: नाबालिग को भगा ले गया था युवक, बेटे के डीएनए रिपोर्ट को आधार बनाकर कोर्ट ने दी 10 साल की सजा
Sun, 13 Nov 2022 09:04 AM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, खंडवा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, खंडवा
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Sun, 13 Nov 2022 09:04 AM IST
सार
खंडवा कोर्ट ने रेप के मामले में आरोपी को दोषी करार देते हुए दस साल की सजा सुनाई है। फैसला इसलिए भी अहम है क्योंकि कोर्ट ने आरोपी के बच्चे की डीएनए रिपोर्ट को आधार मानकर उसे दोषी ठहराया है। आरोपी नाबालिग को भगा ले गया था।
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सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
मध्य प्रदेश की खंडवा कोर्ट ने दुष्कर्म मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। बच्चे की डीएनए रिपोर्ट को आधार बनाकर पिता को दोषी मान दस साल की सजा सुनाई गई है। साथ ही दो हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
इस केस की कहानी भी थोड़ी अलग है। 2017 में नाबालिग और उसी के गांव का एक युवक घर से भागे थे। 2019 में पुलिस ने उन्हें तलाश लिया, पर जब तक उनकी गोद में छह महीने का बच्चा था। पुलिस ने बच्चे और नाबालिग को परिजनों को सौंप दिया था और युवक को रेप के केस में पकड़कर कोर्ट में पेश किया। इस बीच बच्चे का डीएनए टेस्ट कराया गया, जिसमें युवक का बेटा होना पाया गया था।
मामले को पूरा समझने के लिए विस्तार से जानते हैं। बता दें कि मामला खंडवा जिले के पंधाना के एक गांव का है। यहां रहने वाली 16 वर्षीय किशोरी 24 जुलाई 2017 की शाम को घर में काम कर रह थी। तभी उसे गांव का ही 24 वर्षीय सुरेश उर्फ सुरपाल पिता रूपसिंह शादी का झांसा देकर भगा ले गया था। परिजनों को पहले लगा कि बेटी लापता हो गई है, बाद में पता चला कि गांव का सुरेश भी गायब है। तब शंका जताते हुए पंधाना थाने में शिकायत की गई थी। साथ ही बताया था कि सुरेश भी लापता है। पुलिस ने सुरेश पर प्रकरण दर्ज कर उनकी तलाश शुरू कर दी थी।
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करीब दो साल बाद 16 जनवरी 2019 को पुलिस ने सुरेश और नाबालिग को बरामद कर लिया, लेकिन दोनों की छह माह की संतान थी। पुलिस ने पुष्टि के आधार पर बच्चे का डीएनए टेस्ट कराया, जिसमें पता लग गया कि सुरेश ही बच्चे का पिता है। पुलिस ने बच्चे और नाबालिग को घर छोड़ दिया और सुरेश को रेप केस में कोर्ट में पेश किया। न्यायालय विशेष न्यायाधीश, पॉक्सो एक्ट प्राची पटेल ने सुनवाई की। कोर्ट ने अभियोजन के द्वारा पेश सबूतों के आधार पर पाया कि नाबालिग के साथ आरोपी ने बलात्कार किया। वह गर्भवती हुई और एक संतान को जन्म दिया गया। कोर्ट ने सुरेश को 10 वर्ष का सश्रम कारावास एवं 2 हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया।
फैसले के साथ ही विशेष न्यायाधीश ने अहम टिप्पणी की। फैसले के साथ उन्होंने लिखा है कि वर्तमान परिवेश में बालकों के प्रति अपराध मे निरंतर वृद्धि होती जा रही है जिन पर नियंत्रण करना आवश्यक है। आरोपित सुरेश द्वारा गंभीर प्रकृति का अपराध कारित किया गया है। अभियोजन की ओर से प्रकरण का संचालन सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी रूपेश तमोली ने किया।
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इस केस की कहानी भी थोड़ी अलग है। 2017 में नाबालिग और उसी के गांव का एक युवक घर से भागे थे। 2019 में पुलिस ने उन्हें तलाश लिया, पर जब तक उनकी गोद में छह महीने का बच्चा था। पुलिस ने बच्चे और नाबालिग को परिजनों को सौंप दिया था और युवक को रेप के केस में पकड़कर कोर्ट में पेश किया। इस बीच बच्चे का डीएनए टेस्ट कराया गया, जिसमें युवक का बेटा होना पाया गया था।
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मामले को पूरा समझने के लिए विस्तार से जानते हैं। बता दें कि मामला खंडवा जिले के पंधाना के एक गांव का है। यहां रहने वाली 16 वर्षीय किशोरी 24 जुलाई 2017 की शाम को घर में काम कर रह थी। तभी उसे गांव का ही 24 वर्षीय सुरेश उर्फ सुरपाल पिता रूपसिंह शादी का झांसा देकर भगा ले गया था। परिजनों को पहले लगा कि बेटी लापता हो गई है, बाद में पता चला कि गांव का सुरेश भी गायब है। तब शंका जताते हुए पंधाना थाने में शिकायत की गई थी। साथ ही बताया था कि सुरेश भी लापता है। पुलिस ने सुरेश पर प्रकरण दर्ज कर उनकी तलाश शुरू कर दी थी।
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करीब दो साल बाद 16 जनवरी 2019 को पुलिस ने सुरेश और नाबालिग को बरामद कर लिया, लेकिन दोनों की छह माह की संतान थी। पुलिस ने पुष्टि के आधार पर बच्चे का डीएनए टेस्ट कराया, जिसमें पता लग गया कि सुरेश ही बच्चे का पिता है। पुलिस ने बच्चे और नाबालिग को घर छोड़ दिया और सुरेश को रेप केस में कोर्ट में पेश किया। न्यायालय विशेष न्यायाधीश, पॉक्सो एक्ट प्राची पटेल ने सुनवाई की। कोर्ट ने अभियोजन के द्वारा पेश सबूतों के आधार पर पाया कि नाबालिग के साथ आरोपी ने बलात्कार किया। वह गर्भवती हुई और एक संतान को जन्म दिया गया। कोर्ट ने सुरेश को 10 वर्ष का सश्रम कारावास एवं 2 हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया।
फैसले के साथ ही विशेष न्यायाधीश ने अहम टिप्पणी की। फैसले के साथ उन्होंने लिखा है कि वर्तमान परिवेश में बालकों के प्रति अपराध मे निरंतर वृद्धि होती जा रही है जिन पर नियंत्रण करना आवश्यक है। आरोपित सुरेश द्वारा गंभीर प्रकृति का अपराध कारित किया गया है। अभियोजन की ओर से प्रकरण का संचालन सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी रूपेश तमोली ने किया।
